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बढ़ई को नहीं मिली आरी, ब्यू टीशियन को दी शेविंग किट
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- ओडीओपी समिट में विश्वकर्मा श्रम सम्मान में बांटी गई टूल किट
- बढ़ई को नहीं मिली आरी, ब्यूटीशियन को दी शेविंग किट
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। एक जनपद एक उत्पाद समिट में विश्वकर्मा श्रम सम्मान के तहत श्रमिकों को जो टूलकिट का वितरण हुआ उसमें भारी लापरवाही बरती गई। कई लाभार्थियों को अपने ट्रेूड से जुड़ी टूल किट ही नहीं मिली, जबकि कई लाभार्थी ऐसे रहे जिन्हें अपने ट्रेड से जुड़ा प्रमुख औजार ही नहीं मिला। ब्यूटीशियन की टूल किट में ट्रिमर, रेजर, शेविंग ब्रश निकला। बढ़ई की टूल किट में आरी, हथौड़ा नहीं था। इससे लाभार्थी परेशान रहे।
पार्लर की जगह मिला दूसरा सामान
ई लोगों को उनके जनपद में ही टूल किट दे दी, जबकि हमें बेवजह दूसरे जनपद में बुलाया गया। मैंने पार्लर ट्रेड के लिए आवेदन किया था, लेकिन मुझे जेंट्स का सामान दे दिया। इसमें उस्तरा, ट्रिमर, शेविंग ब्रश है। प्रेसिंग मशीन, कर्लिंग मशीन, फेशियल किट देने को कहा था, लेकिन लेडिज पार्लर का कोई सामान नहीं मिला। -शिल्पी जैन, सहारनपुर
न कटर न गन, हथौड़ी भी ठीक नहीं
चिमटी नहीं है, ऐरन जो दी है वो मानक से छोटी है इससे काम नहीं हो सकता। बेसिक सामान भी नहीं मिला। टांके के लिए गन जरूरी होती है वो नहीं है। चांदी, सोना काटने की कतरी, हथौड़ी भी इतनी छोटी है जो किसी काम की नहीं है। सुनार का बेसिक सामान ही नहीं है। -कलीम, स्वर्णकार सहारनपुर
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20 हजार का बोला था, निकला 3 हजार का सामान
बढ़ई का जो सामान मिला है वो किसी उपयोग का नहीं है। कुछ लोगों को बक्से में सामान दिया हमें थैले में ही थोड़ा सा सामान दे दिया। 70 में से 30 प्रतिशत सामान भी टूल किट में नहीं है। -रजा, बढ़ई अमरोहा
न आरी, न ड्रिल मशीन शिकंजा भी छोटा
बढ़ई की पहचान उसकी आरी, ड्रिल होती है। लेकिन आरी, लोहे का रंधा कुछ भी टूल किट में नहीं है। शिकंजा भी पांच फुट का होता है, लेकिन ढाई फुट का मिला है। ये नहीं बताया था कि कितना सामान मिलेगा, लेकिन टूल किट में जरूरी सामान मिलेगा। -सचिन, बढ़ई सहारनपुर
ओडीओपी उत्पादों क ी लगी प्रदर्शनी
आयोजन में प्रदेश के 16 जनपदों से एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत आए शिल्पकारों, उद्यमियों ने अपने उत्पाद की प्रदर्शनी लगाई। प्रदर्शनी में मैनपुरी से तारकशी, मेरठ से खेल सामान, सहारनपुर काष्ठ कला, हरदोई से हथकरघा, अमरोहा से एंब्रायडरी, गौतमबुद्धनगर से गारमेंट, रामपुर से हस्तकला आदि के सामानों की प्रदर्शनी लगी। 48 स्टॉलों पर सामान का क्रय विक्रय भी हुआ। इस अवसर पर ओडीओपी की पुस्तिका का विमोचन हुआ व योजना से जुड़ी फिल्म भी दिखाई गई।
ऋण से उद्यम को मिला विस्तार
आयोजन में एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत ऋण का लाभ लेने वाले लाभार्थियों ने अपने विचार रखे। सहारनपुर से आई नीलोफर ने कहा मुझे ब्यूटीशियन का कोर्स करने के बाद टूल किट मिली और आसानी से ऋण मिला है, इससे काफी लाभ मिला। आसिफ चौहान को भी उनके उत्पादों को पेटेंट कराने व स्टार्टअप को बिजनेस का रूप देने के लिए ऋण आसानी से मिला। नवीन डागर को भी खेल इकाई के विस्तार के लिए आसानी से ऋण मिला जिससे वे अपने खेल उद्योग को बढ़ा सके।
महिलाओं के हुनर को मिला मंच
आयोजन में शामिल होने विभिन्न जनपदों से महिलाएं आईं। मैनपुरी से आई रेखा तारकशी का काम करती है। रेखा ने बताया तारकशी का काम जो बिल्कुल खत्म होने को था उसे अब लोग फिर से पसंद करने लगे हैं। इसी तरह पीलीभीत से आई बांसुरी निर्माता हिना परवीन ने बताया पीढ़ियों से बांसुरी बनाने का काम हमारे घर पर हो रहा है। लेकिन अब उत्पाद को बिक्री के लिए अच्छा बाजार मिलने लगा है। रामपुर से आई रिजवाना ने कहा हमारे यहां पेपरमेशी और अरकंडी का काम होता है। 2 हजार महिलाएं इस काम से जुड़ी हैं सभी को अच्छा मुनाफा मिलने लगा है।
