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मेरठ कॉलेज में प्राचार्य को लेकर मैनेजमेंट की बैठक आज
Updated Fri, 06 Apr 2018 02:28 AM IST
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मेरठ कॉलेज में मैनेजमेंट की बैठक आज, हट सकती हैं प्राचार्य
मेरठ। मेरठ कॉलेज में परीक्षा के दौरान गलत पेपर बांटने पर बेकसूर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के मामले में शुक्रवार को मैनेजमेंट के पदाधिकारियों की बैठक बुला ली गई है। बैठक में मैनेजमेंट की तरफ से बड़ा फैसला लिया जा सकता है। प्रिंसिपल डॉ. बी. कुमार को हटाया भी जा सकता है।
मेरठ कॉलेज में 14 मार्च को एमकॉम कोड आई-101 मैनेजमेंट कॉन्सेप्ट एंड आग्र्रेनाइजेशन बिहेवियर और एलएलबी में कोड के-201 कांट्रेक्ट सेकेंड का पेपर था। केंद्र अध्यक्ष की गलती के चलते कई क्लासों में इन पेपरों की बजाय 16 मार्च को होने वाले एमकॉम कोड आई-102 बिजनेस एनवायरमेंट और एलएलबी में कोड 202 फैमिली लॉ के पेपर बंट गए थे। छात्रों के हंगामे के बाद विश्वविद्यालय ने पेपर आउट मानते हुए एमकॉम विषय कोड आई-102 और एलएलबी विषय कोड के-202की परीक्षाएं स्थगित कर दीं थी। पेपर का लिफाफा खोलने की जिम्मेदारी वरिष्ठ केंद्राध्यक्ष डॉ. रेनू सारस्वत और चार अन्य शिक्षकों की थी। इस मामले में प्राचार्या ने शिक्षकों पर कार्रवाई करने की बजाय कर्मचारियों पर इसका ठीकरा फोड़ दिया था। कर्मचारियों की ड्यूूटी बदल दी गई थी। इसको लेकर मेरठ कॉलेज कर्मचारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने हंगामा कर दिया था। परीक्षा के बहिष्कार की धमकी दे दी थी। इस मामले में कर्मचारियों ने मैनेजमेंट से प्राचार्या की शिकायत की थी। उक्त प्रकरण में दो अप्रैल को कॉलेज के अवैतनिक मंत्री अरविंद नाथ सेठ ने पत्र जारी करके छह अप्रैल को मेरठ कॉलेज की कार्यकारिणी समिति की बैठक बुला ली थी। शुक्रवार को तीन बजे कॉलेज के कांफ्रेंस हॉल में मैनेजमेंट की बैठक होगी। मीटिंग का एजेंडा कॉलेज में परीक्षा के दौरान अनियमितताओं पर विचार और निर्णय रखा गया है। मीटिंग में मैनेजमेंट की तरफ से प्राचार्या के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। बता दें कि 1890 में बने ऐतिहासिक मेरठ कॉलेज में माहौल पूरी तरह से गड़बड़ाया हुआ है। कक्षाओं में छात्र नहीं आते हैं। अक्सर मारपीट की घटनाएं होती रहती हैं।
खास बातें:
14 मार्च को बांट दिए गए थे परीक्षा में गलत पेपर
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मेरठ। मेरठ कॉलेज में परीक्षा के दौरान गलत पेपर बांटने पर बेकसूर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के मामले में शुक्रवार को मैनेजमेंट के पदाधिकारियों की बैठक बुला ली गई है। बैठक में मैनेजमेंट की तरफ से बड़ा फैसला लिया जा सकता है। प्रिंसिपल डॉ. बी. कुमार को हटाया भी जा सकता है।
मेरठ कॉलेज में 14 मार्च को एमकॉम कोड आई-101 मैनेजमेंट कॉन्सेप्ट एंड आग्र्रेनाइजेशन बिहेवियर और एलएलबी में कोड के-201 कांट्रेक्ट सेकेंड का पेपर था। केंद्र अध्यक्ष की गलती के चलते कई क्लासों में इन पेपरों की बजाय 16 मार्च को होने वाले एमकॉम कोड आई-102 बिजनेस एनवायरमेंट और एलएलबी में कोड 202 फैमिली लॉ के पेपर बंट गए थे। छात्रों के हंगामे के बाद विश्वविद्यालय ने पेपर आउट मानते हुए एमकॉम विषय कोड आई-102 और एलएलबी विषय कोड के-202की परीक्षाएं स्थगित कर दीं थी। पेपर का लिफाफा खोलने की जिम्मेदारी वरिष्ठ केंद्राध्यक्ष डॉ. रेनू सारस्वत और चार अन्य शिक्षकों की थी। इस मामले में प्राचार्या ने शिक्षकों पर कार्रवाई करने की बजाय कर्मचारियों पर इसका ठीकरा फोड़ दिया था। कर्मचारियों की ड्यूूटी बदल दी गई थी। इसको लेकर मेरठ कॉलेज कर्मचारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने हंगामा कर दिया था। परीक्षा के बहिष्कार की धमकी दे दी थी। इस मामले में कर्मचारियों ने मैनेजमेंट से प्राचार्या की शिकायत की थी। उक्त प्रकरण में दो अप्रैल को कॉलेज के अवैतनिक मंत्री अरविंद नाथ सेठ ने पत्र जारी करके छह अप्रैल को मेरठ कॉलेज की कार्यकारिणी समिति की बैठक बुला ली थी। शुक्रवार को तीन बजे कॉलेज के कांफ्रेंस हॉल में मैनेजमेंट की बैठक होगी। मीटिंग का एजेंडा कॉलेज में परीक्षा के दौरान अनियमितताओं पर विचार और निर्णय रखा गया है। मीटिंग में मैनेजमेंट की तरफ से प्राचार्या के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। बता दें कि 1890 में बने ऐतिहासिक मेरठ कॉलेज में माहौल पूरी तरह से गड़बड़ाया हुआ है। कक्षाओं में छात्र नहीं आते हैं। अक्सर मारपीट की घटनाएं होती रहती हैं।
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खास बातें:
14 मार्च को बांट दिए गए थे परीक्षा में गलत पेपर