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ग्रामीणों ने गेहूं पकड़ा, सरकारी होना बताया
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कंकरखेड़ा। भोला रोड पर ट्रैक्टर-ट्रॉली में लदे गेहूं को लेकर विवाद हो गया। प्रधान व ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गेहूं सरकारी राशन का है। जबकि राशन डीलर ने दावा किया कि यह अनाज उसके खेतों की फसल का है। खाद्य निरीक्षक ने गेहूं को सील कर उसकी रिपोर्ट एसडीएम को भेज दी।
पुलिस के अनुसार जानी थाना क्षेत्र निवासी राशन डीलर सुरेंद्र की गांव में सस्ते गल्ले की दुकान है। वह सोमवार सुबह करीब 10 बजे ट्रैक्टर ट्रॉली में बोरियों में गेहूं ले जा रहा था। इस दौरान ग्राम प्रधान राजीव कुमार और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह अनाज सरकारी राशन का है, जिसे बेचने के लिए ले जाया जा रहा है। वहीं, राशन डीलर का कहना था कि यह गेहूं उसकी अपने खेतों की फसल का है, जिसे शहर में बेचने के लिए ले जाया जा रहा है। सूचना पर इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा और खाद्य निरीक्षक शिखा पांडे ने मौके पर पहुंचकर गेहूं कब्जे में ले लिया। मामला थाने पहुंचा तो राशन डीलर ने बताया कि उसकी करीब 20 बीघा जमीन है। जिसमें उसने गेहूं की फसल बोई थी। फसल की कटाई चल रही है। यह उसी का गेहूं है। इस पर प्रधान ने तर्क दिया कि यदि यह फसल का गेहूं है तो फिर जिन बोरों में गेहूं भरा है, उन पर सरकारी राशन का मार्का क्यों लगा है। फूड इंस्पेक्टर शिखा पांडे का कहना है कि एसडीएम ही तय करेंगे कि यह सरकारी राशन है या फिर फसल का गेहूं है। उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा के अनुसार फिलहाल राशन डीलर को छोड़ दिया है। लेकिन ट्रैक्टर ट्रॉली व गेहूं को कब्जे में लिया गया है।
जल्द निर्णय लेंगे
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि गेहूं सरकारी राशन का है या फसल का।फूड इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।
-कमलेश गोयल, एसडीएम
पुलिस के अनुसार जानी थाना क्षेत्र निवासी राशन डीलर सुरेंद्र की गांव में सस्ते गल्ले की दुकान है। वह सोमवार सुबह करीब 10 बजे ट्रैक्टर ट्रॉली में बोरियों में गेहूं ले जा रहा था। इस दौरान ग्राम प्रधान राजीव कुमार और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह अनाज सरकारी राशन का है, जिसे बेचने के लिए ले जाया जा रहा है। वहीं, राशन डीलर का कहना था कि यह गेहूं उसकी अपने खेतों की फसल का है, जिसे शहर में बेचने के लिए ले जाया जा रहा है। सूचना पर इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा और खाद्य निरीक्षक शिखा पांडे ने मौके पर पहुंचकर गेहूं कब्जे में ले लिया। मामला थाने पहुंचा तो राशन डीलर ने बताया कि उसकी करीब 20 बीघा जमीन है। जिसमें उसने गेहूं की फसल बोई थी। फसल की कटाई चल रही है। यह उसी का गेहूं है। इस पर प्रधान ने तर्क दिया कि यदि यह फसल का गेहूं है तो फिर जिन बोरों में गेहूं भरा है, उन पर सरकारी राशन का मार्का क्यों लगा है। फूड इंस्पेक्टर शिखा पांडे का कहना है कि एसडीएम ही तय करेंगे कि यह सरकारी राशन है या फिर फसल का गेहूं है। उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा के अनुसार फिलहाल राशन डीलर को छोड़ दिया है। लेकिन ट्रैक्टर ट्रॉली व गेहूं को कब्जे में लिया गया है।
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जल्द निर्णय लेंगे
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि गेहूं सरकारी राशन का है या फसल का।फूड इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।
-कमलेश गोयल, एसडीएम