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जिला अस्पताल में नीति आयोग की टीम करती रही पड़ताल, मरीज बेहाल
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जिला अस्पताल में नीति आयोग की टीम करती रही पड़ताल, मरीज बेहाल
मेरठ। शासन से आई नीति आयोग की टीम जिला अस्पताल की पड़ताल कर रही थी और इसी दौरान वहां कोई परिवार अपने मरीज को वार्ड में भर्ती करने के लिए भटक रहा था तो कोई मरीज स्ट्रेचर न मिलने केकारण अपने परिवारवालों के हाथों केसहारे वार्ड तक जाने को मजबूर था।
नीति आयोग से डॉ. धीरज मलिक अपनी टीम के साथ मंगलवार को जिला अस्पताल पहुंचे थे। टीम पता करती है कि यहां कितना बजट मिलता है, कितने मरीज आते हैं। सरकार जो सुविधाएं और पैसा देती है, उसका सही इस्तेमाल हो भी रहा है या नहीं। वह ऑडिट भी करते हैं। टीम ने तमाम रजिस्टर मंगाए और पड़ताल की। वह अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे। इसी से अस्पताल का बजट और सुविधाएं तय होंगी, लेकिन पड़ताल के दौरान एक परिवार अपने मरीज को लेकर दो घंटे तक वार्ड में भर्ती करने को लेकर भटकता रहा। यह मरीज थे सरधना के रहने वाले 70 वर्षीय मनव्वर। उनके पैरों में खून रिसने की गंभीर बीमारी है। परिजनों ने बताया कि वह दो घंटे से मरीज को स्ट्रेचर पर लेकर घूम रहे हैं। कभी उन्हें भर्ती करने के लिए किसी वार्ड में भेज दिया जाता है तो कभी किसी वार्ड में। बेड खाली होने के बावजूद उन्हें इधर-उधर दौड़ाया जा रहा है, जबकि वह सरधना में स्वास्थ्य केंद्र से रेफर होकर इधर आए हैं। इसके अलावा कई मरीज ऐसे भी थे, जिन्हें स्ट्रेचर ही नहीं मिला। वह परिजनों के सहारे ही अस्पताल में जैसे-तैसे चलते नजर आए।
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मेरठ। शासन से आई नीति आयोग की टीम जिला अस्पताल की पड़ताल कर रही थी और इसी दौरान वहां कोई परिवार अपने मरीज को वार्ड में भर्ती करने के लिए भटक रहा था तो कोई मरीज स्ट्रेचर न मिलने केकारण अपने परिवारवालों के हाथों केसहारे वार्ड तक जाने को मजबूर था।
नीति आयोग से डॉ. धीरज मलिक अपनी टीम के साथ मंगलवार को जिला अस्पताल पहुंचे थे। टीम पता करती है कि यहां कितना बजट मिलता है, कितने मरीज आते हैं। सरकार जो सुविधाएं और पैसा देती है, उसका सही इस्तेमाल हो भी रहा है या नहीं। वह ऑडिट भी करते हैं। टीम ने तमाम रजिस्टर मंगाए और पड़ताल की। वह अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे। इसी से अस्पताल का बजट और सुविधाएं तय होंगी, लेकिन पड़ताल के दौरान एक परिवार अपने मरीज को लेकर दो घंटे तक वार्ड में भर्ती करने को लेकर भटकता रहा। यह मरीज थे सरधना के रहने वाले 70 वर्षीय मनव्वर। उनके पैरों में खून रिसने की गंभीर बीमारी है। परिजनों ने बताया कि वह दो घंटे से मरीज को स्ट्रेचर पर लेकर घूम रहे हैं। कभी उन्हें भर्ती करने के लिए किसी वार्ड में भेज दिया जाता है तो कभी किसी वार्ड में। बेड खाली होने के बावजूद उन्हें इधर-उधर दौड़ाया जा रहा है, जबकि वह सरधना में स्वास्थ्य केंद्र से रेफर होकर इधर आए हैं। इसके अलावा कई मरीज ऐसे भी थे, जिन्हें स्ट्रेचर ही नहीं मिला। वह परिजनों के सहारे ही अस्पताल में जैसे-तैसे चलते नजर आए।
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