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सरधना में प्रतिदिन हो रही लाखों लीटर पानी की बर्बादी
Updated Sun, 04 Feb 2018 10:21 PM IST
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अशोक सोम
सरधना।
केंद्र और प्रदेश सरकार के जल संरक्षण अभियान के प्रति जनजागरूकता पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं, इस अभियान को नगर के डेयरी संचालक पलीता लगा रहे हैं। उनके द्वारा सबमर्सिबल के माध्यम से भूजल की खूब बर्बादी की जा रही है। वे पशुओं को नहलाने, डेयरियों का गोबर नालों में बहाने के लिए भूजल का प्रयोग करते हैं। नगर में करीब सौ से अधिक डेयरियां हैं। प्रत्येक डेयरी में दो से तीन सबमर्सिबल लगे हुए हैं। यदि समय रहते इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो गंगनहर के निकट बसे कस्बे में जल संकट गहराने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
नगर के साथ आसपास के क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। गंगनहर के निकट बसे नगर में दस वर्ष में करीब बीस फिट तक गिरावट दर्ज की जा चुकी है। पहले 25 से 30 फिट तक पानी उपलब्ध था। अब 45 से 55 फिट तक और गर्मी के मौसम में यह 65 से 70 फिट तक नीचे पानी पहुुंच जाता है। हैंडपंप लगाने वाले मिस्त्री हातिम, जाकिर, सलीम एवं जुबैर आदि का कहना है कि पानी का अत्यधिक दोहन होने से भूजल स्तर गिरता जा रहा है। इसके लिए पानी का दोहन कम किए जाने की आवश्यकता है ताकि समस्या आगे न बढ़ सके। इसके लिए लोगों को जागरूक होकर पानी का दुरुपयोग कम किया जाना चाहिए। जिससे भविष्य में पानी की किल्लत कम हो। नगर में पालिका द्वारा पेयजल आपूर्ति के लिए टंकी की पाइप लाइन बिछाई गई है। पूरे कस्बे को पेयजल आपूर्ति कराने के लिए करीब दस जगह सबमर्सिबल लगाये हैं। इसके बावजूद कुछ लोगों ने घरों में निजी स्तर पर सबमर्सिबल लगा रखे हैं। सबसे अधिक सबमर्सिबल डेयरियों में लगेे हुए हैं। नगर में 100 से अधिक डेयरी संचालित हैं। किसी-किसी डेयरी में पंद्रह सौ से लेकर दो हजार तक भैंसे हैं। डेयरी संचालकों द्वारा प्रत्येक डेयरी में दो से तीन सबमर्सिबल लगा रखे हैं। जिनका प्रयोग डेयरी संचालक पशुओं को पानी पिलाने, नहलाने के लिए करते हैं। वहीं, सर्दी में पानी का प्रयोग पशुओं को नहलाने की जगह डेयरियों का गोबर नाली और नालों में बहाने के लिए करते हैं। डेयरियों में सबमर्सिबल लगातार चलने से नगर का भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। नगर निवासी एवं विद्यार्थी विकास मंच के अध्यक्ष फैयाज अहमद का कहना है कि जल ही जीवन है। नगर की जनता एवं डेयरी संचालकों को चाहिए कि वे पानी की बर्बादी न करें। जल का कम से कम प्रयोग करें ताकि आने वाले समय में जल संकट से बचा जा सके। शिक्षक दीपक शर्मा का कहना है कि जल संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। जनता को उसके प्रति जागरूक होना चाहिए। प्रशासन और शासन को भी चाहिए कि इस समस्या की तरफ ध्यान दे और इस पर कानून बनाया जाए। जिससे पानी का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ संज्ञान लिया जा सके। जितेंद्र कुमार का कहना है कि पानी का हमेशा सदुपयोग होना चाहिए। पानी को बर्बादी को तत्काल रोक देनी चाहिए। यदि डेयरियों में लगे सबमर्सिबल से गोबर बहाया जा रहा है। इससे नगर के नाले चोक हो हो गए हैं। जिससे कस्बे में जलभराव की समस्या पैदा हो गई है। वहीं, भूजल स्तर भी घटता जा रहा है। प्रमोद कुमार का कहना है कि जल अमूल्य है। उसकी बर्बादी न हो इसके लिए सभी को सहयोग करना चाहिए। वहीं, मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने भी डेयरी संचालकों पर जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। जिससे वे पानी की बर्बादी पर तत्काल रोक लगाकर नालों की निकासी सुचारू बनाए रखने में सहयोग करें।
-इस तरह का मामला संज्ञान में आया है। पानी की बर्बादी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में उच्चाधिकारियों से बात करेंगे।-राकेश सिंह, एसडीएम सरधना
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मुख्य बातें
नगर की डेयरियों में डेढ़ से दो हजार तक हैं भैंस
संचालकों ने डेयरियों में लगा रख हैं दो से तीन सबमर्सिबल
