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वीर उधम सिंह की पुण्यतिथि पर शहीदी दिवस मनाया
Updated Wed, 01 Aug 2018 01:40 AM IST
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वीर उधम सिंह की पुण्यतिथि पर शहीदी दिवस मनाया
मेरठ। अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन भारत के तत्वावधान में शहीद-ए-आजम उधम सिंह की पुण्यतिथि पर शहीदी दिवस मनाया। रविदास भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान संगठन के प्रदेश प्रभारी बाबू अतर सिंह रविदासी ने बताया कि जलियावाला बाग हत्याकांड के 21 साल बाद 13 मार्च 1940 में उधम सिंह को अपने हजारों देशवासियों की मौत का बदला लेने का मौका मिला। अतर सिंह ने इस घटनाक्रम पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लंदन में बैठक के दौरान जनरल डायर भी वक्ताओं में से एक था। वीर उधम सिंह एक मोटी किताब में रिवाल्वर छिपाकर घटनास्थल पर बैठक में पहुंचे। जब जनरल डायर की मौत की जांच प्रारंभ हुई, उधम सिंह से जब अंग्रेज अफसरों ने डायर को मारने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि जनरल डायर ने मेरे देश भारत के 3000 निर्दोष लोगों की अकारण हत्या कर दी थी, तभी मैंने डायर को मारने का संकल्प ले लिया था जिसे पूरा करने में मुझे 21 साल लगे। लेकिन अब खुश हूं क्योंकि मेरा संकल्प पूरा हो गया मुझे अब अपनी मौत से डर नहीं है। बाद में उधम सिंह को फांसी की सजा सुनायी गई और 31 जुलाई 1940 को उन्हें लंदन की जेल में फांसी पर लटका दिया गया। रविदासिया धर्म संगठन उन्हें कोटि-कोटि नमन करता है। कार्यक्रम में सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। रविकांत जोशिया, अमित रवि, राकेश, राजकुमार, परविंदर राणा, रवि प्रकाश, पीतम सिंह, भगवत सिंह, निशांत नेहरा आदि रहे।
वहीं दूसरी ओर वीर उधम सिंह के बलिदान दिवस के अवसर पर दलित चेतना मंच की ओर से शताब्दी नगर में गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुंशीलाल ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। गोष्ठी में सत्यपाल सिंह, डॉ. चरण सिंह, डॉ. विनोद कुमार, मनोज कुमार पाल, तेजवीर सिंह, अरूण कुमार, अरूण बौद्घ आदि रहे।
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मेरठ। अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन भारत के तत्वावधान में शहीद-ए-आजम उधम सिंह की पुण्यतिथि पर शहीदी दिवस मनाया। रविदास भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान संगठन के प्रदेश प्रभारी बाबू अतर सिंह रविदासी ने बताया कि जलियावाला बाग हत्याकांड के 21 साल बाद 13 मार्च 1940 में उधम सिंह को अपने हजारों देशवासियों की मौत का बदला लेने का मौका मिला। अतर सिंह ने इस घटनाक्रम पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लंदन में बैठक के दौरान जनरल डायर भी वक्ताओं में से एक था। वीर उधम सिंह एक मोटी किताब में रिवाल्वर छिपाकर घटनास्थल पर बैठक में पहुंचे। जब जनरल डायर की मौत की जांच प्रारंभ हुई, उधम सिंह से जब अंग्रेज अफसरों ने डायर को मारने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि जनरल डायर ने मेरे देश भारत के 3000 निर्दोष लोगों की अकारण हत्या कर दी थी, तभी मैंने डायर को मारने का संकल्प ले लिया था जिसे पूरा करने में मुझे 21 साल लगे। लेकिन अब खुश हूं क्योंकि मेरा संकल्प पूरा हो गया मुझे अब अपनी मौत से डर नहीं है। बाद में उधम सिंह को फांसी की सजा सुनायी गई और 31 जुलाई 1940 को उन्हें लंदन की जेल में फांसी पर लटका दिया गया। रविदासिया धर्म संगठन उन्हें कोटि-कोटि नमन करता है। कार्यक्रम में सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। रविकांत जोशिया, अमित रवि, राकेश, राजकुमार, परविंदर राणा, रवि प्रकाश, पीतम सिंह, भगवत सिंह, निशांत नेहरा आदि रहे।
वहीं दूसरी ओर वीर उधम सिंह के बलिदान दिवस के अवसर पर दलित चेतना मंच की ओर से शताब्दी नगर में गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुंशीलाल ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। गोष्ठी में सत्यपाल सिंह, डॉ. चरण सिंह, डॉ. विनोद कुमार, मनोज कुमार पाल, तेजवीर सिंह, अरूण कुमार, अरूण बौद्घ आदि रहे।
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