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उद्यमियों को मिला तोहफा, जितना निर्माण उतना शुल्क
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उद्यमियों को मिला तोहफा, जितना निर्माण उतना शुल्क
- मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक के निर्देश पर एमडीए ने नियमों में किया संशोधन
- बदली नीति से उद्यमियों को मिलेगी राहत, बढ़ेगी औद्योगिक विकास की संभावना
मेरठ।
औद्योगिक इकाईयों के निर्माण में मानचित्र स्वीकृति को लेकर विकास शुल्क वसूली की समस्या का शासन स्तर से निदान हो गया है। मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक के साथ हुई बैठक में एमडीए को निर्देश जारी किये गये हैं। इसमें कहा गया है कि एमडीए विकास शुल्क की जो गणना एफएआर के आधार पर कर रहा था, यह व्यवस्था शासनादेश के अनुकूल नहीं है। अब जितना निर्माण होगा, उतने पर ही विकास शुल्क लिया जाएगा। उद्यमियों को नई नीति से बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
लघु उद्योग भारती मेरठ मंडल ने बीते दिनों प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन से कई शिकायतें की थीं। इसमें सबसे बड़ी समस्या एमडीए द्वारा मानचित्र स्वीकृति पर मनमानी विकास शुल्क वसूलना था। एमडीए उद्यमियों से खाली छोड़ी गई जमीन का भी शुल्क ले रहा था। उदाहरण के तौर पर यदि किसी ने इकाई स्थापित करने के लिए छह हजार वर्ग गज जमीन ली है। उसने निर्माण सिर्फ दो हजार वर्ग गज में किया। बाकी जमीन चार दीवारी कराकर मॉल का स्टॉक, लोडिंग और पार्किंग के लिए छोड़ दी है। ऐसे में एमडीए दो हजार वर्ग गज पर शुल्क न लगाकर पूरे छह हजार वर्ग गज पर शुल्क वसूल रहा था। एमडीए की इस मनमानी से उद्यमियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा था। मामले में 6 फरवरी को लखनऊ में हुई बैठक के बाद मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक ने आदेश जारी किए।
नहीं लिया जायेगा इंपैक्ट शुल्क
आदेश में कहा गया है कि यदि किसी औद्योगिक इकाई में गोदाम या स्टोरेज का प्राविधान मूल औद्योगिक क्रिया का अनिवार्य अंग है तो विकास शुल्क की गणना नियमावली के अनुसार होगी। इस पर इंपैक्ट शुल्क नहीं वसूला जायेगा। अब तक एमडीए इंपैक्ट शुल्क वसूल रहा था।
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आदेश दबाए रहा एमडीए
छह फरवरी को हुई इस बैठक के आदेश को एमडीए अब तक दबाए बैठा था। लगातार हो रही शिकायतों और दबाव के बीच एक सप्ताह पूर्व एमडीए उपाध्यक्ष राजेश कुमार पांडे ने यह आदेश जारी किया। इस आदेश में बैठक में तय हुए बिंदुओं को स्पष्ट किया गया है, लेकिन पूर्व में एमडीए द्वारा की जा मनमानी को बचाने का भी प्रयास किया है।
वर्जन.....
औद्योगिक इकाईयों के मानचित्र स्वीकृति में अब निर्मित भाग पर ही शुल्क लगेगा। इससे स्थापित होने वाली नई इकाईयों में उद्यमियों को राहत मिलेगी। यह आदेश मेरठ में औद्योगिक माहौल बनाने में बढ़ावा देगा।
कमल ठाकुर, महासचिव, विश्वकर्मा इंडस्ट्रीयल इस्टेट
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- मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक के निर्देश पर एमडीए ने नियमों में किया संशोधन
- बदली नीति से उद्यमियों को मिलेगी राहत, बढ़ेगी औद्योगिक विकास की संभावना
मेरठ।
औद्योगिक इकाईयों के निर्माण में मानचित्र स्वीकृति को लेकर विकास शुल्क वसूली की समस्या का शासन स्तर से निदान हो गया है। मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक के साथ हुई बैठक में एमडीए को निर्देश जारी किये गये हैं। इसमें कहा गया है कि एमडीए विकास शुल्क की जो गणना एफएआर के आधार पर कर रहा था, यह व्यवस्था शासनादेश के अनुकूल नहीं है। अब जितना निर्माण होगा, उतने पर ही विकास शुल्क लिया जाएगा। उद्यमियों को नई नीति से बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
लघु उद्योग भारती मेरठ मंडल ने बीते दिनों प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन से कई शिकायतें की थीं। इसमें सबसे बड़ी समस्या एमडीए द्वारा मानचित्र स्वीकृति पर मनमानी विकास शुल्क वसूलना था। एमडीए उद्यमियों से खाली छोड़ी गई जमीन का भी शुल्क ले रहा था। उदाहरण के तौर पर यदि किसी ने इकाई स्थापित करने के लिए छह हजार वर्ग गज जमीन ली है। उसने निर्माण सिर्फ दो हजार वर्ग गज में किया। बाकी जमीन चार दीवारी कराकर मॉल का स्टॉक, लोडिंग और पार्किंग के लिए छोड़ दी है। ऐसे में एमडीए दो हजार वर्ग गज पर शुल्क न लगाकर पूरे छह हजार वर्ग गज पर शुल्क वसूल रहा था। एमडीए की इस मनमानी से उद्यमियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा था। मामले में 6 फरवरी को लखनऊ में हुई बैठक के बाद मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक ने आदेश जारी किए।
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नहीं लिया जायेगा इंपैक्ट शुल्क
आदेश में कहा गया है कि यदि किसी औद्योगिक इकाई में गोदाम या स्टोरेज का प्राविधान मूल औद्योगिक क्रिया का अनिवार्य अंग है तो विकास शुल्क की गणना नियमावली के अनुसार होगी। इस पर इंपैक्ट शुल्क नहीं वसूला जायेगा। अब तक एमडीए इंपैक्ट शुल्क वसूल रहा था।
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आदेश दबाए रहा एमडीए
छह फरवरी को हुई इस बैठक के आदेश को एमडीए अब तक दबाए बैठा था। लगातार हो रही शिकायतों और दबाव के बीच एक सप्ताह पूर्व एमडीए उपाध्यक्ष राजेश कुमार पांडे ने यह आदेश जारी किया। इस आदेश में बैठक में तय हुए बिंदुओं को स्पष्ट किया गया है, लेकिन पूर्व में एमडीए द्वारा की जा मनमानी को बचाने का भी प्रयास किया है।
वर्जन.....
औद्योगिक इकाईयों के मानचित्र स्वीकृति में अब निर्मित भाग पर ही शुल्क लगेगा। इससे स्थापित होने वाली नई इकाईयों में उद्यमियों को राहत मिलेगी। यह आदेश मेरठ में औद्योगिक माहौल बनाने में बढ़ावा देगा।
कमल ठाकुर, महासचिव, विश्वकर्मा इंडस्ट्रीयल इस्टेट