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धान की फसल में पता लपेट कीट व झुलसा का प्रकोप
Updated Thu, 30 Aug 2018 03:20 AM IST
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धान की फसल में ब्लाइट कीट का प्रकोप
बहसूमा। धान की फसल में इस समय पुसा 1509 में शीथ ब्लाइट बीमारी व पुसा बासमती वन में झुलसा का प्रकोप बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है। खादर क्षेत्र की धान की फसल में कीट भंयकर रूप धारण कर रहा है। क्षेत्र में कृषि विज्ञान होते हुए किसानों को समय पर फसलों में लगने वाले कीट व बीमारियों को जानकारी नहीं मिलना भी किसानों के लिए बड़ी समस्या बनकर उभर रही है।
गत गन्ना पेराई सत्र में गन्ने की हुई दुर्गति को ध्यान में रखते हुए रामराज खादर क्षेत्र के किसानों ने गन्ने का क्षेत्रफल घटाकर धान की ओर रूख किया था। किसान जगतार सिंह, रोहित, सतपाल सिंह ने बताया कि हस्तिनापुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों को फसलों में लगने वाले रोग व कीट के बारे में जानकारी नहीं दी जाती है।
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कृषि विशेषज्ञ मुकेश सिंह का कहना है कि इस समय रामराज खादर क्षेत्र में धान की प्रजाति पूसा 1509 में ब्लाइट बीमारी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इसकी पहचान के लिए धान की फसल में तने पर चिट्टीदार धब्बे पड़ जाते हैं। यह बीमारी इतनी तेजी से बढ़ती है कि एक सप्ताह में धान की फसल को बर्बाद कर देती है। किसान को धान की फसल पर लगातार निगरानी करनी पड़ती है। इसके बचाव के लिए हैक्जाकोना जोल 300 एमएल या वैलिडामाईसिन की 300 एमएल दवाई का 300 लीटर पानी में ही प्रति एकड मिलाकर छिड़काव कर सकते है।
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धान की दूसरी प्रजाति पूसा बासमती वन में बैक्टीरिया ब्लाइट (बीएलबी) में झुलसा का प्रकोप हो जाता है। यह बीमारी यूरिया के अधिक प्रयोग करने से पनप रही है। इसकी पहचान के लिए पत्तियां गोल बंडल के रूप में बन जाती है। यह बहुत तेजी से पत्तियों को सुखा देता है। इसको देखने पर पीले रंग की हल्के से दाने दिखाई देते हैं। इस बीमारी से बचने के लिए सबसे पहले खेत का पानी सुखा दें तथा कॉपर आक्सीक्लोराइड की 400 ग्राम मात्रा को स्टूपटो साईकलीन की 18 ग्राम मात्रा के साथ 200 लीटर पानी को प्रति एकड़ प्रयोग करने की सलाह दी है।