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राष्ट्रीय लोक अदालत में 23319 मुकदमे निपटे
Updated Sun, 15 Jul 2018 02:28 AM IST
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मेरठ। दीवानी न्यायालय परिसर, मुंसिफ मवाना और सरधना में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 23319 मुकदमों का निस्तारण करते हुए करीब पांच करोड़ रुपये पीड़ित पक्षों को दिलवाए गए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव न्यायिक अधिकारी चंद्रमोहन श्रीवास्तव और नोडल अधिकारी रत्नेशमणि त्रिपाठी ने बताया कि जिला जज आलोक सक्सेना द्वारा मोटर दुर्घटना के 18 मुकदमे निपटाते हुए करीब 1.74 करोड़ रुपये और अन्य न्यायिक अधिकारियों ने मोटर दुर्घटना के 49 मुकदमे निपटाते हुए करीब 3.10 करोड़ रुपये पीड़ितों को दिलवाए। जिला जज ने इनके अलावा सिविल प्रकृति के साथ, फौजदारी प्रकृति के दो व अन्य प्रकृति के तीन वाद निस्तारित किए।
परिवार न्यायाधीश अब्दुल शाहिद द्वारा 44 वैवाहिक वादों का निस्तारण करते हुए तीन पक्षकारों को साथ-साथ रहने हेतु भेजा गया। अतिरिक्त परिवार न्यायाधीश ने 12 मुकदमों का निस्तारण किया। सचिव ने बताया कि 146 व्यावहारिक वाद, 2949 फौजदारी शमनीय वाद, 138 एनआई एक्ट के 7 वाद, 1111 राजस्व वाद, बैंकों द्वारा 116 वाद प्री-लिटिगेशन स्तर पर, श्रम न्यायालय द्वारा 16 वाद, अन्य प्रकृति के 18737 वाद प्री-लिटिगेशन स्तर पर विभिन अदालतों द्वारा निस्तारित किए गए।
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बैंकों की लगी विशेष प्री-लिटिगेशन अदालतें
सरकार द्वारा लोन माफ करने के बाद तमाम बैंकों ने प्री-लिटिगेशन स्तर पर अदालतों को आयोजन कराकर समझौते किए। जिनमें मुख्य रूप से पीएनबी ने 12 मुकदमों में 10.50 लाख रुपये, सिंडिकेट बैंक ने 20 मुकदमों में 35.45 लाख रुपये का निस्तारण किया। यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक, एसबीआई, यूको बैंक, एचडीएफसी बैंक ने भी कुल 116 वाद निस्तारण कर 12.15 लाख रुपये समझौते के रूप में वसूले।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव न्यायिक अधिकारी चंद्रमोहन श्रीवास्तव और नोडल अधिकारी रत्नेशमणि त्रिपाठी ने बताया कि जिला जज आलोक सक्सेना द्वारा मोटर दुर्घटना के 18 मुकदमे निपटाते हुए करीब 1.74 करोड़ रुपये और अन्य न्यायिक अधिकारियों ने मोटर दुर्घटना के 49 मुकदमे निपटाते हुए करीब 3.10 करोड़ रुपये पीड़ितों को दिलवाए। जिला जज ने इनके अलावा सिविल प्रकृति के साथ, फौजदारी प्रकृति के दो व अन्य प्रकृति के तीन वाद निस्तारित किए।
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परिवार न्यायाधीश अब्दुल शाहिद द्वारा 44 वैवाहिक वादों का निस्तारण करते हुए तीन पक्षकारों को साथ-साथ रहने हेतु भेजा गया। अतिरिक्त परिवार न्यायाधीश ने 12 मुकदमों का निस्तारण किया। सचिव ने बताया कि 146 व्यावहारिक वाद, 2949 फौजदारी शमनीय वाद, 138 एनआई एक्ट के 7 वाद, 1111 राजस्व वाद, बैंकों द्वारा 116 वाद प्री-लिटिगेशन स्तर पर, श्रम न्यायालय द्वारा 16 वाद, अन्य प्रकृति के 18737 वाद प्री-लिटिगेशन स्तर पर विभिन अदालतों द्वारा निस्तारित किए गए।
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बैंकों की लगी विशेष प्री-लिटिगेशन अदालतें
सरकार द्वारा लोन माफ करने के बाद तमाम बैंकों ने प्री-लिटिगेशन स्तर पर अदालतों को आयोजन कराकर समझौते किए। जिनमें मुख्य रूप से पीएनबी ने 12 मुकदमों में 10.50 लाख रुपये, सिंडिकेट बैंक ने 20 मुकदमों में 35.45 लाख रुपये का निस्तारण किया। यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक, एसबीआई, यूको बैंक, एचडीएफसी बैंक ने भी कुल 116 वाद निस्तारण कर 12.15 लाख रुपये समझौते के रूप में वसूले।