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आवास एवं विकास परिषद ने 27 करोड़ में खरीद ली विवादित जमीन
Updated Wed, 01 Aug 2018 02:17 AM IST
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आवास विकास ने 27 करोड़ में खरीद ली विवादित जमीन
मेरठ।
आवास एवं विकास परिषद ने जिस जमीन पर मालिकाना हक को लेकर कोर्ट में वाद चल रहा है, उस जमीन को 27 करोड़ रुपये में खरीद लिया। यही नहीं एक पक्ष द्वारा कोर्ट में चल रहे वाद की जानकारी देने के बावजूद इस जमीन पर आवासीय योजना निर्माण के लिए बाउंड्री आदि का काम भी शुरू करा दिया है। अब मामला फंसता नजर आ रहा है। हालांकि यह मामला जब जमीन खरीदने की तैयार की जा रही थी, तब भी विवादों में आया था।
लिसाड़ी गांव के पास आवास एवं विकास परिषद ने 53010 वर्ग मीटर जमीन 5100 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से वर्ष 2016 में सरोजबाला से खरीदी थी। इस जमीन के खरीदने का जब आवास एवं विकास परिषद द्वारा प्रशासन को प्रस्ताव दिया गया था, तो तब भी सवाल उठे थे। क्योंकि इसमें एक शासन स्तर के बड़े आला अधिकारी का हस्तक्षेप बताया जा रहा था। जो अपने रिश्तेदार की जमीन को महंगे दामों पर बिकवाना चाहते थे। जब यह प्रस्ताव भेजा गया था तो तत्कालीन जिलाधिकारी ने इसे लंबित कर दिया था। इसके बाद दूसरे जिलाधिकारी के आने पर इस जमीन के प्रस्ताव को आनन फानन में में हरी झंडी दी गई और जमीन न केवल आवास एवं विकास परिषद को बेच दी गई, बल्कि उसका तहसील से दाखिल खारिज कराकर आवास एवं विकास परिषद के नाम कर दिया गया।
लेकिन इस जमीन पर मालिकाना हक को लेकर सरोजबाला और अमित चौधरी के बीच सिविल जज जूनियर डिविजन के यहां वाद चल रहा था, जो आज भी चल रहा है। जमीन बिकने की प्रक्रिया के दौरान अजीत चौधरी द्वारा अपर जिलाधिकारी भूमि अध्यापित के यहां प्रार्थना पत्र दिया गया था। जिसमें कोर्ट में चल रहे वाद की जानकारी देते हुए जमीन विक्रय प्रस्ताव प्रक्रिया को रोकने की मांग की गई थी। लेकिन उनके प्रार्थना पत्र पर कोई सुनवाई नहीं हुई और जमीन को बेच दिया गया।
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अब जब जून माह में आवास एवं विकास परिषद ने इस जमीन पर आवासीय योजना निर्माण के लिए काम शुरू कराने से पहले बाउंड्री निर्माण का काम शुरू कराया और समाचार पत्रों में इसकी खबर प्रकाशित हुई तो अजीत चौधरी ने फिर से आवास एवं विकास परिषद में प्रत्यावेदन दिया। लेकिन आवास एवं विकास परिषद ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और काम जारी रखा। इस मामले में अब अजीत चौधरी द्वारा फिर से एक पत्र आवास एवं विकास परिषद को दिया गया है। जिसमें उन्होंने निर्माण जारी रखने को कोर्ट की अवमानना का मामला बताया है।
फंस सकता आवास एवं विकास परिषद
यदि कोर्ट का फैसला अजीत चौधरी के पक्ष में आ जाता है तो आवास एवं विकास परिषद फंस सकता है। क्योंकि जमीन खरीदने के लिए जब प्रक्रिया चल रही थी, तभी अजीत चौधरी द्वारा कोर्ट में चल रहे वाद की जानकारी आवास एवं विकास परिषद को दी गई थी। लेकिन परिषद ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया और सरोजबाला से जमीन खरीदते हुए भुगतान कर दिया।
सर्किल रेट 20 हजार करने की तैयारी
आवास एवं विकास परिषद की यह दूसरी सबसे छोटी योजना है। इस योजना को बिजली बंबा बाईपास पर नूरनगर हाल्ट के पास से कनेक्टिविटी देते हुए जोड़ने की कवायद है। ताकि हापुड़ रोड और दिल्ली रोड से आने वालों को यह योजना आकर्षित कर सके। इस योजना में सर्किल रेट भी 15 से 20 हजार के बीच तय करने की तैयारी है।
आवास एवं विकास परिषद के साथ ही प्रशासन को भी समय-समय पर पूरे मामले से अवगत कराया गया। लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। अब इस मामले को लेकर अवमानना का वाद दायर करेंगे। अजीत चौधरी
जमीन आवास एवं विकास परिषद के नाम पर दाखिल खारिज हो चुकी है और परिषद की संपत्ति है। मुझे किसी कोर्ट केस या आपत्ति की जानकारी नहीं है। एसपीएन सिंह, अधीक्षण अभियंता, आवास एवं विकास परिषद
