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यूपी: प्रदूषण से मिलेगी बड़ी राहत, यहां बॉयलर की भट्ठियों से तैयार हो रहा मावा

Mon, 04 Mar 2019 02:51 AM IST
कपिल kapil मोहम्मद शाह आलम, अमर उजाला, मेरठ
मोहम्मद शाह आलम, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 04 Mar 2019 02:51 AM IST
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Pollution will be relieved in UP and Mawa is being prepared from boilers furnaces
बॉयलर के माध्यम से तैयार होता मावा - फोटो : अमर उजाला

लकड़ी या कोयले से जलती भट्ठियों में तैयार होता मावा अब बीते जमाने की बात हो गई है। पर्यावरण प्रदूषण फैलाता भट्ठियों से निकलता काला धुआं, पसीने से तर-ब-तर कारीगर कुछ इस तरह का नजारा मावा तैयार करने वालों का रहता है, लेकिन अब मावा भूनने बनाने के लिए इस तरह के झंझट से छुटकारा मिलेगा। मामाल यूपी में मेरठ जिले के सरूरपुर थाना क्षेत्र का है।

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बॉयलर के माध्यम से अब पर्यावरण में फैलने वाले धुएं से छुटकारा दिलाया जाएगा। इससे यहां बिन आग के भाप की भट्ठियों पर मावा बनता दिखेगा। बॉयलर की भट्ठी से तैयार मावा एवं मिठाई की गुणवत्ता बिना धुएं, आग, डीजल की भट्ठियों तुलना में बेहतर होती है। इन भट्ठियों की गुणवत्ता को देखते हुए क्षेत्र के कई गांवों में मावे की भट्ठी चलाने वाले दुकानदार भाप वाली भट्ठी के प्रोजेक्ट को लगवाने में काफी रुचि ले रहे हैं। किसी तरह की आग धुआं होने के चलते कारीगर भी इन भट्ठियों पर काम करके खुश होंगे। गांव दमगढ़ी निवासी मावा भट्ठी संचालक शमीम त्यागी ने बताया कि डेढ़ से दो लाख रुपये की लागत से तैयार होने वाले बायलर भाप भट्ठी प्रोजेक्ट को लगवाने में लोगों का रूझान बढ़ा है। हालांकि अभी तक हरियाणा, दिल्ली, पंजाब में इस तकनीक का प्रयोग हुआ है। अब इसके फायदों को जानकर मावा भट्ठी संचालकों के साथ-साथ मिठाई की दुकानें चलाने वाले भी काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

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ऐसे करती है भाप भट्ठी काम
बॉयलर (भाप भट्ठी) में एक साइड पानी भरा होता है। बॉयलर के नीचे जरूरत अनुसार लकड़ी डालकर आग जलाई जाती है। बॉयलर से पानी की भाप बन पाइप के जरिए भट्ठियों तक पहुंची है। जहां बिना किसी आग धुएं के बड़ी-बड़ी कढ़ाइयों में मावा तैयार होता है। इतना ही नहीं जो लकड़ी बॉयलर में आग जलाने के लिए डाली जाती है। उससे भी बहुत थोड़ा धुआं निकलता है। बॉयलर के ऊपर लगी चिमनी के साथ पानी के टैंक में पहुंचने के बाद वह धुआं पानी में घुलकर खत्म हो जाता है। चिमनी के पाइप के बराबर धुआं बाहर निकलता है। इससे काफी हद तक पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलती है। बॉयलर ऑटोमेटिक काम करता है। इसमें लगा मीटर जरूरत अनुसार आगे भाप पहुंचाता है।

बॉयलर में किसी तरह की आग नहीं जलती। बायलर में लगे पानी के टैंक से आग के कारण पानी की भाप बन पाइपों के जरिए भट्ठियों तक पहुंचती है। खास बात यह है कि जिस बर्तन या कढ़ाई में मावा बनाया जाता है, वह बिलकुल भी गर्म नहीं होता है। इसके अंदर मौजूद दूध या अन्य खाद्य सामग्री में पूरा उबाल जाता है। बताया कि भाप भट्ठी पर तैयार मावे की गुणवत्ता स्वाद डीजल, गैस या कोयला भट्ठी पर तैयार मावे या मिठाई से कहीं अधिक बेहतर होती है। इस पर तैयार मिठाई का स्वाद घर में तैयार मावा या अन्य मिठाई की तरह होता है। दमगढ़ी गांव में बॉयलर का प्रोजेक्ट लगवाने वाले संचालक शमीम त्यागी ने बताया कि यह बॉयलर ऑटोमेटिक होता है। जरूरत अनुसार ही गर्म होता है। इसके बाद खुद ठंडा हो जाता है। जिस कारण इसके फटने या किसी हादसे का डर नहीं रहता है।

ऐसी तकनीक का प्रयोग कर प्रदूषण कम किया जा सकता है। अन्य भट्ठी संचालकों को ऐसी तकनीक का प्रयोग करने चाहिए। जिससे कारीगर के साथ-साथ आसपास के लोगों को प्रदूषण से मुक्ति मिल सके। - डॉ. ओपी जायसवाल, चिकित्सा प्रभारी, सीएचसी सरूरपुर

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