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कड़ी धूप भी नहीं डिगा पाई अनुशासन
Updated Mon, 26 Feb 2018 02:36 AM IST
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तेज धूप भी नहीं डिगा पाई अनुशासन
मेरठ। राष्ट्रोदय कार्यक्रम के लिए रविवार सुबह पांच बजे ही स्वयं सेवकों का आना शुरू हो गया था। सुबह दस बजे कार्यक्रम स्थल पर स्वयंसेवक, पुलिस अधिकारी भ्रमण करते नजर आये। दोपहर एक बजे तक धूप तेज हो गई। मैदान में उड़ती रेत और तेज धूप से स्वयंसेवकों को परेशानी तो हुई, लेकिन वह अपनी जगह से हिले नहीं। जैसे लाइन बनाई गईं थीं उनमें स्वयं सेवक अपनी अपनी जगह बैठे रहे। खुद पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारी भी आपस में चर्चा करते रहे कि पहली बार इतने बड़े जनसमूह में ऐसा अनुशासन देखा।
खाने की व्यवस्था भी ठीक
कार्यक्रम में आए स्वयंसेवकों के लिए खाने की व्यवस्था भी ठीक रही। कार्यक्रम स्थल के बाहर जो कैंप बनाए गये थे, उनमें कार्यकर्ताओं के लिए एकत्र किए गये भोजन के पैकेट समय से मिले। पीने के पानी की व्यवस्था भी ऐसी थी कि जिससे किसी को कोई परेशानी नहीं हुई।
पुलिस फोर्स को समय से मिला भोजन
कार्यक्रम में करीब छह हजार पुलिस कर्मियों की ड्यूटी अलग-अलग स्थानों पर लगाई गई थी। ऐसे में भोजन की व्यवस्था संघ नेतृत्व ने ही की थी। जिन स्थानों पर पुलिस फोर्स या अधिकारियों की ड्यूटी थी, उन्हीं स्थानों पर गाड़ियों से भोजन के पैकेट और पानी की बोतल पहुंचाई जा रहीं थीं।
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मेरठ। राष्ट्रोदय कार्यक्रम के लिए रविवार सुबह पांच बजे ही स्वयं सेवकों का आना शुरू हो गया था। सुबह दस बजे कार्यक्रम स्थल पर स्वयंसेवक, पुलिस अधिकारी भ्रमण करते नजर आये। दोपहर एक बजे तक धूप तेज हो गई। मैदान में उड़ती रेत और तेज धूप से स्वयंसेवकों को परेशानी तो हुई, लेकिन वह अपनी जगह से हिले नहीं। जैसे लाइन बनाई गईं थीं उनमें स्वयं सेवक अपनी अपनी जगह बैठे रहे। खुद पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारी भी आपस में चर्चा करते रहे कि पहली बार इतने बड़े जनसमूह में ऐसा अनुशासन देखा।
खाने की व्यवस्था भी ठीक
कार्यक्रम में आए स्वयंसेवकों के लिए खाने की व्यवस्था भी ठीक रही। कार्यक्रम स्थल के बाहर जो कैंप बनाए गये थे, उनमें कार्यकर्ताओं के लिए एकत्र किए गये भोजन के पैकेट समय से मिले। पीने के पानी की व्यवस्था भी ऐसी थी कि जिससे किसी को कोई परेशानी नहीं हुई।
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पुलिस फोर्स को समय से मिला भोजन
कार्यक्रम में करीब छह हजार पुलिस कर्मियों की ड्यूटी अलग-अलग स्थानों पर लगाई गई थी। ऐसे में भोजन की व्यवस्था संघ नेतृत्व ने ही की थी। जिन स्थानों पर पुलिस फोर्स या अधिकारियों की ड्यूटी थी, उन्हीं स्थानों पर गाड़ियों से भोजन के पैकेट और पानी की बोतल पहुंचाई जा रहीं थीं।
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