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- बढ़ई को नहीं मिली आरी, ब्यूटीशियन को दी शेविंग किट
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। एक जनपद एक उत्पाद समिट में विश्वकर्मा श्रम सम्मान के तहत श्रमिकों को जो टूलकिट का वितरण हुआ उसमें भारी लापरवाही बरती गई। कई लाभार्थियों को अपने ट्रेूड से जुड़ी टूल किट ही नहीं मिली, जबकि कई लाभार्थी ऐसे रहे जिन्हें अपने ट्रेड से जुड़ा प्रमुख औजार ही नहीं मिला। ब्यूटीशियन की टूल किट में ट्रिमर, रेजर, शेविंग ब्रश निकला। बढ़ई की टूल किट में आरी, हथौड़ा नहीं था। इससे लाभार्थी परेशान रहे।
पार्लर की जगह मिला दूसरा सामान
ई लोगों को उनके जनपद में ही टूल किट दे दी, जबकि हमें बेवजह दूसरे जनपद में बुलाया गया। मैंने पार्लर ट्रेड के लिए आवेदन किया था, लेकिन मुझे जेंट्स का सामान दे दिया। इसमें उस्तरा, ट्रिमर, शेविंग ब्रश है। प्रेसिंग मशीन, कर्लिंग मशीन, फेशियल किट देने को कहा था, लेकिन लेडिज पार्लर का कोई सामान नहीं मिला। -शिल्पी जैन, सहारनपुर
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न कटर न गन, हथौड़ी भी ठीक नहीं
चिमटी नहीं है, ऐरन जो दी है वो मानक से छोटी है इससे काम नहीं हो सकता। बेसिक सामान भी नहीं मिला। टांके के लिए गन जरूरी होती है वो नहीं है। चांदी, सोना काटने की कतरी, हथौड़ी भी इतनी छोटी है जो किसी काम की नहीं है। सुनार का बेसिक सामान ही नहीं है। -कलीम, स्वर्णकार सहारनपुर
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20 हजार का बोला था, निकला 3 हजार का सामान
बढ़ई का जो सामान मिला है वो किसी उपयोग का नहीं है। कुछ लोगों को बक्से में सामान दिया हमें थैले में ही थोड़ा सा सामान दे दिया। 70 में से 30 प्रतिशत सामान भी टूल किट में नहीं है। -रजा, बढ़ई अमरोहा
न आरी, न ड्रिल मशीन शिकंजा भी छोटा
बढ़ई की पहचान उसकी आरी, ड्रिल होती है। लेकिन आरी, लोहे का रंधा कुछ भी टूल किट में नहीं है। शिकंजा भी पांच फुट का होता है, लेकिन ढाई फुट का मिला है। ये नहीं बताया था कि कितना सामान मिलेगा, लेकिन टूल किट में जरूरी सामान मिलेगा। -सचिन, बढ़ई सहारनपुर
ओडीओपी उत्पादों क ी लगी प्रदर्शनी
आयोजन में प्रदेश के 16 जनपदों से एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत आए शिल्पकारों, उद्यमियों ने अपने उत्पाद की प्रदर्शनी लगाई। प्रदर्शनी में मैनपुरी से तारकशी, मेरठ से खेल सामान, सहारनपुर काष्ठ कला, हरदोई से हथकरघा, अमरोहा से एंब्रायडरी, गौतमबुद्धनगर से गारमेंट, रामपुर से हस्तकला आदि के सामानों की प्रदर्शनी लगी। 48 स्टॉलों पर सामान का क्रय विक्रय भी हुआ। इस अवसर पर ओडीओपी की पुस्तिका का विमोचन हुआ व योजना से जुड़ी फिल्म भी दिखाई गई।
ऋण से उद्यम को मिला विस्तार
आयोजन में एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत ऋण का लाभ लेने वाले लाभार्थियों ने अपने विचार रखे। सहारनपुर से आई नीलोफर ने कहा मुझे ब्यूटीशियन का कोर्स करने के बाद टूल किट मिली और आसानी से ऋण मिला है, इससे काफी लाभ मिला। आसिफ चौहान को भी उनके उत्पादों को पेटेंट कराने व स्टार्टअप को बिजनेस का रूप देने के लिए ऋण आसानी से मिला। नवीन डागर को भी खेल इकाई के विस्तार के लिए आसानी से ऋण मिला जिससे वे अपने खेल उद्योग को बढ़ा सके।
महिलाओं के हुनर को मिला मंच
आयोजन में शामिल होने विभिन्न जनपदों से महिलाएं आईं। मैनपुरी से आई रेखा तारकशी का काम करती है। रेखा ने बताया तारकशी का काम जो बिल्कुल खत्म होने को था उसे अब लोग फिर से पसंद करने लगे हैं। इसी तरह पीलीभीत से आई बांसुरी निर्माता हिना परवीन ने बताया पीढ़ियों से बांसुरी बनाने का काम हमारे घर पर हो रहा है। लेकिन अब उत्पाद को बिक्री के लिए अच्छा बाजार मिलने लगा है। रामपुर से आई रिजवाना ने कहा हमारे यहां पेपरमेशी और अरकंडी का काम होता है। 2 हजार महिलाएं इस काम से जुड़ी हैं सभी को अच्छा मुनाफा मिलने लगा है।