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शहर की बड़ी डेयरियां नगर निगम के रडार पर
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शहर की बड़ी डेयरियां नगर निगम के रडार पर
मेरठ। शहर के आधा दर्जन इलाकों में चल रहीं बड़ी डेयरियां नगर निगम के रडार पर हैं। इनको खाली कराने की योजना बनाई जा रही है। अब तक करीब 600 पशु शहर से बाहर भेजे जा चुके हैं। निगम प्रशासन ने सभी संचालकों को 30 जून से पहले शहर से डेयरी बाहर करने की चेतावनी दी हुई है।
सोमवार को भी ब्रह्मपुरी, पल्लवपुरम आदि इलाकों में संचालित डेयरियों से पशुओं को बाहर भेजे जाने की सूचनाएं मिलीं। निगम प्रशासन के टारगेट पर ब्रह्मपुरी, शास्त्रीनगर, गोलाकुआं, कोतवाली, सूरजकुुंड इलाकों में संचालित डेयरियां हैं। नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान का कहना है कि इनकी रिपोर्ट सफाई इंस्पेक्टरों से ली जा रही है।
दो स्थानों पर कैटल कॉलोनी के लिए बन रही सहमति : डा. वाजपेयी
मेरठ। डेयरियों के लिए शहर से बाहर दो स्थानों पर कैटल कॉलोनी विकसित करने पर सहमति बनती नजर आ रही है। सोमवार को डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने एमडीए वीसी के साथ दो घंटे वार्ता की। बनारस की तर्ज पर कैटल कॉलोनी विकसित करने और उसी रेट पर डेयरी संचालकों को भूमि देने का प्रस्ताव रखा।
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भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी डेयरी कारोबार को जिंदा रखने के लिए प्रशासन से कैटल कॉलोनी विकसित करने की मांग पर अड़े हैं। उन्होंने मामला शासन तक पहुंचा दिया है। उन्होंने एमडीए वीसी राजेश पांडे से 10 पशुओं की डेयरी के लिए 100 वर्ग मी. भूमि का मानक तय करने की बात कही। बनारस प्राधिकरण द्वारा रखे गए भूमि के रेट 4500 वर्ग मीटर भी बताए। कहा कि महानगर के 1052 डेयरी संचालकों ने भूमि के आवेदन किया हुआ है। अलीपुर जिजमाना या किसी दूसरे स्थान पर कैटल कॉलोनी का प्लान तैयार किया जाए। उन्होंने फोन पर एमडीए वीसी और डीएम के बीच बात भी कराई। डॉ. वाजपेयी का कहना है कि उनके प्रस्ताव पर एमडीए वीसी और डीएम ने सहमति जताई है।
पहले कैटल कालोनी बने : हरेंद्र अग्रवाल
पूर्व विधायक हरेंद्र अग्रवाल ने मंडलायुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि डेयरियों को शहर से बाहर करने से पहले कैटल कॉलोनी विकसित की जानी चाहिए। ताकि डेयरी कारोबार प्रभावित न हो और किसी का रोजगार खत्म न हो।
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मेरठ। शहर के आधा दर्जन इलाकों में चल रहीं बड़ी डेयरियां नगर निगम के रडार पर हैं। इनको खाली कराने की योजना बनाई जा रही है। अब तक करीब 600 पशु शहर से बाहर भेजे जा चुके हैं। निगम प्रशासन ने सभी संचालकों को 30 जून से पहले शहर से डेयरी बाहर करने की चेतावनी दी हुई है।
सोमवार को भी ब्रह्मपुरी, पल्लवपुरम आदि इलाकों में संचालित डेयरियों से पशुओं को बाहर भेजे जाने की सूचनाएं मिलीं। निगम प्रशासन के टारगेट पर ब्रह्मपुरी, शास्त्रीनगर, गोलाकुआं, कोतवाली, सूरजकुुंड इलाकों में संचालित डेयरियां हैं। नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान का कहना है कि इनकी रिपोर्ट सफाई इंस्पेक्टरों से ली जा रही है।
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दो स्थानों पर कैटल कॉलोनी के लिए बन रही सहमति : डा. वाजपेयी
मेरठ। डेयरियों के लिए शहर से बाहर दो स्थानों पर कैटल कॉलोनी विकसित करने पर सहमति बनती नजर आ रही है। सोमवार को डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने एमडीए वीसी के साथ दो घंटे वार्ता की। बनारस की तर्ज पर कैटल कॉलोनी विकसित करने और उसी रेट पर डेयरी संचालकों को भूमि देने का प्रस्ताव रखा।
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भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी डेयरी कारोबार को जिंदा रखने के लिए प्रशासन से कैटल कॉलोनी विकसित करने की मांग पर अड़े हैं। उन्होंने मामला शासन तक पहुंचा दिया है। उन्होंने एमडीए वीसी राजेश पांडे से 10 पशुओं की डेयरी के लिए 100 वर्ग मी. भूमि का मानक तय करने की बात कही। बनारस प्राधिकरण द्वारा रखे गए भूमि के रेट 4500 वर्ग मीटर भी बताए। कहा कि महानगर के 1052 डेयरी संचालकों ने भूमि के आवेदन किया हुआ है। अलीपुर जिजमाना या किसी दूसरे स्थान पर कैटल कॉलोनी का प्लान तैयार किया जाए। उन्होंने फोन पर एमडीए वीसी और डीएम के बीच बात भी कराई। डॉ. वाजपेयी का कहना है कि उनके प्रस्ताव पर एमडीए वीसी और डीएम ने सहमति जताई है।
पहले कैटल कालोनी बने : हरेंद्र अग्रवाल
पूर्व विधायक हरेंद्र अग्रवाल ने मंडलायुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि डेयरियों को शहर से बाहर करने से पहले कैटल कॉलोनी विकसित की जानी चाहिए। ताकि डेयरी कारोबार प्रभावित न हो और किसी का रोजगार खत्म न हो।