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मुस्लिम परिवार को कांवड़ बनाने का हुनर विरासत में मिला
Updated Mon, 23 Jul 2018 02:12 AM IST
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तीन पीढ़ियों से कांवड़ बना रहा मुस्लिम परिवार
मेरठ। मेरठ का मुस्लिम परिवार तीन पीढ़ियों से हर वर्ष शिवरात्रि के अवसर पर शिव भक्तों के लिए आकर्षक छोटी और बड़ी कांवड़ बनाता आ रहा है। गुजरीबाजार बजाजा निवासी मो. शराफत एवं उनके भाई मो. ताज की बनियापाड़ में ताज फ्लावर डेकोरेटर्स के नाम से दुकान है। शिवरात्रि से एक महीने पहले से ये कांवड़ बनाने का काम करने लगते हैं।
उन्होंने बताया कि देश की आजादी से पहले से उनके परिवार के लोग ये काम कर रहे हैं। कांवड़ बनाने की शुरुआत जहूर अहमद ने की थी, इसके बाद अब्दुल रहीम को यह हुनर मिला और अब मो. शराफत एवं मो. ताज अपने परिवार के सदस्यों के साथ कांवड़ बना रहे हैं। मो. ताज ने बताया कि मेरठ में 10 फीट से लेकर 12-13 फीट ऊंची कांवड़ के फ्रेम (ढांचा) तैयार किए जा रहे हैं। जिसको वे 27 जुलाई को तीन ट्रकों में भरकर भीम गोडा, हरिद्वार के लिए ले जाएंगे। वहां इन्हें कांवड़ का रूप दिया जाएगा। जिसकी कीमत सात हजार से 20 हजार रुपये तक है। मो. ताज ने बताया कि इस काम में मो. शादान, मो.अबरार, जहीर आलम, राशिद आदि उनका साथ देते हैं। मो. शराफत ने बताया कि वह और उनके साथी जन्माष्टमी पर मंदिरों की सजावट, शोभायात्रा के लिए डोले और दशहरे पर रावण का पुतला भी बनाते हैं।
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मेरठ। मेरठ का मुस्लिम परिवार तीन पीढ़ियों से हर वर्ष शिवरात्रि के अवसर पर शिव भक्तों के लिए आकर्षक छोटी और बड़ी कांवड़ बनाता आ रहा है। गुजरीबाजार बजाजा निवासी मो. शराफत एवं उनके भाई मो. ताज की बनियापाड़ में ताज फ्लावर डेकोरेटर्स के नाम से दुकान है। शिवरात्रि से एक महीने पहले से ये कांवड़ बनाने का काम करने लगते हैं।
उन्होंने बताया कि देश की आजादी से पहले से उनके परिवार के लोग ये काम कर रहे हैं। कांवड़ बनाने की शुरुआत जहूर अहमद ने की थी, इसके बाद अब्दुल रहीम को यह हुनर मिला और अब मो. शराफत एवं मो. ताज अपने परिवार के सदस्यों के साथ कांवड़ बना रहे हैं। मो. ताज ने बताया कि मेरठ में 10 फीट से लेकर 12-13 फीट ऊंची कांवड़ के फ्रेम (ढांचा) तैयार किए जा रहे हैं। जिसको वे 27 जुलाई को तीन ट्रकों में भरकर भीम गोडा, हरिद्वार के लिए ले जाएंगे। वहां इन्हें कांवड़ का रूप दिया जाएगा। जिसकी कीमत सात हजार से 20 हजार रुपये तक है। मो. ताज ने बताया कि इस काम में मो. शादान, मो.अबरार, जहीर आलम, राशिद आदि उनका साथ देते हैं। मो. शराफत ने बताया कि वह और उनके साथी जन्माष्टमी पर मंदिरों की सजावट, शोभायात्रा के लिए डोले और दशहरे पर रावण का पुतला भी बनाते हैं।
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