{"_id":"599751f84f1c1b72658b4b2c","slug":"150308916313-laward-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सारी बस्ती को बहाकर जब से पानी ले गया, लोग डरने लगे काली घटा देखकर--डा. हसरत कुरैशी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सारी बस्ती को बहाकर जब से पानी ले गया, लोग डरने लगे काली घटा देखकर--डा. हसरत कुरैशी
Updated Sat, 19 Aug 2017 02:15 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मदरसे में स्वतंत्रता दिवस पर मुशायरे का आयोजन
कार्यक्रम में लोगों ने लिया बढ़ चढ़कर हिस्सा
अमर उजाला ब्यूरो
दौराला।
मदरसा इसलामिया में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया गया। इस दौरान कवियों ने अपने शब्दों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुशायरा और कवि सम्मेलन का उद्घाटन चौधरी अनिल अहलावत और सरधना के पूर्व चेयरमैन असद गालिब ने संयुक्त रुप से शमा रोशन कर किया। कार्यक्रम रात दस बजे से शुरू होकर सुबह साढे़ तीन बजे तक चला। सम्मेलन की शुरूआत में डॉ. हसरत ने कहा किस कदर मिलता है आराम मदीने वाले, आपका लेता हूं जब नाम मदीने वाले। लावड़ के शायर यूनुस वफा ने कहा कि संभाली आबरू हमने वतन को खून दे देकर। हमारे दम से ही अब तक ये हिंदुस्तान जिंदा है। पुष्पेंद्र बावरा ने कहा कि हमने सब कुछ लुटाया, वतन के लिए। खून हमने बहाया वतन के लिए। जीना मरना वतन के लिए बावरा। धरती मां ने सिखाया वतन के लिए। एचएम अजनबी ने कहा कि अन्न दाता, में उसे अजनबी कैसे कह दूं। छीन कर खा गया जो मुंह के निवाले मेरे। मौलाना नबील साहब ने फरमाया कि हर शख्स भी समझता खुद को हंसी बहुत। अच्छा हुआ जो आइना उनकी याद हो गया। कार्यक्रम में खुर्शीद हैदर मुज्जक नगरी, सुधीर अनुपम मेरठी, शमीम गाजी, गुलजार जिगर, हाजी परवेज आदि रहे।
विज्ञापन
कार्यक्रम में लोगों ने लिया बढ़ चढ़कर हिस्सा
अमर उजाला ब्यूरो
दौराला।
मदरसा इसलामिया में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया गया। इस दौरान कवियों ने अपने शब्दों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुशायरा और कवि सम्मेलन का उद्घाटन चौधरी अनिल अहलावत और सरधना के पूर्व चेयरमैन असद गालिब ने संयुक्त रुप से शमा रोशन कर किया। कार्यक्रम रात दस बजे से शुरू होकर सुबह साढे़ तीन बजे तक चला। सम्मेलन की शुरूआत में डॉ. हसरत ने कहा किस कदर मिलता है आराम मदीने वाले, आपका लेता हूं जब नाम मदीने वाले। लावड़ के शायर यूनुस वफा ने कहा कि संभाली आबरू हमने वतन को खून दे देकर। हमारे दम से ही अब तक ये हिंदुस्तान जिंदा है। पुष्पेंद्र बावरा ने कहा कि हमने सब कुछ लुटाया, वतन के लिए। खून हमने बहाया वतन के लिए। जीना मरना वतन के लिए बावरा। धरती मां ने सिखाया वतन के लिए। एचएम अजनबी ने कहा कि अन्न दाता, में उसे अजनबी कैसे कह दूं। छीन कर खा गया जो मुंह के निवाले मेरे। मौलाना नबील साहब ने फरमाया कि हर शख्स भी समझता खुद को हंसी बहुत। अच्छा हुआ जो आइना उनकी याद हो गया। कार्यक्रम में खुर्शीद हैदर मुज्जक नगरी, सुधीर अनुपम मेरठी, शमीम गाजी, गुलजार जिगर, हाजी परवेज आदि रहे।