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जल संरक्षण को लेकर अफसर गंभीर नहीं

Sun, 30 Jun 2019 01:40 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jun 2019 01:40 AM IST
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जल संरक्षण को लेकर अफसर गंभीर नहीं
जल संरक्षण को लेकर अफसर गंभीर नहीं
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मवाना। सरकार के तमाम प्रयास के बावजूद मवाना तहसील में अधिकतर तालाब सूखे पड़े हैं। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी जल संरक्षण के लिए सफाई कराकर खोदे गए तालाबों को आज भी भरा नहीं जा सका है। यही नहीं एक दिन तालाब की सफाई को लेकर श्रमदान करके प्रशासन ने इतिश्री कर ली। मानसून आने को है और ऐसे में जल संरक्षण कैसे होगा यह सोचने का विषय है।
दस-दस तालाबों का मिला था लक्ष्य
वर्ष 2018 में सरकार ने मानसून के दस्तक देने से पहले सभी ब्लॉकों के दस-दस तालाबों की सफाई कराकर इन्हें पानी से लबालब करने का लक्ष्य दिया था। चिह्नित तालाबों में से कुछ में मनरेगा के तहत सफाई कराई गई। हालांकि यह अभियान चार-पांच दिन चलकर बंद हो गया था। जिस कारण सरकार की जल संरक्षण करने की मंशा वाली योजना धरी रह गई। इन तालाबों पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन साल बीतने के बाद भी इनमें पानी भरा या नहीं, इनका सुधार हुआ या नहीं इसको लेकर अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया।
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तालाब विकास प्राधिकरण का गठन
तालाबों का अस्तित्व बचाने के लिए एंटी भूमाफिया फोर्स के साथ तालाब विकास प्राधिकरण का गठन किया गया था। जहां तालाबों पर कब्जे थे वहां मुक्त कराने के बाद तालाब विकास प्राधिकरण का कार्य उन्हें पानी से भरना था। मवाना तहसील की बात करें तो अधिकतर तालाब सूखे पड़े हैं। तहसील अंर्तगत ब्लॉक, परीक्षितगढ़, ब्लॉक हस्तिनापुर, ब्लॉक माछरा और किठौर क्षेत्र के आबादी में 375 एवं बाहर 268 तालाब आते हैं।
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एक दिन चलाया गया अभियान
मानसून की दस्तक से पहले जल संरक्षण को लेकर सरकार के आदेश के बाद ब्लॉकों में तालाबों की सफाई एवं उनसे कब्जा हटवाने के लिए एक दिन सभी अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ श्रमदान कर तालाबों की सफाई की। इसके बाद कार्य की इतिश्री कर ली। आलम यह है कि मानसून कभी भी आ सकता है और अधिकतर तालाबों की न तो सफाई हुई है और न ही उनसे कब्जे हटवाए जा सके हैं।

जल संरक्षण को लेकर सरकार गंभीर है। लगातार जल स्तर गिरता जा रहा है। इसलिए ग्रामीणों एवं लोगों को जागरूक किया जा रहा है। संबंधित अधिकारियों को तालाबों को कब्जा मुक्त कराने के लिए निर्देश दिए जाएंगे।-अंकुर श्रीवास्तव, एसडीएम मवाना
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