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जिला अस्पताल की खबर
Updated Mon, 15 Jan 2018 02:37 AM IST
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मेरठ। जिला अस्पताल में जल्द ही मरीजों के इलाज का पूरा ब्योरा एक क्लिक पर सामने होगा। यहां ई-हॉस्पिटल व्यवस्था शुरू करने की कवायद चल रही है, जो करीब 80 फीसदी पूरी हो चुकी है। जिला अस्पताल प्रबंधन जनवरी के आखिरी सप्ताह या फरवरी के पहले सप्ताह तक इसे शुरू करने की बात कह रहा है।
ई-हॉस्पिल व्यवस्था लागू होने से देशभर के सभी सरकारी अस्पताल एक दूसरे से जुड़ जाएंगे। रेफर कर मरीज ले जाते समय तीमारदारों को रिफरेंस स्लिप और जांच रिपोर्ट दी जाती है। भर्ती फाइल (बीएचटी) नहीं दी जाती है, जिससे पता नहीं चल पाता कि मरीजों की क्या स्थिति रही और क्या-क्या इलाज चला। इसी के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने ई-हॉस्पिटल व्यवस्था शुरू की है। जिला अस्पताल की ओपीडी में हर रोज 1500-2000 मरीज आते हैं। महीने में इनकी तादाद 40 से 50 हजार के पार पहुंच जाती है। हॉस्पिटल इंफोर्मेशन सिस्टम (एचआईएस) शुरू होने के बाद किसी भी मरीज के ओपीडी या इमरजेंसी में आते ही उसे पंजीकरण नंबर मिलेगा और उसका कार्ड बनेगा। कार्ड पर लिखे पंजीकरण नंबर के आधार पर उसका जो भी इलाज होगा और जो जांचें होंगी, उसका विस्तृत ब्योरा उसी पंजीकरण नंबर से कंप्यूटर में बनी फाइल में दर्ज किया जाता रहेगा। कोई भी डॉक्टर कंप्यूटर पर किसी भी मरीज का पंजीकरण नंबर डालकर स्क्रीन पर पूरी फाइल देख सकेंगे और भविष्य में बेहतर इलाज भी कर सकेंगे। इससे अस्पताल में शोध कार्यों को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मरीजों और उनके तीमारदारों को फाइल लेकर डॉक्टरों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके लिए अस्पताल की इमरजेंसी, ओपीडी और वार्डों आदि में कंप्यूटर और प्रिंटर लगेंगे। सर्वरों के माध्यम से इन कंप्यूटरों आपस में जोड़ा जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था भी रहेगी पुख्ता
जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता करने की तैयारी है। इसके तहत शासन से 40 सुरक्षाकर्मियों की मांग की गई है। साथ ही फायर फाइटिंग सिस्टम लगवाने, वार्डों में टीवी और एयरकंडीशनर लगवाने की भी मांग की गई है।
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जिला अस्पताल में बेहतर इलाज देने के उद्देश्य से ई-हॉस्पिटल व्यवस्था लागू करने की तैयारी का 80 से 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इस व्यवस्था से मरीजों, तीमारदारों और डॉक्टरों को सुविधा होगी। -डॉ. पीके बंसल, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल
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ई-हॉस्पिल व्यवस्था लागू होने से देशभर के सभी सरकारी अस्पताल एक दूसरे से जुड़ जाएंगे। रेफर कर मरीज ले जाते समय तीमारदारों को रिफरेंस स्लिप और जांच रिपोर्ट दी जाती है। भर्ती फाइल (बीएचटी) नहीं दी जाती है, जिससे पता नहीं चल पाता कि मरीजों की क्या स्थिति रही और क्या-क्या इलाज चला। इसी के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने ई-हॉस्पिटल व्यवस्था शुरू की है। जिला अस्पताल की ओपीडी में हर रोज 1500-2000 मरीज आते हैं। महीने में इनकी तादाद 40 से 50 हजार के पार पहुंच जाती है। हॉस्पिटल इंफोर्मेशन सिस्टम (एचआईएस) शुरू होने के बाद किसी भी मरीज के ओपीडी या इमरजेंसी में आते ही उसे पंजीकरण नंबर मिलेगा और उसका कार्ड बनेगा। कार्ड पर लिखे पंजीकरण नंबर के आधार पर उसका जो भी इलाज होगा और जो जांचें होंगी, उसका विस्तृत ब्योरा उसी पंजीकरण नंबर से कंप्यूटर में बनी फाइल में दर्ज किया जाता रहेगा। कोई भी डॉक्टर कंप्यूटर पर किसी भी मरीज का पंजीकरण नंबर डालकर स्क्रीन पर पूरी फाइल देख सकेंगे और भविष्य में बेहतर इलाज भी कर सकेंगे। इससे अस्पताल में शोध कार्यों को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मरीजों और उनके तीमारदारों को फाइल लेकर डॉक्टरों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके लिए अस्पताल की इमरजेंसी, ओपीडी और वार्डों आदि में कंप्यूटर और प्रिंटर लगेंगे। सर्वरों के माध्यम से इन कंप्यूटरों आपस में जोड़ा जाएगा।
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सुरक्षा व्यवस्था भी रहेगी पुख्ता
जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता करने की तैयारी है। इसके तहत शासन से 40 सुरक्षाकर्मियों की मांग की गई है। साथ ही फायर फाइटिंग सिस्टम लगवाने, वार्डों में टीवी और एयरकंडीशनर लगवाने की भी मांग की गई है।
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जिला अस्पताल में बेहतर इलाज देने के उद्देश्य से ई-हॉस्पिटल व्यवस्था लागू करने की तैयारी का 80 से 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इस व्यवस्था से मरीजों, तीमारदारों और डॉक्टरों को सुविधा होगी। -डॉ. पीके बंसल, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल