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नहीं हो सकेगी शुरुआत, अटक गई 150 करोड़ की सौगात
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मेडिकल कॉलेज का विकिरण लाइसेंस सस्पेंड
सुपर स्पेश्यलिटी में इंस्टाल नहीं हो सकेंगी मशीनें
25 या 27 फरवरी को शुरू करने की थी तैयारी
अरीश रिजवी
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल की शुरुआत अटक गई है। इसे इसी माह की 25 या 27 तारीख को शुरू करने की योजना थी, मगर बात नहीं बनी। इसकी कई वजह हैं। एक तो मेडिकल कॉलेज का विकिरण लाइसेंस सस्पेंड चल रहा है, जिस कारण विकिरण वाली कोई भी मशीन यहां इंस्टाल नहीं की जा सकती है, जिससे यहां एक्सरे, सीटी स्कैन और रेडियोथैरेपी आदि नहीं हो सकेंगी।
दूसरी वजह सुपर स्पेशयलिटी के बराबर वाली कार्यशाला की बिल्डिंग को अभी तक नहीं तोड़ा जा सका है, जबकि इसके टूटने के बाद ही इसे फायर ब्रिगेड की एनओसी मिल पाएगी। तीसरी वजह यह है कि जिस तरह से इसे बनाया गया है, उससे मेडिकल प्रबंधन पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हैं। ऑपरेशन थियेटर के बाहर वॉश बेसिन का न होना और चिकित्सा प्रभारी के लिए अलग से वॉश रूम की व्यवस्था भी नहीं की गई है। अस्पताल शुरू नहीं हो पाने से शासन नाराज है और अधिकारियों को उनके गुस्से का शिकार होना पड़ा है।
रद्द भी हो सकता है लाइसेंस
मेडिकल कॉलेज का विकिरण लाइसेंस पर रद्द होने का भी संकट मंडरा रहा है। रेडियोथेरेपी विभाग में कोबाल्ट 60 और सीजीएम 137 खराब पड़ा है, जिसका निस्तारण करना था। लेकिन दो साल से ज्यादा वक्त होने के बाद भी यह डिस्पोज नहीं किया गया है। इसी वजह से लाइसेंस सस्पेंड किया गया है। अगर इसी तरह इसका निस्तारण नहीं किया गया तो लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है। मेडिकल कॉलेज के विकिरण सुरक्षा अधिकारी डॉ. एकेतिवारी ने बताया कि अगर लाइसेंस रद्द हो गया तो मेडिकल कॉलेज में पहले से चल रही विकिरण संबंधी व्यवस्थाएं जैसे-एक्सरे, सीटी स्कैन, रेडियोथेरेपी और एन्जियोग्राफी आदि नहीं हो सकेंगी। एटॉमिक एनर्जी रेग्युलेट्री बोर्ड को पत्र लिखकर मोहलत मांगी गई थी, मगर अभी मोहलत नहीं मिली है।
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स्टाफ के रहने की व्यवस्था भी धड़ाम
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों और स्टाफ के लिए पूरी एक सोसायटी तैयार की जानी थी, जिसमें डेढ़ सौ से ज्यादा फ्लैट बनाए जाने थे, मगर अब यह योजना भी धड़ाम होती नजर आ रही है। इनमें विभाग प्रभारी चिकित्सकों के फोर बीएचके (चार कमरों वाले), थ्री बीएचके (तीन कमरों वाले) और दो बीएचके (दो कमरों वाले) फ्लैट तैयार करने थे। फिलहाल जैसे तैसे अस्पताल को शुरू करने की तैयारी है, इसके बाद भी बाकी व्यवस्था की जाएगी।
अस्पताल के चिकित्सक किए थे शामिल
इसे शुरू करने के लिए चिकित्सकों से आवेदन मांगे गए थे। दो चिकित्सक ने ज्वाइन कर लिया है। बाकी चार विशेषज्ञ चिकित्सक दो पीडियाट्रिक्स, एक रेडियोथेरेपिस्ट और एक न्यूरोलॉजिस्ट मेडिकल कॉलेज के ही इसमें शामिल किए गए हैं, लेकिन अब कई और वजहों से मामला अटकता जा रहा है।
जल्द शुरू होना है मुश्किल
सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल का जल्द शुरू होना बेहद मुश्किल है। शासन को भी इससे अवगत करा दिया गया है। इसे शुरू करने की पूरी कोशिश की गई, मगर कई वजहों से बात बनती नजर नहीं आ रही हैं।
- डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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सुपर स्पेश्यलिटी में इंस्टाल नहीं हो सकेंगी मशीनें
25 या 27 फरवरी को शुरू करने की थी तैयारी
अरीश रिजवी
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल की शुरुआत अटक गई है। इसे इसी माह की 25 या 27 तारीख को शुरू करने की योजना थी, मगर बात नहीं बनी। इसकी कई वजह हैं। एक तो मेडिकल कॉलेज का विकिरण लाइसेंस सस्पेंड चल रहा है, जिस कारण विकिरण वाली कोई भी मशीन यहां इंस्टाल नहीं की जा सकती है, जिससे यहां एक्सरे, सीटी स्कैन और रेडियोथैरेपी आदि नहीं हो सकेंगी।
दूसरी वजह सुपर स्पेशयलिटी के बराबर वाली कार्यशाला की बिल्डिंग को अभी तक नहीं तोड़ा जा सका है, जबकि इसके टूटने के बाद ही इसे फायर ब्रिगेड की एनओसी मिल पाएगी। तीसरी वजह यह है कि जिस तरह से इसे बनाया गया है, उससे मेडिकल प्रबंधन पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हैं। ऑपरेशन थियेटर के बाहर वॉश बेसिन का न होना और चिकित्सा प्रभारी के लिए अलग से वॉश रूम की व्यवस्था भी नहीं की गई है। अस्पताल शुरू नहीं हो पाने से शासन नाराज है और अधिकारियों को उनके गुस्से का शिकार होना पड़ा है।
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रद्द भी हो सकता है लाइसेंस
मेडिकल कॉलेज का विकिरण लाइसेंस पर रद्द होने का भी संकट मंडरा रहा है। रेडियोथेरेपी विभाग में कोबाल्ट 60 और सीजीएम 137 खराब पड़ा है, जिसका निस्तारण करना था। लेकिन दो साल से ज्यादा वक्त होने के बाद भी यह डिस्पोज नहीं किया गया है। इसी वजह से लाइसेंस सस्पेंड किया गया है। अगर इसी तरह इसका निस्तारण नहीं किया गया तो लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है। मेडिकल कॉलेज के विकिरण सुरक्षा अधिकारी डॉ. एकेतिवारी ने बताया कि अगर लाइसेंस रद्द हो गया तो मेडिकल कॉलेज में पहले से चल रही विकिरण संबंधी व्यवस्थाएं जैसे-एक्सरे, सीटी स्कैन, रेडियोथेरेपी और एन्जियोग्राफी आदि नहीं हो सकेंगी। एटॉमिक एनर्जी रेग्युलेट्री बोर्ड को पत्र लिखकर मोहलत मांगी गई थी, मगर अभी मोहलत नहीं मिली है।
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स्टाफ के रहने की व्यवस्था भी धड़ाम
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों और स्टाफ के लिए पूरी एक सोसायटी तैयार की जानी थी, जिसमें डेढ़ सौ से ज्यादा फ्लैट बनाए जाने थे, मगर अब यह योजना भी धड़ाम होती नजर आ रही है। इनमें विभाग प्रभारी चिकित्सकों के फोर बीएचके (चार कमरों वाले), थ्री बीएचके (तीन कमरों वाले) और दो बीएचके (दो कमरों वाले) फ्लैट तैयार करने थे। फिलहाल जैसे तैसे अस्पताल को शुरू करने की तैयारी है, इसके बाद भी बाकी व्यवस्था की जाएगी।
अस्पताल के चिकित्सक किए थे शामिल
इसे शुरू करने के लिए चिकित्सकों से आवेदन मांगे गए थे। दो चिकित्सक ने ज्वाइन कर लिया है। बाकी चार विशेषज्ञ चिकित्सक दो पीडियाट्रिक्स, एक रेडियोथेरेपिस्ट और एक न्यूरोलॉजिस्ट मेडिकल कॉलेज के ही इसमें शामिल किए गए हैं, लेकिन अब कई और वजहों से मामला अटकता जा रहा है।
जल्द शुरू होना है मुश्किल
सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल का जल्द शुरू होना बेहद मुश्किल है। शासन को भी इससे अवगत करा दिया गया है। इसे शुरू करने की पूरी कोशिश की गई, मगर कई वजहों से बात बनती नजर नहीं आ रही हैं।
- डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज