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जिलाधिकारी ने मांगी तहसील और नगर निगम से रिपोर्ट
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डीएम ने नगर निगम और तहसील से मांगी रिपोर्ट
मेरठ। नगर निगम द्वारा 50 साल पूर्व सरकारी जमीन और उसके बीच सड़क पट्टी पर बना दी गई दुकानों के मामले में डीएम ने रिपोर्ट तलब की है। अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद डीएम ने मामले में नगर निगम और तहसील से अपनी अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
भगत सिंह मार्केट में सड़क के बीचों बीच बाजार बना दिया गया था, जबकि यह जमीन नजूल की है। इसके बीच में सड़क पट्टी थी, जो राजस्व अभिलेखों में आज भी दर्ज है। इन दुकानों के बनने के बाद भगत सिंह मार्केट का रास्ता दो भागों में विभाजित होकर तंग हो गया है। इसकी वजह से मार्केट के भीतर और हापुड़ अड्डा चौराहे पर भी जाम लगा रहता है।
निगम की लापरवाही से फंसे कई पेंच
नगर निगम ने नजूल की जमीन पर दुकानों का निर्माण करा दिया, लेकिन राजस्व अभिलेखों में जमीन का दाखिल खारिज नहीं कराया। साथ ही सड़क पर दुकान निर्माण नहीं किया जा सकता, लेकिन निगम ने यह भी कर दिया। एक तरफ सड़क पर निर्माण अवैध और दूसरी तरफ संपत्ति का दाखिल खारिज भी है। इसके बावजूद नगर निगम मालिकाना हक जताते हुए किराया वसूल रहा है।
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अफसरों से जवाब तलब
अमर उजाला ने यह मामला सोमवार के मायसिटी में प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिस पर जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने नगर निगम और तहसील से इस प्रकरण में रिपोर्ट मांगी है।
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मेरठ। नगर निगम द्वारा 50 साल पूर्व सरकारी जमीन और उसके बीच सड़क पट्टी पर बना दी गई दुकानों के मामले में डीएम ने रिपोर्ट तलब की है। अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद डीएम ने मामले में नगर निगम और तहसील से अपनी अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
भगत सिंह मार्केट में सड़क के बीचों बीच बाजार बना दिया गया था, जबकि यह जमीन नजूल की है। इसके बीच में सड़क पट्टी थी, जो राजस्व अभिलेखों में आज भी दर्ज है। इन दुकानों के बनने के बाद भगत सिंह मार्केट का रास्ता दो भागों में विभाजित होकर तंग हो गया है। इसकी वजह से मार्केट के भीतर और हापुड़ अड्डा चौराहे पर भी जाम लगा रहता है।
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निगम की लापरवाही से फंसे कई पेंच
नगर निगम ने नजूल की जमीन पर दुकानों का निर्माण करा दिया, लेकिन राजस्व अभिलेखों में जमीन का दाखिल खारिज नहीं कराया। साथ ही सड़क पर दुकान निर्माण नहीं किया जा सकता, लेकिन निगम ने यह भी कर दिया। एक तरफ सड़क पर निर्माण अवैध और दूसरी तरफ संपत्ति का दाखिल खारिज भी है। इसके बावजूद नगर निगम मालिकाना हक जताते हुए किराया वसूल रहा है।
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अफसरों से जवाब तलब
अमर उजाला ने यह मामला सोमवार के मायसिटी में प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिस पर जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने नगर निगम और तहसील से इस प्रकरण में रिपोर्ट मांगी है।