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मेघनाथ-कुंभकरण के मारे जाने के साथ लंका नगरी में छाई शोक की लहर

Thu, 18 Oct 2018 02:32 AM IST
Updated Thu, 18 Oct 2018 02:32 AM IST
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मेघनाथ-कुंभकरण के मारे जाने के साथ लंका नगरी में छाई शोक की लहर
श्री रामामंडल कमेटी द्वारा आयोजित श्रीराम चरित्र उत्सव प्रदर्शन में कलाकारों ने किया मंचन
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अमर उजाला ब्यूरो
सरधना। नगर में श्री रामा मंडल कमेटी द्वारा आयोजित श्रीराम चरित्र उत्सव प्रदर्शन में कलाकारों ने बुधवार को सुंदर ढंग से श्री रामलीला का मंचन किया। लक्ष्मण के मूर्छा से उठने के पश्चात भगवान श्री रामचंद्र की सेना में खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं, लंका में लक्ष्मण के मूर्छा से उठ जाने की सूचना फैलते ही मेघनाद अपने पिता रावण से फिर से युद्ध में जाने के लिए कहता है। वह कहता है कि इस बार उसके बाणों से लक्ष्मण बच नहीं पायेगा। मेघनाद, श्रीराम सेना पर विजय प्राप्त करने के लिए शत्रु नाशक यज्ञ करते हैं। लक्ष्मण यज्ञ पूर्ण होने से पहले ही मेघनाद को युद्ध के लिए ललकारते हैं। युद्ध में मेघनाद मारा जाता है। लक्ष्मण जी उसके अंगों को रावण के महलों में फेंक देते हैं और शीश रामा दल में ले आते हैं। मेघनाद की पत्नी सुलोचना अपने पति की मृत्यु से दुखी होकर सती होना चाहती हैं। शीश रामा दल में होने के कारण सुलोचना श्रीराम जी के पास जाकर अपने पति के शीश को वापस मांगती है। इसके पश्चात शीश लेकर सती हो जाती है। उधर, रावण अपने भाई कुंभकरण को युद्ध में भेजता है। इस पर कुंभकरण रामा दल में दहशत फैला देता है। कुंभकरण भी भगवान श्री रामंचद्र जी के हाथों मारा जाता है। इस मौके पर तेजस्वी, भगवान मित्तल, मदनलाल बंसल, मूलचंद सैनी, वीरेंद्र सैनी, सचिन खटीक, राहुल, आशीष, सुमित, शरद त्यागी, कर्णपाल कश्यप, विनोद जैन, संजीव पंवार, प्रदीप बुद्धिराजा, ऋषभ जैन, संजीव, उर्वशी खटीक आदि मौजूद रहे। उधर, दूसरी तरफ कुलंजन में चल रही श्रीरामलीला मंचन में बुधवार को श्रीरामलीला में अंगद रावण संवाद, लक्ष्मण मूर्छा, मेघनाद वध का प्रसंग दिखाया गया। रामलीला का मंचन सेवा मंडल के कलाकारों द्वारा किया जा रहा है। इस मौके पर ग्राम प्रधान सुभाष चौहान, राजपाल चौहान, चतर सैन, राजेंद्र प्रधान, प्रद्युमन प्रजापति, दीपक मित्तल, अशोक सैनी, ओमकार सैनी, अनुज, रविकांत प्रजापति, बिट्टू सैनी आदि उपस्थित रहे।

बाली वध, सीता खोज, लंका दहन आदि का मंचन
मुंडाली/माछरा। मुंडाली में रामलीला के मंच पर कलाकारों द्वारा बाली वध, सीता खोज, लंका दहन आदि का मंचन किया गया। वहीं, माछरा में अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति आदि का मंचन किया गया।
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मुंडाली के रामलीला में कलाकारों द्वारा बाली वध के मंचन के दौरान सुग्रीव की हनुमान जी राम से मित्रता कराते हैं। इसी दौरान सुग्रीव राम से अपनी पत्नी को छीनने को कहते हैं और बाली के वध की बात कहते हैं। श्रीराम के कहने पर बाली एवं सुग्रीव में भयंकर युद्ध होता है। जिसमें श्रीराम के बाण से बाली घायल हो जाता है। श्रीराम के दिव्य स्वरूप को प्राप्त करके मृत्यु को प्राप्त होता है। आगे सीता की खोज में श्रीराम-लक्ष्मण के साथ सभी समुद्र किनारे पहुंचते हैं। वहां पर जटायु के भाई से सीता के लंका में होने का समाचार प्राप्त होता है। जिस पर हनुमान समुद्र लांघकर लंका पहुंचते हैं और वहां पर सीता जी से मिलते हैं। वहां पर रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध कर देते हैं तो मेघनाद हनुमान को अपनी शक्ति में बांधकर रावण सभा में ले आता है। वहां पर रावण उनकी पूंछ में आग लगाने का आदेश देता है। जिस पर हनुमान जी लंका में आग देते हैं। यहां राजकुमार तोमर, रोबिन तोमर, घमंडी तोमर, योगेश तोमर, सुशील शर्मा, गुड्डू गुप्ता, कुलदीप तोमर, लोकेश तोमर, रामअवतार तोमर, सुंदर तोमर, शेखर तोमर, रवींद्र तोमर, राजकुमार मित्री, मुकेश तोमर, रामचरण आदि रहे।
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वहीं, आदर्श रामलीला माछरा में रावण की सभा में अंगद पहुंचता है। रावण बाली का पुत्र जानकर अंगद को अपनी ओर करने का प्रयास करता है पंरतु अंगद रावण को समझाते हुए कहता है कि रावण मैं उसी बाली का पुत्र हूं जिसने तुझे युद्ध में हराया था। अंगद सीता माता को वापस करने की सलाह देता है परंतु रावण यह सुनकर क्रोधित हो जाता है। अंगद को पकड़ने का आदेश देता है तो अंगद कहता है कि तुम्हारी सभा का कोई भी सदस्य मेरा पैर हिला दे तो बात रही। कोई भी उसका पैर नहीं हिला पाता है। तभी रावण आगे बढ़ता है तो अंगद ने पैर उठा लिया और उसे श्रीराम की शरण मे जाने को कहता है। आगे मेघनाद और लक्ष्मण में भयंकर युद्ध होता है। जिसमें मेघनाद अपनी अमोघ शक्ति का प्रयोग कर लक्ष्मण को मूर्छित कर देता है। इस दौरान दिनेश त्यागी, सुभाष चंद, विनोद उपाध्याय, अजय त्यागी, जोशील, लोमश त्यागी, प्रधान राकेश त्यागी, शिवराज प्रधान, दीपक प्रधान, अशोक कुमार, विधिचंद, कल्लू सैनी, भूपेंद्र आदि का सहयोग रहा।
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