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‘आयुष्मान’ की छाया में 12550 फर्जी लाभार्थी , फिर होगा सूची का सत्यापन

Sat, 28 Dec 2019 03:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा अरीश रिजवी, मेरठ
अरीश रिजवी, मेरठ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 28 Dec 2019 03:53 AM IST
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12550 fake beneficiaries under the shadow of Ayushman scheme 
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आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में एक और खुलासा हुआ है। 15 माह की जांच के बाद भी जिले के दो हजार 510 परिवारों के 12 हजार 550 लाभार्थी स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिल पाए हैं। इन्हें फर्जी तरीके से लाभार्थी बनाए जाने का शक है। इसकी सूचना शासन को भेजी गई है। अब फिर से इनका वेरिफिकेशन करने के निर्देश दिए गए हैं।

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जिले में दो लाख 11 हजार 416 परिवार चिह्नित हैं। इनमें 89 हजार 109 परिवार देहात और एक लाख 22 हजार 307 परिवार शहरी क्षेत्र के हैं। साल 2011 की आर्थिक गणना की सूची के आधार पर इसे तैयार किया गया है। योजना के तहत 1352 तरह की जांच और सर्जरी समेत पांच लाख रुपये तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी है। 
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शासन ने स्वास्थ्य विभाग को हिदायत दी थी कि आयुष्मान भारत के सभी लाभार्थियों का उनके पते पर वेरिफिकेशन होना है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार इसकी पड़ताल कर रही थी, लेकिन 2510 परिवार पते मिले ही नहीं। वहां कोई और रहता मिला या पता ही गलत पाया गया। दूसरी तरफ, एक लाख 19 हजार 683 लाभार्थी परिवारों के नौ लाख 37 हजार 397 लोगों के गोल्डन कार्ड भी अभी तक नहीं बन सके हैं। 
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इलाज के दौरान गोल्डन कार्ड का होना जरूरी है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को घर घर जाकर ‘पर्चा कार्ड’ देने की भी योजना थी, जो गोल्डन कार्ड की तरह ही स्वास्थ्य सेवा के लिए मान्य बताई गई थी। इसमें परिवार के मुखिया समेत परिवार के पांच सदस्यों का विवरण दर्ज था। लेकिन यह योजना भी धड़ाम हो गई है। 

सभी परिवारों तक इन्हें नहीं पहुंचाया जा सका है। इलाज के लिए यह मान्य भी नहीं हैं। आयुष्मान योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को हुई थी। इसमें फिलहाल 60 अस्पताल पंजीकृत हैं, जिनमें छह सरकारी और 54 निजी अस्पताल हैं।

शासन को भेजी गई सूचना
आयुष्मान के तहत पंजीकृत लाभार्थियों का वेरिफिकेशन किया गया तो उनमें दो हजार से ज्यादा लाभार्थियों केपते और नाम आदि गलत पाए गए हैं। शासन को इसकी सूचना दे दी गई है। अब फिर से इनका वेरिफिकेशन होगा। गोल्डन कार्ड के एक लिए एक जनवरी से अभियान शुरू होने वाला है, जो पूरे महीने चलेगा। - डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी


नए परिवारों को शामिल करने के लिए लिखा जाएगा पत्र
आशाओं को इन परिवारों को ढूंढने के लिए लगाया जाएगा। अगर ये परिवार दोबारा वेरिफिकेशन में भी नहीं मिलते हैं तो स्वास्थ्य विभाग नए परिवारों को इसमें शामिल करने के लिए पत्र लिखा जाएगा।

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