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मेरठ के केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान पर दूसरों की नजर
Updated Sat, 05 Aug 2017 02:48 AM IST
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केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान पर दूसरों की नजर
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
मिलिट्री फार्म बंद होने पर मेरठ में मौजूद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान भी यहां नहीं रहेगा। वजह यह संस्थान मिलिट्री फार्म की जमीन पर है। करीब दो साल पहले भी फार्म को बचाने की कवायद हुई थी। इसके लिए आसपास जमीन तलाश की जा रही थी। वह काम नहीं हो सका। इसलिए अब संकट है। पास के ही एक सांसद संस्थान को अपने यहां ले जाने की कवायद में जुट गए हैं। वह जमीन मुहैया कराने की बात कह रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय ने देश के 39 मिलिट्री फार्म को तीन माह के अंदर बंद करने का आदेश दिया है। इसमें मेरठ का भी मिलिट्री फार्म शामिल है। मिलिट्री फार्म में गाय पाली जाती हैं। जिससे फौजियों को दूध उपलब्ध कराया जाता है। सभी फार्म में फ्रीजवाल नस्ल की गाय हैं। यह नस्ल केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान मेरठ ने तैयार की हैं। दो साल पहले संस्थान के लिए सरधना क्षेत्र में 75 एकड़ जमीन तलाश की गई थी। तत्कालीन कृषि राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान के कार्यकाल में रक्षा संपदा विभाग ने भी जमीन देने की प्रक्रिया को लेकर पत्राचार किया था। मिलिट्री फार्म के रिसर्च स्कूल की जमीन भी देने की बात चली थी। यह योजनाएं परवान नहीं चढ़ सकी। अब मेरठ के पास के एक सांसद संस्थान को अपने क्षेत्र में ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने संस्थान से संपर्क कर जमीन दिलाने का आश्वासन दिया है। मेरठ के लिए यह क्षति होगी। गाय की नस्ल तैयार करने के अलावा संस्थान गाय की 53 नस्लों का टीका किसानों को उपलब्ध कराता है। आसपास के किसान टीका लेने संस्थान आते हैं। जिले और आसपास के कई गांवों को संस्थान ने गोद लिया हुआ है। 28 गांवों में संस्थान काम कर चुका है।
संस्थान यहीं रखने का होगा प्रयास : सांसद
मिलिट्री फार्म बंद करने के मामले पर सांसद राजेंद्र अग्रवाल का कहना है यह नीतिगत फैसला है। यहां मौजूद केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान को बंद न किया जाए। यह मेरठ में ही रहे इसका पूरा प्रयास किया जाएगा। वह जल्द ही इस बारे में रक्षा मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात करेंगे।
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खास--
1987 से मेरठ में गायों की नस्ल पर कर रहा शोध कार्य
मिलिट्री फार्म बंद होने पर संस्थान भी यहां नही बचेगा
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
मिलिट्री फार्म बंद होने पर मेरठ में मौजूद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान भी यहां नहीं रहेगा। वजह यह संस्थान मिलिट्री फार्म की जमीन पर है। करीब दो साल पहले भी फार्म को बचाने की कवायद हुई थी। इसके लिए आसपास जमीन तलाश की जा रही थी। वह काम नहीं हो सका। इसलिए अब संकट है। पास के ही एक सांसद संस्थान को अपने यहां ले जाने की कवायद में जुट गए हैं। वह जमीन मुहैया कराने की बात कह रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय ने देश के 39 मिलिट्री फार्म को तीन माह के अंदर बंद करने का आदेश दिया है। इसमें मेरठ का भी मिलिट्री फार्म शामिल है। मिलिट्री फार्म में गाय पाली जाती हैं। जिससे फौजियों को दूध उपलब्ध कराया जाता है। सभी फार्म में फ्रीजवाल नस्ल की गाय हैं। यह नस्ल केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान मेरठ ने तैयार की हैं। दो साल पहले संस्थान के लिए सरधना क्षेत्र में 75 एकड़ जमीन तलाश की गई थी। तत्कालीन कृषि राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान के कार्यकाल में रक्षा संपदा विभाग ने भी जमीन देने की प्रक्रिया को लेकर पत्राचार किया था। मिलिट्री फार्म के रिसर्च स्कूल की जमीन भी देने की बात चली थी। यह योजनाएं परवान नहीं चढ़ सकी। अब मेरठ के पास के एक सांसद संस्थान को अपने क्षेत्र में ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने संस्थान से संपर्क कर जमीन दिलाने का आश्वासन दिया है। मेरठ के लिए यह क्षति होगी। गाय की नस्ल तैयार करने के अलावा संस्थान गाय की 53 नस्लों का टीका किसानों को उपलब्ध कराता है। आसपास के किसान टीका लेने संस्थान आते हैं। जिले और आसपास के कई गांवों को संस्थान ने गोद लिया हुआ है। 28 गांवों में संस्थान काम कर चुका है।
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संस्थान यहीं रखने का होगा प्रयास : सांसद
मिलिट्री फार्म बंद करने के मामले पर सांसद राजेंद्र अग्रवाल का कहना है यह नीतिगत फैसला है। यहां मौजूद केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान को बंद न किया जाए। यह मेरठ में ही रहे इसका पूरा प्रयास किया जाएगा। वह जल्द ही इस बारे में रक्षा मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात करेंगे।
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खास--
1987 से मेरठ में गायों की नस्ल पर कर रहा शोध कार्य
मिलिट्री फार्म बंद होने पर संस्थान भी यहां नही बचेगा