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गन्ने व आलू के बाद इस बार फूलो की खेती ने भी किसानो को रुलाया
Updated Sun, 06 May 2018 10:24 PM IST
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दौराला। वेस्ट यूपी को मुख्यत: गन्ना बेल्ट के रूप में जाना जाता है, लेकिन समय से भुगतान नहीं होने के कारण कई सीजन में गन्ना और आलू की बुरी हालत है। इस कारण धीरे-धीरे क्षेत्र के बहुत से किसानों का इन फसलों से मोह भंग होता जा रहा है। उन्होंने फूलों की खेती की ओर रुख किया है। इस बार फूलों की बंपर पैदावार से गेंदे की फसल ने भी उत्पादकों को रुला दिया है। जिस कारण किसान फूलों को कूड़े के ढेर पर फेंकने को मजबूर हैं।
लावड़ क्षेत्र को फूलों की मंडी के रूप में कई राज्यों में जाना जाता है। इस बार उचित दाम नहीं मिलने के कारण किसान अपनी मेहनत से उगाई फूलों की फसल को कूडे़ के ढेर पर फेंकने को मजबूर हो गया है। लावड़ और आसपास के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर फूलों की खेती की जाती है। सीजन के समय में लावड़ मंडी से प्रतिदिन लगभग चार-पांच गाड़ी दूसरे राज्यों के लिए जाती हैं। लावड़ से फूल हरियाणा, हरिद्वार, दिल्ली आदि राज्यों में फूल भेजे जाते हैं। इतना ही नहीं लावड़ के फूल पाकिस्तान तक भी जाते हैं। कस्बे के किसान मनोज कुमार, धर्मवीर ने बताया कि यहां के अधिकतर किसान गेंदे की खेती करते हैं। गन्ने का सही समय पर भुगतान नहीं होने से तथा पिछले कई सीजन से आलू की फसल का बुरा हाल होने से किसानों ने फूलों की खेती की ओर रुख किया था, मगर इस बार उन्हें फूलों की खेती ने भी रुला दिया है। हाल के समय में किसानों को फूलों की खेती में भारी नुकसान हो रहा है। कस्बा निवासी राजेन्द्र सैनी, सुशील आदि ने बताया कि लावड़ मंडी की बात करें तो यहां इस बार फूल के दाम एक रुपए किलो होने से किसानों को उनकी लागत भी नहीं मिल पा रही है। जिस कारण किसान फूलों को कूड़े के ढेर में फेंकने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि इस बार फूलों की खेती काफी बढ़ी है। जिससे फूलों की बंपर पैदावार हुई है। जहां गेंदे की फसल का मूल्य सीजन में 25 से 30 रुपये किलो और सामान्य समय में 10 से 15 रुपये मिलता था। वहां इस बार उनके गेंदेे को एक रुपये में भी कोई लेने के लिए तैयार नहीं है। इससे मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है।
मुख्य बातें
फूलों की मंडी के रूप में कई राज्यों में जाना जाता है लावड़
लावड़ मंडी में एक रुपये किलो भी दाम नहीं मिल पा रहे गेंदे के फूल के
घाटे के चलते कूड़े के ढेर पर फूल फेंकने पर मजबूर हैं किसान
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लावड़ क्षेत्र को फूलों की मंडी के रूप में कई राज्यों में जाना जाता है। इस बार उचित दाम नहीं मिलने के कारण किसान अपनी मेहनत से उगाई फूलों की फसल को कूडे़ के ढेर पर फेंकने को मजबूर हो गया है। लावड़ और आसपास के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर फूलों की खेती की जाती है। सीजन के समय में लावड़ मंडी से प्रतिदिन लगभग चार-पांच गाड़ी दूसरे राज्यों के लिए जाती हैं। लावड़ से फूल हरियाणा, हरिद्वार, दिल्ली आदि राज्यों में फूल भेजे जाते हैं। इतना ही नहीं लावड़ के फूल पाकिस्तान तक भी जाते हैं। कस्बे के किसान मनोज कुमार, धर्मवीर ने बताया कि यहां के अधिकतर किसान गेंदे की खेती करते हैं। गन्ने का सही समय पर भुगतान नहीं होने से तथा पिछले कई सीजन से आलू की फसल का बुरा हाल होने से किसानों ने फूलों की खेती की ओर रुख किया था, मगर इस बार उन्हें फूलों की खेती ने भी रुला दिया है। हाल के समय में किसानों को फूलों की खेती में भारी नुकसान हो रहा है। कस्बा निवासी राजेन्द्र सैनी, सुशील आदि ने बताया कि लावड़ मंडी की बात करें तो यहां इस बार फूल के दाम एक रुपए किलो होने से किसानों को उनकी लागत भी नहीं मिल पा रही है। जिस कारण किसान फूलों को कूड़े के ढेर में फेंकने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि इस बार फूलों की खेती काफी बढ़ी है। जिससे फूलों की बंपर पैदावार हुई है। जहां गेंदे की फसल का मूल्य सीजन में 25 से 30 रुपये किलो और सामान्य समय में 10 से 15 रुपये मिलता था। वहां इस बार उनके गेंदेे को एक रुपये में भी कोई लेने के लिए तैयार नहीं है। इससे मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है।
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मुख्य बातें
फूलों की मंडी के रूप में कई राज्यों में जाना जाता है लावड़
लावड़ मंडी में एक रुपये किलो भी दाम नहीं मिल पा रहे गेंदे के फूल के
घाटे के चलते कूड़े के ढेर पर फूल फेंकने पर मजबूर हैं किसान