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भैसाली बस अड्डा प्रकरण
Updated Mon, 28 Aug 2017 02:36 AM IST
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मेरठ। जमीन पर मालिकाना हक नहीं होने और एनजीटी में मामला फंसे होने के बाद भी भैसाली बस अड्डे पर निर्माण कार्य जारी है। सोमवार फिर एनजीटी में इस मामले पर सुनवाई होनी है।
रोडवेज का भैसाली व सोहराबगेट बस अड्डा शहर के बीचों बीच हैं। इन अड्डों से संचालित होने वाली हजारों बसों के चलते जहां शहर में जाम लगता है तो वहीं वायु व ध्वनि प्रदूषण का भी स्तर बढ़ रहा है। मास्टर प्लान में बस अड्डों का बाहर करने के प्रस्ताव पर अमल नहीं होनेे और रोडवेज के ढुलमुल रवैये के चलते आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने मामले को लेकर एनजीटी का दरवाजा खटखटाया था। इस पर एनजीटी ने रोडवेज, एमडीए, वन व पर्यावरण विभाग के अलावा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पार्टी बनाते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। कई बार लगी तारीखों में सभी पक्षों ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। अब मामले में दोनों पक्षों की बहस होनी है। इस सबके बावजूद भैसाली बस अड्डे की गिराई गई पुरानी जर्जर बिल्डिंग के निर्माण के लिए स्वीकृत हुए पांच करोड़ रुपये भी अड्डे के निर्माण पर खर्च किए जा रहे हैं।
मास्टर प्लान में शहर से बाहर किए जाने है बस अड्डे
एमडीए के मास्टर प्लान में बस अड्डों को शहर से बाहर किया जाना प्रस्तावित है। लेकिन अभी तक इस दिशा में गंभीरता से काम नहीं हो पाया है। भैसाली बस अड्डे पर रोडवेज का मालिकाना हक को भी लेकर विवाद है। जमीन पर कैंट बोर्ड और राजस्व विभाग अपना हक जताते आए हैं। अड्डे पर चल रहे निर्माण के लिए भी एमडीए से स्वीकृति नहीं ली गई है।
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बोलते आंकड़े
1934 में कैंट बोर्ड ने प्रदेश सरकार को दी भैसाली अड्डे की जमीन
भैसाली अड्डे का क्षेत्रफल 11 हजार 671 वर्गमीटर
1952 से जमीन पर यूपी रोडवेज काबिज
मेरठ कार्यशाला का क्षेत्रफल 13 हजार 430 वर्गमीटर
सोहराबगेट डिपो की स्थापना वर्ष 1978
सोहराबगेट बस अड्डे का क्षेत्रफल 4 हजार 954 वर्गमीटर
सोहराबगेट कार्यशाला का क्षेत्रफल 12 हजार 733 वर्गमीटर
दोनों बस अड्डों से संचालित बसें करीब 650
भैसाली अड्डे के यात्रियों की संख्या करीब 60 हजार प्रतिदिन
सोहरागेट अड्डे के यात्रियों की संख्या करीब 12 हजार प्रतिदिन
दोनों बस अड्डों को निगम मुख्यालय द्वारा ‘ए’ श्रेणी में रखा गया है।
बस अड्डे पर स्थायी नहीं बल्कि अस्थायी निर्माण किया जा रहा है। बस अड्डे की चारदीवारी करके मिट्टी से भराव किया जा रहा है, ताकि जल भराव न हो। टिन शेड में यात्रियों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। खुले मैदान से ही बसों का संचालन किया जाएगा। बाकी एनजीटी को जो भी निर्देश होगा उसे माना जाएगा। एसके बनर्जी, आरएम रोडवेज रीजन मेरठ
खास बात
आज होगी एनजीटी में मामले की सुनवाई, सभी पक्ष कोर्ट में दाखिल कर चुके हैं अपना जवाब
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रोडवेज का भैसाली व सोहराबगेट बस अड्डा शहर के बीचों बीच हैं। इन अड्डों से संचालित होने वाली हजारों बसों के चलते जहां शहर में जाम लगता है तो वहीं वायु व ध्वनि प्रदूषण का भी स्तर बढ़ रहा है। मास्टर प्लान में बस अड्डों का बाहर करने के प्रस्ताव पर अमल नहीं होनेे और रोडवेज के ढुलमुल रवैये के चलते आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने मामले को लेकर एनजीटी का दरवाजा खटखटाया था। इस पर एनजीटी ने रोडवेज, एमडीए, वन व पर्यावरण विभाग के अलावा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पार्टी बनाते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। कई बार लगी तारीखों में सभी पक्षों ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। अब मामले में दोनों पक्षों की बहस होनी है। इस सबके बावजूद भैसाली बस अड्डे की गिराई गई पुरानी जर्जर बिल्डिंग के निर्माण के लिए स्वीकृत हुए पांच करोड़ रुपये भी अड्डे के निर्माण पर खर्च किए जा रहे हैं।
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मास्टर प्लान में शहर से बाहर किए जाने है बस अड्डे
एमडीए के मास्टर प्लान में बस अड्डों को शहर से बाहर किया जाना प्रस्तावित है। लेकिन अभी तक इस दिशा में गंभीरता से काम नहीं हो पाया है। भैसाली बस अड्डे पर रोडवेज का मालिकाना हक को भी लेकर विवाद है। जमीन पर कैंट बोर्ड और राजस्व विभाग अपना हक जताते आए हैं। अड्डे पर चल रहे निर्माण के लिए भी एमडीए से स्वीकृति नहीं ली गई है।
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1934 में कैंट बोर्ड ने प्रदेश सरकार को दी भैसाली अड्डे की जमीन
भैसाली अड्डे का क्षेत्रफल 11 हजार 671 वर्गमीटर
1952 से जमीन पर यूपी रोडवेज काबिज
मेरठ कार्यशाला का क्षेत्रफल 13 हजार 430 वर्गमीटर
सोहराबगेट डिपो की स्थापना वर्ष 1978
सोहराबगेट बस अड्डे का क्षेत्रफल 4 हजार 954 वर्गमीटर
सोहराबगेट कार्यशाला का क्षेत्रफल 12 हजार 733 वर्गमीटर
दोनों बस अड्डों से संचालित बसें करीब 650
भैसाली अड्डे के यात्रियों की संख्या करीब 60 हजार प्रतिदिन
सोहरागेट अड्डे के यात्रियों की संख्या करीब 12 हजार प्रतिदिन
दोनों बस अड्डों को निगम मुख्यालय द्वारा ‘ए’ श्रेणी में रखा गया है।
बस अड्डे पर स्थायी नहीं बल्कि अस्थायी निर्माण किया जा रहा है। बस अड्डे की चारदीवारी करके मिट्टी से भराव किया जा रहा है, ताकि जल भराव न हो। टिन शेड में यात्रियों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। खुले मैदान से ही बसों का संचालन किया जाएगा। बाकी एनजीटी को जो भी निर्देश होगा उसे माना जाएगा। एसके बनर्जी, आरएम रोडवेज रीजन मेरठ
खास बात
आज होगी एनजीटी में मामले की सुनवाई, सभी पक्ष कोर्ट में दाखिल कर चुके हैं अपना जवाब