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शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण में केवल 1400 लोगों ने ही दी राय
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शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण में केवल 1400 लोगों ने ही दी राय
मेरठ। स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर के केवल 1400 लोगों ने ही अपनी राय दी है। सर्वेक्षण का परिणाम फरवरी के अंतिम सप्ताह में जारी किए जाने का अनुमान है।
केंद्र सरकार स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए सभी निगम क्षेत्रों में जनता से राय ले रही थी। इसके लिए सरकार ने 31 जनवरी तक का समय दिया था। बृहस्पतिवार को सर्वे का समय खत्म हो गया। मेरठ नगर निगम क्षेत्र के केवल 1400 लोगों ने ही अपनी राय दे सके, जबकि मेरठ छावनी परिषद के 9700 लोगों ने अपनी ओपिनियन दी। यह परीक्षा 1200 नंबर की है। जनता की राय के आधार पर ही मेरठ को स्वच्छता सर्वेक्षण की सूची में स्थान मिलना है। गंभीर बात ये है कि कैंट में कम आबादी रहती है, जबकि शहर में उससे कई गुना ज्यादा आबादी निवास करती है। लेकिन शहर पिछड़ गया। वहीं गाजियाबाद की जागरूक जनता की बात की जाए, तो वहां 34 हजार लोग इस सर्वेक्षण का हिस्सा बन चुके हैं।
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मेरठ। स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर के केवल 1400 लोगों ने ही अपनी राय दी है। सर्वेक्षण का परिणाम फरवरी के अंतिम सप्ताह में जारी किए जाने का अनुमान है।
केंद्र सरकार स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए सभी निगम क्षेत्रों में जनता से राय ले रही थी। इसके लिए सरकार ने 31 जनवरी तक का समय दिया था। बृहस्पतिवार को सर्वे का समय खत्म हो गया। मेरठ नगर निगम क्षेत्र के केवल 1400 लोगों ने ही अपनी राय दे सके, जबकि मेरठ छावनी परिषद के 9700 लोगों ने अपनी ओपिनियन दी। यह परीक्षा 1200 नंबर की है। जनता की राय के आधार पर ही मेरठ को स्वच्छता सर्वेक्षण की सूची में स्थान मिलना है। गंभीर बात ये है कि कैंट में कम आबादी रहती है, जबकि शहर में उससे कई गुना ज्यादा आबादी निवास करती है। लेकिन शहर पिछड़ गया। वहीं गाजियाबाद की जागरूक जनता की बात की जाए, तो वहां 34 हजार लोग इस सर्वेक्षण का हिस्सा बन चुके हैं।