ढाई करोड़ की बिजली पर डाका डाल रहे 15 हजार ई-रिक्शा
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शहर की यातायात जरूरतों और प्रदूषण से ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने पांच हजार ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन की अनुमति दी थी। इनमें 4935 ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन हुआ है। शहर में ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन बनाए जाने थे। पीवीवीएनएल ने पहल करते हुए यूनिवर्सिटी रोड स्थित 33 केवी बिजलीघर में चार्जिंग स्टेशन बनवाया था। तत्कालीन एमडी अभिषेक प्रकाश ने शुभारंभ किया था। यहां 50 रुपये प्रति ई-रिक्शा चार्जिंग शुल्क रखा गया। लेकिन उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने इस पर आपत्ति करते बंद करा दिया। इसके बाद से बिजली विभाग लगातार ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन बनाने के इच्छुक लोगों को कनेक्शन लेने के लिए आमंत्रित कर रहा है, लेकिन कोई आगे नहीं आया है।
चोरी की बिजली से हो रहे चार्ज
ई-रिक्शा सर्विस कामर्शियल गतिविधि के अंतर्गत आती है। इन्हें कामर्शियल कनेक्शन के जरिये ही चार्ज किया जा सकता है। लेकिन ई-रिक्शा मालिक अपने घरेलू कनेक्शन के जरिये ही इन्हें चार्ज कर रहे हैं या अवैध चार्जिंग स्टेशनों पर चोरी-छिपे चार्ज कराते हैं। यह धंधा लिसाड़ीगेट और नौचंदी थाना क्षेत्र में सर्वाधिक चल रहा है।
हर महीने ढाई करोड़ रुपये की बिजली पर डाका
ई-रिक्शा में 12-12 वोल्ट की 4 बैटरी (48 वोल्ट) होती हैं। इन्हें चार्ज करने के लिए कम से कम 10 से 12 घंटे का समय लगता है। इसमें करीब 8 यूनिट बिजली खर्च होती है। शहर में दौड़ रहे 15 हजार ई-रिक्शा प्रतिदिन करीब 1 लाख 20 हजार यूनिट बिजली खपत करते हैं, जो 7 रुपये प्रति यूनिट की दर से 8 लाख 40 हजार रुपये बैठती है। यानी हर महीने करीब ढाई करोड़ रुपये की बिजली चोरी हो रही है। यहां सवाल ये भी है कि जब ई रिक्शा चार्जिंग स्टेशन ही नहीं हैं, तो वैध वाले भी कहां चार्ज कराएं।
क्या बोले अधिकारी
ई-रिक्शा को घरेलू कनेक्शन से चार्ज नहीं किया जा सकता। जो ऐसा करता पकड़ा जाता है, उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है। नियम-शर्त पूरी कर कोई भी चार्जिंग स्टेशन का कनेक्शन ले सकता है।- संजीव राणा, अधीक्षण अभियंता मेरठ शहर