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मेरठ।
आवास एवं विकास परिषद ने जिस जमीन पर मालिकाना हक को लेकर कोर्ट में वाद चल रहा है, उस जमीन को 27 करोड़ रुपये में खरीद लिया। यही नहीं एक पक्ष द्वारा कोर्ट में चल रहे वाद की जानकारी देने के बावजूद इस जमीन पर आवासीय योजना निर्माण के लिए बाउंड्री आदि का काम भी शुरू करा दिया है। अब मामला फंसता नजर आ रहा है। हालांकि यह मामला जब जमीन खरीदने की तैयार की जा रही थी, तब भी विवादों में आया था।
लिसाड़ी गांव के पास आवास एवं विकास परिषद ने 53010 वर्ग मीटर जमीन 5100 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से वर्ष 2016 में सरोजबाला से खरीदी थी। इस जमीन के खरीदने का जब आवास एवं विकास परिषद द्वारा प्रशासन को प्रस्ताव दिया गया था, तो तब भी सवाल उठे थे। क्योंकि इसमें एक शासन स्तर के बड़े आला अधिकारी का हस्तक्षेप बताया जा रहा था। जो अपने रिश्तेदार की जमीन को महंगे दामों पर बिकवाना चाहते थे। जब यह प्रस्ताव भेजा गया था तो तत्कालीन जिलाधिकारी ने इसे लंबित कर दिया था। इसके बाद दूसरे जिलाधिकारी के आने पर इस जमीन के प्रस्ताव को आनन फानन में में हरी झंडी दी गई और जमीन न केवल आवास एवं विकास परिषद को बेच दी गई, बल्कि उसका तहसील से दाखिल खारिज कराकर आवास एवं विकास परिषद के नाम कर दिया गया।
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लेकिन इस जमीन पर मालिकाना हक को लेकर सरोजबाला और अमित चौधरी के बीच सिविल जज जूनियर डिविजन के यहां वाद चल रहा था, जो आज भी चल रहा है। जमीन बिकने की प्रक्रिया के दौरान अजीत चौधरी द्वारा अपर जिलाधिकारी भूमि अध्यापित के यहां प्रार्थना पत्र दिया गया था। जिसमें कोर्ट में चल रहे वाद की जानकारी देते हुए जमीन विक्रय प्रस्ताव प्रक्रिया को रोकने की मांग की गई थी। लेकिन उनके प्रार्थना पत्र पर कोई सुनवाई नहीं हुई और जमीन को बेच दिया गया।
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अब जब जून माह में आवास एवं विकास परिषद ने इस जमीन पर आवासीय योजना निर्माण के लिए काम शुरू कराने से पहले बाउंड्री निर्माण का काम शुरू कराया और समाचार पत्रों में इसकी खबर प्रकाशित हुई तो अजीत चौधरी ने फिर से आवास एवं विकास परिषद में प्रत्यावेदन दिया। लेकिन आवास एवं विकास परिषद ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और काम जारी रखा। इस मामले में अब अजीत चौधरी द्वारा फिर से एक पत्र आवास एवं विकास परिषद को दिया गया है। जिसमें उन्होंने निर्माण जारी रखने को कोर्ट की अवमानना का मामला बताया है।
फंस सकता आवास एवं विकास परिषद
यदि कोर्ट का फैसला अजीत चौधरी के पक्ष में आ जाता है तो आवास एवं विकास परिषद फंस सकता है। क्योंकि जमीन खरीदने के लिए जब प्रक्रिया चल रही थी, तभी अजीत चौधरी द्वारा कोर्ट में चल रहे वाद की जानकारी आवास एवं विकास परिषद को दी गई थी। लेकिन परिषद ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया और सरोजबाला से जमीन खरीदते हुए भुगतान कर दिया।
सर्किल रेट 20 हजार करने की तैयारी
आवास एवं विकास परिषद की यह दूसरी सबसे छोटी योजना है। इस योजना को बिजली बंबा बाईपास पर नूरनगर हाल्ट के पास से कनेक्टिविटी देते हुए जोड़ने की कवायद है। ताकि हापुड़ रोड और दिल्ली रोड से आने वालों को यह योजना आकर्षित कर सके। इस योजना में सर्किल रेट भी 15 से 20 हजार के बीच तय करने की तैयारी है।
आवास एवं विकास परिषद के साथ ही प्रशासन को भी समय-समय पर पूरे मामले से अवगत कराया गया। लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। अब इस मामले को लेकर अवमानना का वाद दायर करेंगे। अजीत चौधरी
जमीन आवास एवं विकास परिषद के नाम पर दाखिल खारिज हो चुकी है और परिषद की संपत्ति है। मुझे किसी कोर्ट केस या आपत्ति की जानकारी नहीं है। एसपीएन सिंह, अधीक्षण अभियंता, आवास एवं विकास परिषद