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भागवत जीवन दर्शन का ग्रंथ है
Updated Sat, 05 May 2018 08:48 PM IST
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जानीखुर्द। गांव रघुनाथपुर में चल रही भागवत कथा में शनिवार को कृष्ण की बाल लीलाओं को वर्णन कथा व्यास श्री भोला पागल ने किया। इस दौरान भक्ति गीत और संगीत पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया।
गांव रघुनाथपुर में चल रही भागवत कथा में शनिवार को कथा वाचक श्री भोला पागल ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मानव को मृत्यु के भय से मुक्त कर देती है। भागवत जीवन दर्शन का ग्रंथ है। यह जीवन जीने की कला का मार्गदर्शन करता है। भागवत की भक्ति का आदर्श कृष्ण की गोपियां हैं। गोपियों ने घर नहीं छोड़ा। उन्होंने स्वधर्म त्याग नहीं किया वे वन में नहीं गई फिर भी वे श्रीकृष्ण को प्राप्त कर सकीं। भागवत ज्ञान, वैराग्य को जागृत करने की कथा है। ज्ञान और वैराग्य मनुष्य के अंदर हैं परंतु वे सोए हुए हैं। भागवत के अतिरिक्त अन्य कोई ग्रंथ नहीं जो मनुष्य मात्र को सात दिन में मुक्ति का मार्ग दिखा दें। कथा वाचक ने कहा कि परिवार में सुख-शांति के लिए घर के मुखिया को मालिक बनकर नहीं, माली बनकर काम करना चाहिए। ऐसा करने से परिवार खुशहाल बना रहेगा। उन्होंने कहा कि आज के मानव का मन ‘मनी’ यानी संपत्ति अर्जित करने में लगा रहता है किंतु जिसने प्रभु को अपना ‘मनी’ मान लिया उसका मन प्रभु में ही लगा रहेगा। उसके सपने में भी विपत्ति नहीं आती है। कथा में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की झांकी प्रस्तुत की गई। कथा में सत्यप्रकाश पाल, आनंदवीर, इंद्रजीत, संदीप, आर्यनपाल, मदनपाल, इकबाल, संगीता पाल, मितलेशदेवी, गुड़िया, गरिमापाल, मंजू चौधरी आदि मौजूद रहे।
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गांव रघुनाथपुर में चल रही भागवत कथा में शनिवार को कथा वाचक श्री भोला पागल ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मानव को मृत्यु के भय से मुक्त कर देती है। भागवत जीवन दर्शन का ग्रंथ है। यह जीवन जीने की कला का मार्गदर्शन करता है। भागवत की भक्ति का आदर्श कृष्ण की गोपियां हैं। गोपियों ने घर नहीं छोड़ा। उन्होंने स्वधर्म त्याग नहीं किया वे वन में नहीं गई फिर भी वे श्रीकृष्ण को प्राप्त कर सकीं। भागवत ज्ञान, वैराग्य को जागृत करने की कथा है। ज्ञान और वैराग्य मनुष्य के अंदर हैं परंतु वे सोए हुए हैं। भागवत के अतिरिक्त अन्य कोई ग्रंथ नहीं जो मनुष्य मात्र को सात दिन में मुक्ति का मार्ग दिखा दें। कथा वाचक ने कहा कि परिवार में सुख-शांति के लिए घर के मुखिया को मालिक बनकर नहीं, माली बनकर काम करना चाहिए। ऐसा करने से परिवार खुशहाल बना रहेगा। उन्होंने कहा कि आज के मानव का मन ‘मनी’ यानी संपत्ति अर्जित करने में लगा रहता है किंतु जिसने प्रभु को अपना ‘मनी’ मान लिया उसका मन प्रभु में ही लगा रहेगा। उसके सपने में भी विपत्ति नहीं आती है। कथा में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की झांकी प्रस्तुत की गई। कथा में सत्यप्रकाश पाल, आनंदवीर, इंद्रजीत, संदीप, आर्यनपाल, मदनपाल, इकबाल, संगीता पाल, मितलेशदेवी, गुड़िया, गरिमापाल, मंजू चौधरी आदि मौजूद रहे।
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