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भक्तामर।
Updated Fri, 16 Mar 2018 07:35 PM IST
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हस्तिनापुर।
हस्तिनापुर की पावन धरा पर विश्व की सुख, शांति एवं समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 39 वें दिन शुक्रवार को सर्वप्रथम विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
आज के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य महावीर प्रसाद जैन, स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का मनोज जैन, शांति विधान करने का अजय कुमार को प्राप्त हुआ। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले मंगल द्वीप का दीप प्रज्ज्वलन रेखा, मनोज ने किया। ब्रह्मचारिणी सुनीता एवं भावना मंगल भावना के साथ शांतिधारा का उच्चारण किया। तदोपरांत देव-शास्त्र-गुरु की पूजन आदिनाथ भगवान की पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। जिसमें विधान कराने वाले सभी धर्म प्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए। आज 121 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। परम पूज्य गुरुवर ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि दान और त्याग में बहुत अंतर है। दान हमेशा अच्छी वस्तु का होता परंतु त्याग बुरी वस्तु का। दान दूसरों के उपकार के लिए होता है पर त्याग अपने उपकार के लिए। दान के बाद एकत्र करने का भाव होता है, लेकिन त्याग में ऐसा नहीं है। दान दो के बीच की क्रिया होती है पर त्याग स्वयं के द्वारा स्वयं के लिए होती है। दान वैभव का होगा, त्याग विकारों का होगा। आज के विधान का विसर्जन निर्मल कुमार धूलियान प. बंगाल ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्जवलन प्रेम जैन कैलाश पर्वत हस्तिनापुर ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन महावीर प्रसाद जैन, मनोज ने किया। चैाबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी द्वारा किया गया। प्रश्नमंच के पश्चात उपस्थित विजेताओं को प्रियंका, प्रेम जैन की ओर से पुरस्कार प्रदत्त किए। आयोजन में मुकेश जैन, सुभाष, मनोज, राजीव आदि का विशेष सहयोग। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के अध्यक्ष अनिल कुमार, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष सुनील जैन, विधान संयोजक मोतीलाल, जिवेंद्र जैन, अनिल जैन का विशेष सहयोग रहा।
मुख्य बातें
धर्म प्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए
121 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया
रासायनिक इस्तेमाल से पर्यावरण पर कुप्रभाव
हस्तिनापुर। कस्बे के राजकीय इंटर कॉलेज में चल रहे आर्ट ऑफ लिविंग प्रशिक्षण के पांचवें दिन प्रशिक्षणार्थियों ने सीएचसी, नगर पंचायत कार्यालय, मुख्य बाजार, में रसायन मुक्त कृषि आयुर्वेदिक संबंधित जागरूकता अभियान चलाया एवं कृषि में रासायनिक पदार्थों के बढ़ते दुष्प्रभावों एवं पर्यावरण को हो रही हानि के बारे में बताया। शिविर में संचालक युवाचार्य मोहनलाल, अंकुर आर्य, विशाल कर्णवाल, राजकुमार, रूपिंदर कौर, डिंपल कर्णवाल, अंकित चैधरी, अतुल, अंकुर आदि का सहयोग रहा।
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अखंड जोत लेकर घर-घर किय भ्रमण
हस्तिनापुर। कस्बे के न्यू ब्लॉक कॉलोनी में चल रहे पांच दिवसीय शीतला माता पूजन में आज चैाथे दिन शुक्रवार को विधिविधान पूर्वक पूजा-अर्चना की गई। आज चैाथे दिन कस्बे एवं क्षेत्र में शांति के लिए माता शीतला के भक्त हांडी में मां की अखंड जोत लेकर घर-घर भ्रमण किया। भक्तों ने उनका हल्दी का पानी डालकर स्वागत किया। पूजा महोत्सव के संयोजक जे राजू ने बताया कि माता को प्रसन्न करने के लिए रविवार को दूर-दूर से आए कई श्रद्धालु अपनी जीभ, गाल व छाती की त्वचा में त्रिशूल आरपार डालकर पूजा करेंगे। अंतिम दिन दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर माता के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करेंगे। महोत्सव में एम अपन्ना, संजय गाइन, एम करपैया, के शांति, केरला, जेसुर्गन, जयंती आदि ने पूजन एवं भक्ति नृत्य किया। मंदिर अध्यक्ष जी मेरा स्वामी, उपाध्यक्ष एम मूर्ति, महामंत्री जे राजू, पूजा ए राजू आदि समेत श्रद्धालु शामिल रहे।
