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घोषणा नहीं होने पर प्रत्याशियों में बढ़ी बैचेनी
Updated Mon, 30 Oct 2017 08:50 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सरूरपुर।
निकाय चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया के दो दिन गुजर चुके हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक दल द्वारा अध्यक्ष पद पर अब तक प्रत्याशी की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में दावेदारों की बेचैनी दिखाई पड़ रही है। हालांकि मतदाता यह जानने को बेताब हैं कि कौन सी पार्टी किसको प्रत्याशी घोषित करेगी। ऐसे में सभी दावेदार खुद को राजनीतिक पार्टी का प्रत्याशी मानकर चुनाव प्रचार में जुटे हैं।
पहली बार हर्रा और खिवाई को नगर पंचायत का दर्जा मिला है। वहीं, निकाय चुनाव की घोषणा होने के बाद से दोनों कस्बों में चेयरमैन और सदस्यों पद को लेकर लोगों को काफी उत्साह है। वहीं, संवेदनशील माने जाने वाली नगर पंचायत करनावल में भी प्रत्याशियों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। ऐसे में तीनों नगर पंचायतों के दावेदार राजनीतिक पार्टी का सिंबल हासिल करने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। वहीं, आवेदकों की संख्या अधिक होने पर राजनीतिक दल भी कस्बों के सियासी समीकरणों को समझकर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। समाजवादी पार्टी, भाजपा, बसपा और रालोद ने हर्रा, करनावल और खिवाई के लिए अभी तक अधिकृत रूप से प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। फिर भी नगरवासियों को संभावितों के संकेत मिल रहे हैं। तीनों नगर पंचायतों में जातीय समीकरण पर चुनाव होने की प्रबल संभावना बनी हुई है। नई नगर पंचायत हर्रा और खिवाई मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। हालांकि करनावल में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका निर्णायक रहेगी। हर्रा और खिवाई में अध्यक्ष पद अनारक्षित होने के कारण चुनावी मुकाबला रोमांचक होगा। हर्रा और खिवाई में निर्वाचित ग्राम प्रधान की स्थिति पर ही चेयरपर्सन चुनाव टिका हुआ है। ग्राम प्रधान के चुनाव लड़ चुके लोग एक बार फिर से मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतर रहे हैं।
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सरूरपुर।
निकाय चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया के दो दिन गुजर चुके हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक दल द्वारा अध्यक्ष पद पर अब तक प्रत्याशी की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में दावेदारों की बेचैनी दिखाई पड़ रही है। हालांकि मतदाता यह जानने को बेताब हैं कि कौन सी पार्टी किसको प्रत्याशी घोषित करेगी। ऐसे में सभी दावेदार खुद को राजनीतिक पार्टी का प्रत्याशी मानकर चुनाव प्रचार में जुटे हैं।
पहली बार हर्रा और खिवाई को नगर पंचायत का दर्जा मिला है। वहीं, निकाय चुनाव की घोषणा होने के बाद से दोनों कस्बों में चेयरमैन और सदस्यों पद को लेकर लोगों को काफी उत्साह है। वहीं, संवेदनशील माने जाने वाली नगर पंचायत करनावल में भी प्रत्याशियों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। ऐसे में तीनों नगर पंचायतों के दावेदार राजनीतिक पार्टी का सिंबल हासिल करने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। वहीं, आवेदकों की संख्या अधिक होने पर राजनीतिक दल भी कस्बों के सियासी समीकरणों को समझकर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। समाजवादी पार्टी, भाजपा, बसपा और रालोद ने हर्रा, करनावल और खिवाई के लिए अभी तक अधिकृत रूप से प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। फिर भी नगरवासियों को संभावितों के संकेत मिल रहे हैं। तीनों नगर पंचायतों में जातीय समीकरण पर चुनाव होने की प्रबल संभावना बनी हुई है। नई नगर पंचायत हर्रा और खिवाई मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। हालांकि करनावल में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका निर्णायक रहेगी। हर्रा और खिवाई में अध्यक्ष पद अनारक्षित होने के कारण चुनावी मुकाबला रोमांचक होगा। हर्रा और खिवाई में निर्वाचित ग्राम प्रधान की स्थिति पर ही चेयरपर्सन चुनाव टिका हुआ है। ग्राम प्रधान के चुनाव लड़ चुके लोग एक बार फिर से मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतर रहे हैं।
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