फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   जागरूकता के अभाव में ठप पड़ी कंगारू मदर केयर यूनिट

जागरूकता के अभाव में ठप पड़ी कंगारू मदर केयर यूनिट

Wed, 12 Jun 2019 02:32 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jun 2019 02:32 AM IST
विज्ञापन
जागरूकता के अभाव में ठप पड़ी कंगारू मदर केयर यूनिट
जागरूकता के अभाव में ठप पड़ी कंगारू मदर केयर यूनिट
विज्ञापन

महीने में एक-दो केस ही आ रहे, जिला अस्पताल में इसी साल जनवरी में खुली थी यूनिट
प्री मैच्योर बेबी के लिए बेहद जरूरी है कंगारू मदर केयर, महिलाओं में जागरूकता का अभाव
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। महिला जिला अस्पताल में इस साल जनवरी माह में शुरू की गई कंगारू मदर केयर यूनिट पूरी तरह से परवान नहीं चढ़ पा रही है। यहां महीने में इक्का-दुक्का केस ही आ रहे हैं। चिकित्सक-स्टाफ इस बाबत महिलाओं को जागरूक नहीं कर रहे हैं, इसी कारण वे इसका लाभ लेने से वंचित हो रही हैं।
दरअसल, कमजोर नवजात तमाम कवायदों के बाद भी मौत के मुहाने तक पहुंच जाते हैं। इन्हें बचाने के लिए यह पहल की गई थी। महिला जिला अस्पताल में हर साल दो हजार से ज्यादा बच्चे जन्म लेते हैं। इनमें से एक हजार से ज्यादा बच्चे ऐसे रहते हैं, जिन्हें कंगारू मदर केयर की जरूरत होती है। पिछले साल 961 बच्चों को महिला जिला अस्पताल की नर्सरी में रखना पड़ा था, जिनमें से अधिकांश को कंगारू केयर की जरूरत पेश आई थी, जिन्हें मेडिकल कालेज रेफर किया गया था। उसमें से अधिकांश मेडिकल कालेज न जाकर निजी अस्पतालों में चले गए थे।
विज्ञापन

महिला जिला अस्पताल में बनी कंगारू मदर केयर यूनिट छह बेड का वार्ड है। साथ ही चार विशेष प्रकार की कुर्सियां लगाई गई हैं, जिन पर बैठकर मां नवजात को अपने दुलार की गर्माहट दे सकती हैं, जिससे वह स्वस्थ रहें। इससे पहले महिला जिला अस्पताल में कंगारू केयर यूनिट नहीं थी। इसके खोलने के लिए लंबे समय से कवायद चली थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे बच्चों को होती है जरूरत
कई नवजात ऐसे होते हैं, जो समय से पहले जन्म लेते हैं। यह नवजात नौ माह के बजाय 7 या 8 माह में पैदा होते हैं। समय से पहले जन्म शिशु के शारीरिक विकास को कम कर देता है। इस कारण नवजात औसत ढाई किलो से कम वजन के जन्म लेते हैं। ऐसे बच्चों में 1.80 किलोग्राम, दो किलोग्राम तक वजन निकल रहा है। इन बच्चों को कंगारू मदर केयर की जरूरत होती है। एक बार में कम से कम एक घंटा और एक दिन में 6 से 8 घंटे माताएं अपने बच्चे को कंगारू थैरेपी दे सकती हैं। कंगारू मदर केयर से मां में दूध बढ़ता है और साथ ही बच्चे में भी सुरक्षात्मक गुणों का विकास होता है।
स्टाफ-चिकित्सकों को दी जाएगी ट्रेनिंग
इस योजना को परवान चढ़ाने के लिए अब चिकित्सकों और स्टाफ को और ट्रेनिंग दी जाएगी। महिलाओं को जागरूक किया जाएगा। बताया जाएगा कि मां और शिशु को इस थैरेपी के समय किस तरह से काम करना है और इसका कितना फायदा मिलता है।

- डॉ. मनीषा, प्रमुख अधीक्षक, महिला जिला अस्पताल
यह है कंगारू मदर केयर
आस्ट्रेलियन जीव कंगारू समय से पहले बच्चे को जन्म देता है। इसके बाद मादा कंगारू प्रीमैच्योर बच्चों को अपनी थैली में साथ रखती है। बच्चों के पूर्ण विकसित होने के बाद ही उन्हें थैली से बाहर निकालती है। कंगारू मदर केयर यूनिट भी इसी थीम पर काम करती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed