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सीएमओ कार्यालय में हुए गड़बड़झाले होंगे उजागर, गिरेगी गाज

Tue, 29 May 2018 02:32 AM IST
Updated Tue, 29 May 2018 02:32 AM IST
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सीएमओ कार्यालय में हुए गड़बड़झाले होंगे उजागर, गिरेगी गाज

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मेरठ। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में वर्ष 2014-15 और वर्ष 2015-16 में शासन से आए बजट के इस्तेमाल में गड़बड़झाले हुए हैं, जिनकी जांच शुरू हो गई है। लखनऊ से सोमवार को परिवार कल्याण विभाग के डायरेक्टर डॉ. बद्री विशाल सीएमओ कार्यालय पहुंचे और पुराने प्रपत्र मंगाकर उनकी जांच की।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि इस मामले में तीन पूर्व सीएमओ और दो एडिशनल सीएमओ जांच के घेरे में हैं। इस संबंध में शासन से शिकायत की गई थी कि वर्ष 2014-15 और साल 2015-16 में शासन से जो बजट मेरठ में सीएमओ कार्यालय को दिया गया था, उस बजट के जरिए जो सामान, उपकरण, दवाइयां आदि खरीदी जानी थीं, उनमें अनियमितताएं बरती गई हैं। आरोप लगे थे कि एक बार चुनाव आचार संहिता लागू थी और बिना अनुमति लिए ही सीएमओ कार्यालय में लाखों का सामान और दवाइयां खरीद ली गई थीं। इसके अलावा एक बार सामान खरीदा ही नहीं गया और खरीद दिखा दी गई थी। महिलाओं के प्रसव के दौरान गोजथान (एक तरह की पट्टी) खरीद को लेकर भी गड़बड़झाले के आरोप लगे थे। दरअसल, गोजथान के लिए सीएचसी-पीएचसी प्रभारी से डिमांड ही नहीं ली गई थी।
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दवा और उपकरण आदि की खरीद पर तो ऑडिट टीम ने भी आपत्ति जताई थी। इन्हीं सब मामलों की जांच की जा रही है। जांच करने आए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के डायरेक्टर डॉ. बद्री विशाल का कहना है कि जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि अनियमितताएं किस तरह की गई। ांच पूरी होने तक इस पर ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है। वहीं, सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि यह मामले उनके कार्यकाल से पुराने हैं। उन्हें इस संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं है। इतना पता है कि जांच चल रही है। गौरतलब है कि पिछले कई सालों तक मेरठ का स्वास्थ्य विभाग गड़बड़झालों के कारण सुर्खियों में रहा है। एक बार तो स्वास्थ्य विभाग में कई पदों पर भर्ती होनी थी, जिसमें गड़बड़ सामने आने पर उसे कैंसल कर दी गई थी।
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दिनभर मची रही खलबली
सीएमओ कार्यालय में जांच को लेकर दिनभर खलबली मची रही। अधिकारी और अन्य स्टाफ डॉ. बद्री विशाल को कभी रजिस्टर लाकर दिखा रहे थे तो कभी उनका मिलान करा रहे थे। डॉ. बद्री विशाल सीएमओ कार्यालय में बैठकर प्रपत्रों की जांच कर रहे थे।
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