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इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर के नाम पर 150 करोड़ रुपये खर्च, हालत दयनीय

Thu, 24 Nov 2016 02:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 24 Nov 2016 02:28 PM IST
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150 crore ki emergency
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
मेडिकल कॉलेज की अत्याधुनिक इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर के नाम पर 150 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, लेकिन इसके हालात किसी सीएचसी जैसे हैं। आलम यह है कि इमरजेंसी मरीजों को प्राथमिक उपचार देने की हालत में भी नहीं है। सभी सुविधाएं फाइलों में ही कैद हैं। कहने को इमरजेंसी में 21 बेड की आईसीयू यूनिट संचालित है, लेकिन दो-चार बेड पर ही वेंटिलेटर की सुविधा है। ईसीजी तक की मशीन भी उपलब्ध नहीं है।
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बड़े दावों के साथ शुरू की गई इमरजेंसी पर सरकार ने मोटा पैसा बहाया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी ट्रामा सेंटर में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा सुनिश्चित कराने के लिए 21 बेड तक दिए। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के कुछ नियम हैं जो खासकर इमरजेंसी व ट्रामा सेंटर में ट्रीटमेंट के लिए आवश्यक माने गए हैं। जैसे इमरजेंसी में सिटी स्कैन, ईसीजी, टीएमटी, पोर्टेबल एक्सरे मशीन की सुविधा 24 घंटे सुनिश्चित होनी चाहिये। एमसीआई के कोड के हिसाब इमरजेंसी के नक्शे में सिटी स्कैन के अलग से कमरा निर्धारित है। ईसीजी व टीएमटी के लिए भी अलग वार्ड है। लेकिन कोई भी मशीन इमरजेंसी में नहीं है। साथ ही पोर्टेबल एक्सरे मशीन अनिवार्य है, लेकिन जिस कंपनी को मशीन सप्लाई करने का टेंडर सौंपा गया था उसने किसी दूसरी कंपनी की एक्सरे मशीन पकड़ा दी, जिसे कॉलेज प्रशासन नहीं ले रहा है।
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बंदी पड़ी है लिफ्ट
इमरजेंसी में दो लिफ्ट लगाई गई हैं। गंभीर स्थिति में मरीज को वेंटिलेटर पर ले जाना पड़े तो उसे तत्काल स्ट्रेचर पर लेकर फर्स्ट फ्लोर स्थित आईसीयू वार्ड में शिफ्ट किया जा सके। लेकिन कोई सी भी लिफ्ट चालू नहीं है। ऐसे हालत में मरीज को आईसीयू में शिफ्ट करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
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बिन सुविधा नहीं चला सकते
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के मेडिकल कॉलेजों को सख्त निर्देश हैं कि बिना बुनियादी सुविधाओं के इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर को संचालित नहीं किया जा सकता है। इन दोनों के लिए सिटी स्कैन, ईसीजी, टीएमटी, पोर्टेबल एक्सरे मशीन की जरूरत होती है। लेकिन मेडिकल कॉलेज में इनकी सुविधा अभी तक नहीं मिल रही है। नियम विरुद्ध इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर को संचालित किया जा रहा है।  


सभी वेंटिलेटर चालू नहीं
अभी तक चुनिंदा वेंटिलेटर को संचालित किया गया है। कॉलेज प्रशासन की तरफ से तर्क दिया जा रहा है कि वेंटिलेटर को संचालित करने के लिए 24 घंटे ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इसके लिए बड़ा प्लांट होना जरूरी है, जबकि अभी तक गैस सिलेंडर के जरिये ही सप्लाई हो रही है। ऐसे में जब तक गैस की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक चुनिंदा वेंटिलेटर को संचालित किया जाएगा।
 
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