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हस्तिनापुर की पावन धरा पर विश्व की सुख, शांति एवं समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 39 वें दिन शुक्रवार को सर्वप्रथम विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
आज के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य महावीर प्रसाद जैन, स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का मनोज जैन, शांति विधान करने का अजय कुमार को प्राप्त हुआ। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले मंगल द्वीप का दीप प्रज्ज्वलन रेखा, मनोज ने किया। ब्रह्मचारिणी सुनीता एवं भावना मंगल भावना के साथ शांतिधारा का उच्चारण किया। तदोपरांत देव-शास्त्र-गुरु की पूजन आदिनाथ भगवान की पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। जिसमें विधान कराने वाले सभी धर्म प्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए। आज 121 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। परम पूज्य गुरुवर ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि दान और त्याग में बहुत अंतर है। दान हमेशा अच्छी वस्तु का होता परंतु त्याग बुरी वस्तु का। दान दूसरों के उपकार के लिए होता है पर त्याग अपने उपकार के लिए। दान के बाद एकत्र करने का भाव होता है, लेकिन त्याग में ऐसा नहीं है। दान दो के बीच की क्रिया होती है पर त्याग स्वयं के द्वारा स्वयं के लिए होती है। दान वैभव का होगा, त्याग विकारों का होगा। आज के विधान का विसर्जन निर्मल कुमार धूलियान प. बंगाल ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्जवलन प्रेम जैन कैलाश पर्वत हस्तिनापुर ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन महावीर प्रसाद जैन, मनोज ने किया। चैाबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी द्वारा किया गया। प्रश्नमंच के पश्चात उपस्थित विजेताओं को प्रियंका, प्रेम जैन की ओर से पुरस्कार प्रदत्त किए। आयोजन में मुकेश जैन, सुभाष, मनोज, राजीव आदि का विशेष सहयोग। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के अध्यक्ष अनिल कुमार, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष सुनील जैन, विधान संयोजक मोतीलाल, जिवेंद्र जैन, अनिल जैन का विशेष सहयोग रहा।
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मुख्य बातें
धर्म प्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए
121 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया
रासायनिक इस्तेमाल से पर्यावरण पर कुप्रभाव
हस्तिनापुर। कस्बे के राजकीय इंटर कॉलेज में चल रहे आर्ट ऑफ लिविंग प्रशिक्षण के पांचवें दिन प्रशिक्षणार्थियों ने सीएचसी, नगर पंचायत कार्यालय, मुख्य बाजार, में रसायन मुक्त कृषि आयुर्वेदिक संबंधित जागरूकता अभियान चलाया एवं कृषि में रासायनिक पदार्थों के बढ़ते दुष्प्रभावों एवं पर्यावरण को हो रही हानि के बारे में बताया। शिविर में संचालक युवाचार्य मोहनलाल, अंकुर आर्य, विशाल कर्णवाल, राजकुमार, रूपिंदर कौर, डिंपल कर्णवाल, अंकित चैधरी, अतुल, अंकुर आदि का सहयोग रहा।
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अखंड जोत लेकर घर-घर किय भ्रमण
हस्तिनापुर। कस्बे के न्यू ब्लॉक कॉलोनी में चल रहे पांच दिवसीय शीतला माता पूजन में आज चैाथे दिन शुक्रवार को विधिविधान पूर्वक पूजा-अर्चना की गई। आज चैाथे दिन कस्बे एवं क्षेत्र में शांति के लिए माता शीतला के भक्त हांडी में मां की अखंड जोत लेकर घर-घर भ्रमण किया। भक्तों ने उनका हल्दी का पानी डालकर स्वागत किया। पूजा महोत्सव के संयोजक जे राजू ने बताया कि माता को प्रसन्न करने के लिए रविवार को दूर-दूर से आए कई श्रद्धालु अपनी जीभ, गाल व छाती की त्वचा में त्रिशूल आरपार डालकर पूजा करेंगे। अंतिम दिन दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर माता के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करेंगे। महोत्सव में एम अपन्ना, संजय गाइन, एम करपैया, के शांति, केरला, जेसुर्गन, जयंती आदि ने पूजन एवं भक्ति नृत्य किया। मंदिर अध्यक्ष जी मेरा स्वामी, उपाध्यक्ष एम मूर्ति, महामंत्री जे राजू, पूजा ए राजू आदि समेत श्रद्धालु शामिल रहे।