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भाजपा को भारी न पड़ जाए बेंच की उपेक्षा
Updated Tue, 14 Aug 2018 03:00 AM IST
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मेरठ। भाजपा की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच पर चर्चा तक न करना उसे भारी पड़ सकता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग कई दशक पुरानी है। यह बात अलग है कि राजनैतिक पेंच में फंसी इस मांग को आज तक कोई भी सरकार पूरा नहीं कर पायी है। लेकिन अहम बात ये है कि लोकसभा चुनाव 2014 की चुनाव प्रचार रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस मुद्दे पर शताब्दी नगर में घोषणा की थी। लेकिन आज तक भी यह मांग सकारात्मक रास्ते की तरफ एक कदम नहीं बढ़ पायी है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता लगातार आंदोलन कर रहे हैं। 11 अगस्त को प्रदेश कार्यसमिति की बैठक शुरू होने से पहले अधिवक्ताओं ने सुभारती के सामने जमकर हंगामा काटा था। जिस पर पुलिस-प्रशासन ने बल पूर्वक अधिवक्ताओं को वहां से हटा दिया। इस मांग और आंदोलन को देखकर लग रहा था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सांसद और संगठन के पदाधिकारी कार्यसमिति की बैठक के एजेंडे में इसे शामिल कराएंगे। लेकिन एजेंडे में शामिल कराना तो दूर, एक भी नेता ने इस पर चर्चा तक नहीं की।
हाईकोर्ट बेंच मामला सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं है। इस आंदोलन से मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली, बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, हापुड़, रामपुर आदि करीब दो दर्जन जनपद जुड़े हैं। यह मांग सिर्फ अधिवक्ताओं की नहीं बल्कि आम जनता की भी है। क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों केस लंबित हैं और रोजाना हजारों की संख्या में लोगों को यहां से अपने केस की पैरवी में इलाहाबाद जाना पड़ता है।
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अधिवक्ता इस आंदोलन को स्वयंसेवी और समाजसेवी संस्थाओं के साथ आम जनता के साथ जोड़ चुके हैं। ऐसे में इतने बड़े मुद्दे पर भाजपा का कोई चिंतन न होना सभी को हैरान कर रहा है। बड़ी बात ये है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से एक भी नेता ने आगामी चुनाव को देखते हुए इस मामले को नहीं उठाया। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहे हैं कि हाईकोर्ट बेंच की उपेक्षा कहीं मिशन 2019 के लिए भारी न पड़ जाए।
मुख्यमंत्री ने दिलाया है विश्वास
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में संगठनात्मक एजेंडा रखा जाता है। इसलिए यह मुद्दा नहीं रखा जा सकता है। लेकिन हमने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से व्यक्तिगत मुलाकात कर हाईकोर्ट बेंच की मांग को प्रमुखता से रखा। मुख्यमंत्री ने इस पर अपनी तरफ से पूरी पैरवी करने का विश्वास दिलाया। -राजेंद्र अग्रवाल, सांसद और सदस्य प्रदेश कार्यसमिति
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग कई दशक पुरानी है। यह बात अलग है कि राजनैतिक पेंच में फंसी इस मांग को आज तक कोई भी सरकार पूरा नहीं कर पायी है। लेकिन अहम बात ये है कि लोकसभा चुनाव 2014 की चुनाव प्रचार रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस मुद्दे पर शताब्दी नगर में घोषणा की थी। लेकिन आज तक भी यह मांग सकारात्मक रास्ते की तरफ एक कदम नहीं बढ़ पायी है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता लगातार आंदोलन कर रहे हैं। 11 अगस्त को प्रदेश कार्यसमिति की बैठक शुरू होने से पहले अधिवक्ताओं ने सुभारती के सामने जमकर हंगामा काटा था। जिस पर पुलिस-प्रशासन ने बल पूर्वक अधिवक्ताओं को वहां से हटा दिया। इस मांग और आंदोलन को देखकर लग रहा था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सांसद और संगठन के पदाधिकारी कार्यसमिति की बैठक के एजेंडे में इसे शामिल कराएंगे। लेकिन एजेंडे में शामिल कराना तो दूर, एक भी नेता ने इस पर चर्चा तक नहीं की।
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हाईकोर्ट बेंच मामला सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं है। इस आंदोलन से मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली, बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, हापुड़, रामपुर आदि करीब दो दर्जन जनपद जुड़े हैं। यह मांग सिर्फ अधिवक्ताओं की नहीं बल्कि आम जनता की भी है। क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों केस लंबित हैं और रोजाना हजारों की संख्या में लोगों को यहां से अपने केस की पैरवी में इलाहाबाद जाना पड़ता है।
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अधिवक्ता इस आंदोलन को स्वयंसेवी और समाजसेवी संस्थाओं के साथ आम जनता के साथ जोड़ चुके हैं। ऐसे में इतने बड़े मुद्दे पर भाजपा का कोई चिंतन न होना सभी को हैरान कर रहा है। बड़ी बात ये है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से एक भी नेता ने आगामी चुनाव को देखते हुए इस मामले को नहीं उठाया। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहे हैं कि हाईकोर्ट बेंच की उपेक्षा कहीं मिशन 2019 के लिए भारी न पड़ जाए।
मुख्यमंत्री ने दिलाया है विश्वास
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में संगठनात्मक एजेंडा रखा जाता है। इसलिए यह मुद्दा नहीं रखा जा सकता है। लेकिन हमने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से व्यक्तिगत मुलाकात कर हाईकोर्ट बेंच की मांग को प्रमुखता से रखा। मुख्यमंत्री ने इस पर अपनी तरफ से पूरी पैरवी करने का विश्वास दिलाया। -राजेंद्र अग्रवाल, सांसद और सदस्य प्रदेश कार्यसमिति