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किसानों 30 प्रतिशत गन्ना खेत में नही मिल पा रहा है इंडेंट
Updated Fri, 27 Apr 2018 10:32 PM IST
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खरखौदा। अप्रैल का अंतिम सप्ताह चल रहा है। इसके बावजूद क्षेत्र के किसानों का अभी 30 फीसदी गन्ना खेतों में खड़ा है। दोनों मिल समय से इंडेंट भी नहीं दे रहे हैं। उधर, दिन-प्रतिदिन तापमान बढ़ता जा रहा है।
खरखौदा क्षेत्र में मोहिउद्दीनपुर और नंगलामल मिल गन्ना खरीदते हैं। किसानों को पहले ही समय से इंडेंट नहीं मिल पाने के कारण गेहूं की फसल की समय से बुआई नहीं हो पाई थी। वहीं, दोनों मिलें किसानों को कम इंडेंट जारी कर रहे हैं। जिससे अप्रैल के अंतिम सप्ताह में भी किसानों का करीब 30 प्रतिशत गन्ना अभी खेतों में खड़ा हुआ है। उधर, दोनों मिल जल्द ही पेराई बंद करने पर विचार कर रही हैं। नंगलामल मिल पर गन्ना डालने वाले किसानों का आरोप है कि मिल ने पहले तो इंडेंट ही जारी नहीं किया। वहीं अप्रैल में मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। मजदूर गेहूं की कटाई में लगे हुए हैं। जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, नंगलामल और मोहिउद्दीनपुर मिल पर गन्ना डालने वाले किसानों का आरोप है कि पहले तो मिल की क्षमता बढ़ाने के नाम पर मिल को देरी से चलाया। बाद में भी मिल कई बार बंद रहा है। अब किसानों का गन्ना खेतों में खड़ा है। इसके बावजूद मिल इंडेंट नहीं दे रहा है। वहीं मिल द्वारा तैनात किया गया तौल क्लर्क क्रय केंद्रों पर एक सप्ताह में एक ही बार पहुंच रहा है। इसके बाद जिस दिन तौल चलती है किसानों में गन्ना डालने के लिए आपाधापी लगी रहती है। किसान कुछ ही देर में प्लाट को भर देते हैं। इसके बाद एक सप्ताह में मिल गन्ना उठाता है। उधर, इस समय किसान पैड़ी के खेत को तैयार करने में लग जाता है। अभी तक करीब 30 प्रतिशत गन्ना खेतों में खड़ा हुआ है।
इस मामले में नंगलामल शुगर मिल के एजीएम जयवीर सिंह का कम इंडेंट की बाबत कहना है कि पिछले वर्ष मिल ने 82 लाख कुंतल गन्ना पेराई की। इस बार मिल अब तक करीब एक करोड़ 2 लाख कुंतल गन्ना खरीद चुकी है। अभी तक भी मिल प्रतिदिन 50 हजार कुंतल गन्ना खरीद रही है। इस वर्ष किसान का रकबा भी बढ़ा है तथा पैदावार भी बढ़ी है। जब तक किसान का गन्ना रहेगा मिल चलेगा।
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वहीं, मोहिउद्दीनपुर के कैन डिपार्टमेंट इंचार्ज अनुराग सिंगल ने बताया कि फैक्ट्री देर से चली। इसके बाद फैक्ट्री में परेशानी आ गई थी। जिस कारण किसानों को इंडेंट कम जारी किया गया। गन्ना क्रय केंद्रों पर पड़ा हुआ है। इसके लिए ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बढ़ा दी है। जल्द ही समस्या से छुटकारा मिलेगा। मिल भी जब तक किसान का गन्ना रहेगा तब तक चलेगी।
किसानों का तीस फीसदी गन्ना अभी तक खेतों में खड़ा
चीनी मिल इंडेंट जारी नहीं कर रहे, किसान परेशान
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खरखौदा क्षेत्र में मोहिउद्दीनपुर और नंगलामल मिल गन्ना खरीदते हैं। किसानों को पहले ही समय से इंडेंट नहीं मिल पाने के कारण गेहूं की फसल की समय से बुआई नहीं हो पाई थी। वहीं, दोनों मिलें किसानों को कम इंडेंट जारी कर रहे हैं। जिससे अप्रैल के अंतिम सप्ताह में भी किसानों का करीब 30 प्रतिशत गन्ना अभी खेतों में खड़ा हुआ है। उधर, दोनों मिल जल्द ही पेराई बंद करने पर विचार कर रही हैं। नंगलामल मिल पर गन्ना डालने वाले किसानों का आरोप है कि मिल ने पहले तो इंडेंट ही जारी नहीं किया। वहीं अप्रैल में मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। मजदूर गेहूं की कटाई में लगे हुए हैं। जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, नंगलामल और मोहिउद्दीनपुर मिल पर गन्ना डालने वाले किसानों का आरोप है कि पहले तो मिल की क्षमता बढ़ाने के नाम पर मिल को देरी से चलाया। बाद में भी मिल कई बार बंद रहा है। अब किसानों का गन्ना खेतों में खड़ा है। इसके बावजूद मिल इंडेंट नहीं दे रहा है। वहीं मिल द्वारा तैनात किया गया तौल क्लर्क क्रय केंद्रों पर एक सप्ताह में एक ही बार पहुंच रहा है। इसके बाद जिस दिन तौल चलती है किसानों में गन्ना डालने के लिए आपाधापी लगी रहती है। किसान कुछ ही देर में प्लाट को भर देते हैं। इसके बाद एक सप्ताह में मिल गन्ना उठाता है। उधर, इस समय किसान पैड़ी के खेत को तैयार करने में लग जाता है। अभी तक करीब 30 प्रतिशत गन्ना खेतों में खड़ा हुआ है।
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इस मामले में नंगलामल शुगर मिल के एजीएम जयवीर सिंह का कम इंडेंट की बाबत कहना है कि पिछले वर्ष मिल ने 82 लाख कुंतल गन्ना पेराई की। इस बार मिल अब तक करीब एक करोड़ 2 लाख कुंतल गन्ना खरीद चुकी है। अभी तक भी मिल प्रतिदिन 50 हजार कुंतल गन्ना खरीद रही है। इस वर्ष किसान का रकबा भी बढ़ा है तथा पैदावार भी बढ़ी है। जब तक किसान का गन्ना रहेगा मिल चलेगा।
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वहीं, मोहिउद्दीनपुर के कैन डिपार्टमेंट इंचार्ज अनुराग सिंगल ने बताया कि फैक्ट्री देर से चली। इसके बाद फैक्ट्री में परेशानी आ गई थी। जिस कारण किसानों को इंडेंट कम जारी किया गया। गन्ना क्रय केंद्रों पर पड़ा हुआ है। इसके लिए ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बढ़ा दी है। जल्द ही समस्या से छुटकारा मिलेगा। मिल भी जब तक किसान का गन्ना रहेगा तब तक चलेगी।
किसानों का तीस फीसदी गन्ना अभी तक खेतों में खड़ा
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