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सरकार की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया ध्वस्त, हो रहा खेल
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ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में शुरू हुआ सांठगांठ का खेल
- डूडा के अधिकारियों ने मथुरा की वेबसाइट पर डालकर टेंडर खोले
- रि-टेंडर प्रक्रिया में भी सांठगांठ हुई उजागर
- 15 करोड़ से मलिन बस्तियों में होना है विकास कार्य
- साठगांठ के खेल में शहर का विकास हो रहा है लेट
मेरठ। विकास कार्यों के लिए निकाले जाने वाले टेंडरों से माफियागिरी खत्म करने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गयी ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अधिकारियों के हाथों में पहुंचते ही फेल गई। जहां सांठगांठ के खेल में टेंडर पूल कराकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है, वहीं ई-टेंडरिंग प्रक्रिया ध्वस्त करने के लिए प्रदेश के दूसरे जनपद की वेबसाइट पर टेंडर निकाले जा रहे हैं। इतना ही नहीं खेल में शामिल चंद ही चहेते लोगों को आधे से एक प्रतिशत के कम रेट पर टेंडर दिए जा रहे हैं। यह खेल डूडा में खुलकर सामने आया है। डूडा अधिकारी इसको व्यवस्था का हिस्सा बता रहे हैं
उप्र सरकार ने 15 करोड़ रुपया शहर की मलिन बस्तियों के विकास के लिए जारी किया। इसके लिए सरकार ने ठेकेदारों को ई-टेंडरिंग के माध्यम से जोड़ने का आदेश दिया। डूडा में उप्र सरकार के आदेश के अनुपालन के तहत ई-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन ठेकेदारों से साठगांठ करके ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में ही खेल कर दिया। यानी 15 करोड़ से होने वाले विकास कार्यों के प्रस्ताव के टेंडर मेरठ डूडा की वेबसाइट पर डालने की बजाय मथुरा की वेबसाइट पर डाल दिए गए। इतना ही नहीं टेंडर खोलने की पूरी प्रक्रिया भी कर दी। नगरायुक्त से लेकर डीएम तक ने भी स्वीकृति दे दी। हालांकि लगभग 50 कार्य ऐसे पकड़े गए जिनपर एक-एक ठेकेदार ने ही भाग लिया था। बताया जा रहा है कि डीएम के आदेश पर पिछले सप्ताह फिर से टेंडर निकाल दिए। इस बार पिछले फर्जीवाडे़ को दबाने के लिए डूडा ने मेरठ की वेबसाइट पर ही टेंडर निकाले। जानाकरी मिली है कि एक दिन पहले ही ये टेंडर भी खुल चुके हैं। कुछ ठेकेदारों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि जिन ठेकेदारों ने दिसंबर माह में हुई टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया था, उन्हीं ठेकेदारों को टेंडर मिले हैं।
शहर का विकास पूरी तरह रुका पड़ा है। वह भी आधे से एक प्रतिशत घाटे पर। जबकि दूसरे सभी विभागों में 10 से 30 प्रतिशत घाटे से टेंडर छूट रहे हैं। जिसका लाभ सरकार को पहुंचता है और अन्य विकास कार्य कराए जाते हैं।
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गलती से हुआ था
इस संबंध में पीओ डूडा आशीष गौड़ का कहना है कि गलती से मथुरा की वेबसाइट पर टेंडर डाले गए थे। इस बार मेरठ की वेबसाइट पर ही टेंडर डाले हैं। जिन ठेकेदारों को काम नहीं मिला है वह साठगांठ का आरोप लगा रहे हैं।
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- डूडा के अधिकारियों ने मथुरा की वेबसाइट पर डालकर टेंडर खोले
- रि-टेंडर प्रक्रिया में भी सांठगांठ हुई उजागर
- 15 करोड़ से मलिन बस्तियों में होना है विकास कार्य
- साठगांठ के खेल में शहर का विकास हो रहा है लेट
मेरठ। विकास कार्यों के लिए निकाले जाने वाले टेंडरों से माफियागिरी खत्म करने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गयी ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अधिकारियों के हाथों में पहुंचते ही फेल गई। जहां सांठगांठ के खेल में टेंडर पूल कराकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है, वहीं ई-टेंडरिंग प्रक्रिया ध्वस्त करने के लिए प्रदेश के दूसरे जनपद की वेबसाइट पर टेंडर निकाले जा रहे हैं। इतना ही नहीं खेल में शामिल चंद ही चहेते लोगों को आधे से एक प्रतिशत के कम रेट पर टेंडर दिए जा रहे हैं। यह खेल डूडा में खुलकर सामने आया है। डूडा अधिकारी इसको व्यवस्था का हिस्सा बता रहे हैं
उप्र सरकार ने 15 करोड़ रुपया शहर की मलिन बस्तियों के विकास के लिए जारी किया। इसके लिए सरकार ने ठेकेदारों को ई-टेंडरिंग के माध्यम से जोड़ने का आदेश दिया। डूडा में उप्र सरकार के आदेश के अनुपालन के तहत ई-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन ठेकेदारों से साठगांठ करके ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में ही खेल कर दिया। यानी 15 करोड़ से होने वाले विकास कार्यों के प्रस्ताव के टेंडर मेरठ डूडा की वेबसाइट पर डालने की बजाय मथुरा की वेबसाइट पर डाल दिए गए। इतना ही नहीं टेंडर खोलने की पूरी प्रक्रिया भी कर दी। नगरायुक्त से लेकर डीएम तक ने भी स्वीकृति दे दी। हालांकि लगभग 50 कार्य ऐसे पकड़े गए जिनपर एक-एक ठेकेदार ने ही भाग लिया था। बताया जा रहा है कि डीएम के आदेश पर पिछले सप्ताह फिर से टेंडर निकाल दिए। इस बार पिछले फर्जीवाडे़ को दबाने के लिए डूडा ने मेरठ की वेबसाइट पर ही टेंडर निकाले। जानाकरी मिली है कि एक दिन पहले ही ये टेंडर भी खुल चुके हैं। कुछ ठेकेदारों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि जिन ठेकेदारों ने दिसंबर माह में हुई टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया था, उन्हीं ठेकेदारों को टेंडर मिले हैं।
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शहर का विकास पूरी तरह रुका पड़ा है। वह भी आधे से एक प्रतिशत घाटे पर। जबकि दूसरे सभी विभागों में 10 से 30 प्रतिशत घाटे से टेंडर छूट रहे हैं। जिसका लाभ सरकार को पहुंचता है और अन्य विकास कार्य कराए जाते हैं।
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गलती से हुआ था
इस संबंध में पीओ डूडा आशीष गौड़ का कहना है कि गलती से मथुरा की वेबसाइट पर टेंडर डाले गए थे। इस बार मेरठ की वेबसाइट पर ही टेंडर डाले हैं। जिन ठेकेदारों को काम नहीं मिला है वह साठगांठ का आरोप लगा रहे हैं।