प्रशासनिक अधिकारी नहीं लगा रहे हैं
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सरधना।
केंद्र और प्रदेश सरकार के जल संरक्षण अभियान के प्रति जनजागरूकता पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं, इस अभियान को नगर के डेयरी संचालक पलीता लगा रहे हैं। उनके द्वारा सबमर्सिबल के माध्यम से भूजल की खूब बर्बादी की जा रही है। वे पशुओं को नहलाने, डेयरियों का गोबर नालों में बहाने के लिए भूजल का प्रयोग करते हैं। नगर में करीब सौ से अधिक डेयरियां हैं। प्रत्येक डेयरी में दो से तीन सबमर्सिबल लगे हुए हैं। यदि समय रहते इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो गंगनहर के निकट बसे कस्बे में जल संकट गहराने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
नगर के साथ आसपास के क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। गंगनहर के निकट बसे नगर में दस वर्ष में करीब बीस फिट तक गिरावट दर्ज की जा चुकी है। पहले 25 से 30 फिट तक पानी उपलब्ध था। अब 45 से 55 फिट तक और गर्मी के मौसम में यह 65 से 70 फिट तक नीचे पानी पहुुंच जाता है। हैंडपंप लगाने वाले मिस्त्री हातिम, जाकिर, सलीम एवं जुबैर आदि का कहना है कि पानी का अत्यधिक दोहन होने से भूजल स्तर गिरता जा रहा है। इसके लिए पानी का दोहन कम किए जाने की आवश्यकता है ताकि समस्या आगे न बढ़ सके। इसके लिए लोगों को जागरूक होकर पानी का दुरुपयोग कम किया जाना चाहिए। जिससे भविष्य में पानी की किल्लत कम हो। नगर में पालिका द्वारा पेयजल आपूर्ति के लिए टंकी की पाइप लाइन बिछाई गई है। पूरे कस्बे को पेयजल आपूर्ति कराने के लिए करीब दस जगह सबमर्सिबल लगाये हैं। इसके बावजूद कुछ लोगों ने घरों में निजी स्तर पर सबमर्सिबल लगा रखे हैं। सबसे अधिक सबमर्सिबल डेयरियों में लगेे हुए हैं। नगर में 100 से अधिक डेयरी संचालित हैं। किसी-किसी डेयरी में पंद्रह सौ से लेकर दो हजार तक भैंसे हैं। डेयरी संचालकों द्वारा प्रत्येक डेयरी में दो से तीन सबमर्सिबल लगा रखे हैं। जिनका प्रयोग डेयरी संचालक पशुओं को पानी पिलाने, नहलाने के लिए करते हैं। वहीं, सर्दी में पानी का प्रयोग पशुओं को नहलाने की जगह डेयरियों का गोबर नाली और नालों में बहाने के लिए करते हैं। डेयरियों में सबमर्सिबल लगातार चलने से नगर का भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। नगर निवासी एवं विद्यार्थी विकास मंच के अध्यक्ष फैयाज अहमद का कहना है कि जल ही जीवन है। नगर की जनता एवं डेयरी संचालकों को चाहिए कि वे पानी की बर्बादी न करें। जल का कम से कम प्रयोग करें ताकि आने वाले समय में जल संकट से बचा जा सके। शिक्षक दीपक शर्मा का कहना है कि जल संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। जनता को उसके प्रति जागरूक होना चाहिए। प्रशासन और शासन को भी चाहिए कि इस समस्या की तरफ ध्यान दे और इस पर कानून बनाया जाए। जिससे पानी का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ संज्ञान लिया जा सके। जितेंद्र कुमार का कहना है कि पानी का हमेशा सदुपयोग होना चाहिए। पानी को बर्बादी को तत्काल रोक देनी चाहिए। यदि डेयरियों में लगे सबमर्सिबल से गोबर बहाया जा रहा है। इससे नगर के नाले चोक हो हो गए हैं। जिससे कस्बे में जलभराव की समस्या पैदा हो गई है। वहीं, भूजल स्तर भी घटता जा रहा है। प्रमोद कुमार का कहना है कि जल अमूल्य है। उसकी बर्बादी न हो इसके लिए सभी को सहयोग करना चाहिए। वहीं, मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने भी डेयरी संचालकों पर जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। जिससे वे पानी की बर्बादी पर तत्काल रोक लगाकर नालों की निकासी सुचारू बनाए रखने में सहयोग करें।
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-इस तरह का मामला संज्ञान में आया है। पानी की बर्बादी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में उच्चाधिकारियों से बात करेंगे।-राकेश सिंह, एसडीएम सरधना
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मुख्य बातें
नगर की डेयरियों में डेढ़ से दो हजार तक हैं भैंस
संचालकों ने डेयरियों में लगा रख हैं दो से तीन सबमर्सिबल
प्रशासनिक अधिकारी नहीं लगा रहे हैं