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कैँट विधानसभा ने बचाया, बाकी ने डुबाया
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जीत मिली पर खुली कलह की पोल
मेरठ। लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो भाजपा संगठन वोट बैंक को कैश नहीं कर पाया। इसके अलावा भाजपा के अंदरूनी झगड़े ने भी कहीं न कहीं झटका दिया। सिर्फ कैंट विधानसभा ही ऐसी रही, जो भाजपा की न केवल इज्जत बचाने में कामयाब रही, बल्कि जीत के द्वार पर भी पहुंचा दिया।
पिछले लोकसभा चुनाव में कुल 1761618 मतदाता थे, जिनमें से 1108171 वोट डाले गए थे। इस बार लोकसभा चुनाव में 18.88 लाख वोट थे, जिनमें 12,12,076 ने मतदान किया था। ऐसे में दोनों चुनाव के मतदान के रुझान पर अगर गौर करें तो भाजपा संगठन मतदान के दिन कहीं न कहीं पूरी तरह फेल नजर आया। अहम बात ये रही कि भाजपा को सबसे बड़ा झटका शहर विधानसभा में लगा, जहां पर पिछले चुनाव की तुलना में गठबंधन प्रत्याशी ने अच्छी बढ़त बनाई। आमने सामने की भिड़ंत में तय था कि मुकाबला करीबी होगा, लेकिन इतना करीबी होगा यह किसी ने नहीं सोचा था। वर्चस्व की लड़ाई में मुस्लिमों के वोट बंटने की उम्मीद संजोए भाजपाइयाें का सपना टूट गया और मुस्लिम मतों का पूरी तरह एकतरफा ध्रुवीकरण रहा। इसके साथ ही अनुसूचित जाति के मतदाताओं ने भी बसपा प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट होकर वोट डाले। लेकिन भाजपा अपने वोटरों को घर से निकालने में ही कामयाब नहीं हो सकी। यदि भाजपा के पक्ष में कैंट विधानसभा में थोड़ा भी मतदान और कम हो जाता तो भाजपा को अपनी इज्जत बचानी भारी पड़ जाती। क्योंकि शहर विधानसभा के भाजपा बहुल गढ़ ब्रह्मपुरी जैसे मोहल्लों में भी बसपा के पक्ष में मतदान हुआ। मतगणना के दौरान आए इन तथ्यों से स्पष्ट हो गया कि भाजपा संगठन चुनाव में पूरी तरह फेल नजर आया। यदि भाजपा को यह जीत मिली तो सिर्फ मोदी फैक्टर के कारण ही हासिल हुई।
2019 में मिले विधानसभावार मत
विधानसभा भाजपा बसपा
किठौर 109222 131039
कैंट 168074 65322
शहर 79241 109637
दक्षिण 122496 152209
हापुड़ 103419 119839
2014 में मिले विधानसभावार मत
विधानसभा भाजपा बसपा व सपा के वोट का जोड़
किठौर 94893 120507
कैंट 153448 59892
शहर 81690 98237
दक्षिण 107901 132580
हापुड़ 93966 100602
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मेरठ। लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो भाजपा संगठन वोट बैंक को कैश नहीं कर पाया। इसके अलावा भाजपा के अंदरूनी झगड़े ने भी कहीं न कहीं झटका दिया। सिर्फ कैंट विधानसभा ही ऐसी रही, जो भाजपा की न केवल इज्जत बचाने में कामयाब रही, बल्कि जीत के द्वार पर भी पहुंचा दिया।
पिछले लोकसभा चुनाव में कुल 1761618 मतदाता थे, जिनमें से 1108171 वोट डाले गए थे। इस बार लोकसभा चुनाव में 18.88 लाख वोट थे, जिनमें 12,12,076 ने मतदान किया था। ऐसे में दोनों चुनाव के मतदान के रुझान पर अगर गौर करें तो भाजपा संगठन मतदान के दिन कहीं न कहीं पूरी तरह फेल नजर आया। अहम बात ये रही कि भाजपा को सबसे बड़ा झटका शहर विधानसभा में लगा, जहां पर पिछले चुनाव की तुलना में गठबंधन प्रत्याशी ने अच्छी बढ़त बनाई। आमने सामने की भिड़ंत में तय था कि मुकाबला करीबी होगा, लेकिन इतना करीबी होगा यह किसी ने नहीं सोचा था। वर्चस्व की लड़ाई में मुस्लिमों के वोट बंटने की उम्मीद संजोए भाजपाइयाें का सपना टूट गया और मुस्लिम मतों का पूरी तरह एकतरफा ध्रुवीकरण रहा। इसके साथ ही अनुसूचित जाति के मतदाताओं ने भी बसपा प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट होकर वोट डाले। लेकिन भाजपा अपने वोटरों को घर से निकालने में ही कामयाब नहीं हो सकी। यदि भाजपा के पक्ष में कैंट विधानसभा में थोड़ा भी मतदान और कम हो जाता तो भाजपा को अपनी इज्जत बचानी भारी पड़ जाती। क्योंकि शहर विधानसभा के भाजपा बहुल गढ़ ब्रह्मपुरी जैसे मोहल्लों में भी बसपा के पक्ष में मतदान हुआ। मतगणना के दौरान आए इन तथ्यों से स्पष्ट हो गया कि भाजपा संगठन चुनाव में पूरी तरह फेल नजर आया। यदि भाजपा को यह जीत मिली तो सिर्फ मोदी फैक्टर के कारण ही हासिल हुई।
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2019 में मिले विधानसभावार मत
विधानसभा भाजपा बसपा
किठौर 109222 131039
कैंट 168074 65322
शहर 79241 109637
दक्षिण 122496 152209
हापुड़ 103419 119839
2014 में मिले विधानसभावार मत
विधानसभा भाजपा बसपा व सपा के वोट का जोड़
किठौर 94893 120507
कैंट 153448 59892
शहर 81690 98237
दक्षिण 107901 132580
हापुड़ 93966 100602