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तन, धन, यौवन सब नश्वर
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तन, धन, यौवन सब नश्वर
हस्तिनापुर। प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान में 18 वें दिन बुधवार को शुरूआत मुख्य वेदी में विराजमान त्रयतीर्थंकर शांति, कुन्थु, अरहनाथ भगवान के अभिषेक से हुई। शांतिधारा करने का सौभाग्य सुरेश चंद, प्रमोद कुमार, सुबोध जैन, प्रवेश कुमार, नमन जैन, यश जैन, शौर्य जैन, विनोद जैन को प्राप्त हुआ। शांतिनाथ विधान के मध्य बाल ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस विधान में द्वितीय वलय में चार प्रकार की आराधना व बारह भावनाओं का चिंतन किया गया है। बिना आराधना के भावना में विशुद्धि नहीं आ सकती है। इसलिए दर्शन, ज्ञान, चारित्र, तप ये चार आराधना अनित्य आदि बारह भावनाओं की वृद्धि में सहायक है। हे जीव! अनित्य पर तूने राग किया है अनित्य ही रहेगा, नित्य हो नहीं सकता है। क्षण भंगुर द्रव्य से राग किया है। जल के बुलबुले के समान इस तन पर राग किया है। यह जलकर राख हो जाएगा। तन-धन, यौवन तो इन्द्र धनुष के समान नश्वर हैं। ऐसे अनित्य भाव का चिंतन करते हुए ऐसी अविनाशी पद को प्राप्त कर आत्म कल्याण करें। इस अनुष्ठान को पं. आशीष जैन शास्त्री ने मांगलिक क्रियाएं संपन्न कर्राइं। कार्यक्रम में सहयोग क्षेत्र के महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष सुनील जैन, उपाध्यक्ष अजीत प्रसाद, सतेन्द्र जैन, राजेन्द्र जैन मवाना, राजीव जैन, जितेन्द्र कुमार, अनिल जैन , विजय कुमार, महाप्रबंधक मुकेश जैन, उपप्रबंधक अशोक कुमार, उमेश जैन, अतुल जैन, मणिचंद जैन, कमल जैन, नवनीत जैन आदि का सहयोग रहा है।
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हस्तिनापुर। प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान में 18 वें दिन बुधवार को शुरूआत मुख्य वेदी में विराजमान त्रयतीर्थंकर शांति, कुन्थु, अरहनाथ भगवान के अभिषेक से हुई। शांतिधारा करने का सौभाग्य सुरेश चंद, प्रमोद कुमार, सुबोध जैन, प्रवेश कुमार, नमन जैन, यश जैन, शौर्य जैन, विनोद जैन को प्राप्त हुआ। शांतिनाथ विधान के मध्य बाल ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस विधान में द्वितीय वलय में चार प्रकार की आराधना व बारह भावनाओं का चिंतन किया गया है। बिना आराधना के भावना में विशुद्धि नहीं आ सकती है। इसलिए दर्शन, ज्ञान, चारित्र, तप ये चार आराधना अनित्य आदि बारह भावनाओं की वृद्धि में सहायक है। हे जीव! अनित्य पर तूने राग किया है अनित्य ही रहेगा, नित्य हो नहीं सकता है। क्षण भंगुर द्रव्य से राग किया है। जल के बुलबुले के समान इस तन पर राग किया है। यह जलकर राख हो जाएगा। तन-धन, यौवन तो इन्द्र धनुष के समान नश्वर हैं। ऐसे अनित्य भाव का चिंतन करते हुए ऐसी अविनाशी पद को प्राप्त कर आत्म कल्याण करें। इस अनुष्ठान को पं. आशीष जैन शास्त्री ने मांगलिक क्रियाएं संपन्न कर्राइं। कार्यक्रम में सहयोग क्षेत्र के महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष सुनील जैन, उपाध्यक्ष अजीत प्रसाद, सतेन्द्र जैन, राजेन्द्र जैन मवाना, राजीव जैन, जितेन्द्र कुमार, अनिल जैन , विजय कुमार, महाप्रबंधक मुकेश जैन, उपप्रबंधक अशोक कुमार, उमेश जैन, अतुल जैन, मणिचंद जैन, कमल जैन, नवनीत जैन आदि का सहयोग रहा है।