स्वास्थ्य उप केंद्र की सुध लेने वाला कोई नहीं।

Meerut Bureauमेरठ ब्यूरो Updated Sun, 25 Nov 2018 01:39 AM IST
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नैडू के उपस्वास्थ्य केंद्र से ग्रामीणों को नहीं मिल रहा इलाज
फलावदा। गांव नैडू में एक दशक पहले निर्माण हुए स्वास्थ्य उप केंद्र कि सुध लेने वाला कोई नहीं है। उप केंद्र पर ताला लटका होने की वजह से ग्रामीण दवा लेने से महरूम है। उप केंद्र पर डॉक्टर नहीं होने तथा दवा नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
गांव नैडू में लाखों रुपये खर्च कर करीब एक दशक पूर्व उपस्वास्थ्य केंद्र का निर्माण हुआ था। सरकार के प्रयासों के बावजूद उपकेंद्र की सुध लेने वाला कोई नहीं है। गांव नेडू निवासी जगपाल, बृजपाल, दल सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि गांव में उपकेंद्र का निर्माण करीब एक दशक पूर्व हुआ था। निर्माण के बाद से लेकर आज तक उप केंद्र में ताला पड़ा हुआ है। गांव में बने उपकेंद्र में कोई डॉक्टर नहीं आता है। उपकेंद्र पर ताला लगा होने के कारण दवा लेने के लिए दो किमी. दूर फलावदा कस्बे में प्राइवेट चिकित्सक के यहां जाना पड़ता है। दवा लेने जाने में महिलाओं को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि उपकेंद्र में डॉक्टर व दवाई उपलब्ध हो जाए तो बीमारी से पीड़ित लोगों को प्राइवेट चिकित्सक का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। उधर उप केंद्र पर ताला लगा होने के कारण लोगों ने उप केंद्र के पास उपले तथा कुड़ी आदि डालकर अतिक्रमण कर लिया है। ग्रामीणों का यह भी कहना है उप केंद्र पर डॉक्टरों की नियुक्ति तो है, लेकिन सिर्फ कागजों में ही हाजिरी लग रही है। उपकेंद्र को उन्होंने कभी खुला तथा डॉक्टरों को यहां बैठते नहीं देखा। ग्रामीणों मे उप केंद्र पर दवा नहीं मिलने से रोष व्याप्त है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. अनिल कुमार का कहना है कि जिस चिकित्सक की वहां तैनाती है। वह वर्तमान में अवकाश पर चल रहे हैं। अवकाश समाप्त होते ही वे केंद्र पर पहुंचकर वहां डाले गए उपले आदि को हटवाकर रोगियों की जांच आदि करेंगे। - डॉ. अनिल कुमार, सीएचसी प्रभारी मवाना

उप स्वास्थ्य केंद्र चालू नहीं होने से परेशानी
गांव में उपस्वास्थ्य केंद्र है। उसके बाद ग्रामीण उसका उपयोग नहीं कर पा रही है। गांव में उपस्वास्थ्य केंद्र चालू होगा तो थोड़ी परेशानी कम होगी। लोग उसका उपयोग भी करेंगे और उन्हें गांव से बाहर इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा। - बबलू

महंगी खरीदनी पड़ती है दवा
गांव में उपस्वास्थ्य केंद्र होते हुए भी उन्हें छोटी से छोटी बीमारी के लिए भी गांव से बाहर जाना पड़ता है। उनका कहना है कि बाहर स्टोर से महंगी दवा भी खरीदनी पड़ती है जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।- सुरेशपाल

महिलाओं को होती है ज्यादा परेशानी
गांव निवासी अन्नू प्रधान ने बताया कि अस्पताल चालू नहीं होने के कारण महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है। गांव में उपस्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरी की तैनाती हो जाए तो लोगों को सुविधा मिलेगी।- अन्नू प्रधान
नहीं मिल रहा लाभ
उपस्वास्थ्य केंद्र का ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। उपस्वास्थ्य केंद्र के चालू नहीं होने से ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उपस्वास्थ्य केंद्र चालू होता तो दवाई भी नि:शुल्क मिलती।- गौरव

मात्र रजिस्टर में ही नियुक्ति
अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति मात्र रजिस्टरों में हैं। अस्पताल बनाने में लाखों रुपये खर्च हुआ है। इतना पैसा खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। दवा खरीदने के लिए लोगों के पास पैसे नहीं हैं। प्राइवेट चिकित्सक से दवा लानी पड़ती है।- ब्रजपाल

जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं
गांव निवासी रोहित कुमार का कहना है कि सरकार से मिलने वाले धन का नीचे वाले लोग बंदरबांट कर रहे हैं। जनता की सुध लेने वाला कोई अधिकारी नहीं है और ना ही उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान दिया जा रहा है।
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