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ऑनलाइन में टॉप, ऑफलाइन में फ्लॉप
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ऑनलाइन में टॉप, ऑफलाइन में फ्लॉप होती पुलिसिंग
- ऑनलाइन की गईं शिकायतों पर तेजी से होती है कार्रवाई
- तहसील और थाना दिवस पर सुनवाई न होने से घटे फरियादी
- त्वरित परिणाम के लिए जनसुनवाई पोर्टल पर जा रहे हैं लोग
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायतों में पुलिसिंग टॉप तो ऑफलाइन में फ्लॉप हो रही है। यही वजह है कि तहसील और थाना दिवस पर समय से सुनवाई न होने के चलते फरियादियों का रुख ऑनलाइन शिकायत करने की तरफ ज्यादा है। एक बड़ी वजह यह भी है कि शासन से जुड़े पोर्टल पर की शिकायतों पर आला अधिकारी भी निगाह रखते हैं इसलिए यहां तेजी से निस्तारण होता है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मानते हैं तहसील और समाधान दिवस का हाल खराब है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
आईजीआरएस पोर्टल में 27 विभाग
प्रदेश सरकार द्वारा आईजीआरएस (समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली) को लागू किया गया था, जिसमें 27 विभागों से जुड़ी समस्याओं ( जमीनी विवाद, घरेलू व रंजिश समेत अन्य) के निस्तारण पर ध्यान रखा गया था। थाना स्तर से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी इन समस्याओं का निस्तारण करेंगे। शुरूआत में पोर्टल धीमी गति से चला। लेकिन अब इसका 100 फीसदी रिजल्ट दिया जा रहा है। समाधान करने के लिए आईजीआरएस से बेहतर दूसरा पोर्टल पुलिस प्रशासन अधिकारी भी नहीं मानते।
माह में करीब एक हजार शिकायतें
आईजीआरएस के नोडल अधिकारी (एसपी ट्रैफिक) संजीव वाजपेयी के अनुसार आईजीआरएस में एक महीने में करीब एक हजार शिकायतें आती हैं। इसका शत प्रतिशत रिजल्ट देना होता है। अनसुलझी शिकायतों का निस्तारण क्यों नहीं हुआ, इसका भी जिक्र पोर्टल में शिकायतकर्ता को दिया जाता है। आलम यह हो गया कि मंगलवार को तहसील दिवस और शनिवार को थाना समाधान दिवस में फरियादियों की संख्या बहुत कम होने लगी है।
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मैनुअल में क्यों फ्लॉप पुलिस
मैनुअल शिकायत का निस्तारण करने में पुलिस के फेल होने के कई कारण हैं। थानों में मैनुअल शिकायतों के निस्तारण के लिए पंचायत तक लगती है। पुलिस अधिकारी भी कहते है कि अगर ऑनलाइन की तरह पुलिस मैनुअल शिकायतों का भी गंभीरता से निस्तारण करे तो पुलिसिंग और अच्छी हो जाएगी। इसको देखते पुलिस अधिकारी ऑनलाइन सिस्टम पर ज्यादा फोकस कर रहे है, ताकि आम जनता को न्याय मिले और भ्रष्टाचार पर भी शिकंजा कसा जाए।
थाना दिवस में अधिकारी नहीं जाते
आईजीआरएस के बेहतर रिजल्ट के चलते थाना दिवस में पुलिस और प्रशासन के कई अधिकारी भी नहीं जाते। जबकि शासन के निर्देश हैं कि थाना दिवस पर सभी संबंधित विभागों के अधिकारी या प्रतिनिधि जाएंगे। हालत ये हो गई कि रोजाना की तरह थानेदार ही अकेले बैठकर थाना दिवस में शिकायत सुनते है। डीआईजी अखिलेश कुमार ने थाना दिवस पर तीन थानों का निरीक्षण किया, लेकिन वहां पर न फरियादी मिले और न अधिकारी।
आईजीआरएस में होता निस्तारण
थाना समाधान दिवस और तहसील दिवस में डीएम और एसएसपी को भी जाना होता है। दोनों अधिकारी सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक शिकायतें सुनते हैं। बीते मंगलवार को दोनों अधिकारी मवाना तहसील दिवस में पहुंचे थे। मात्र 20 फरियादी शिकायत लेकर आए। डीआईजी का कहना है कि तहसील और थाना दिवस का काम तो आईजीआरएस कर रहा है।
अपडेट मिलता है शिकायतकर्ता को
आईजीआरएस पर की जाने वाली शिकायतों के निस्तारण का अपडेट शिकायतकर्ता को एक सप्ताह में मिलता है। ऑनलाइन शिकायत करने वालों को पुलिस या प्रशासन के अधिकारियों के यहां जाने की जरूरत नहीं पड़ती। शिकायतकर्ता को यदि जांच रिपोर्ट पर आपत्ति है तो वह इसे दर्ज करा सकता है। शायद यही वजह है कि तहसील और समाधान दिवस पर शिकायतें काफी कम हो गई हैं।
मेरठ अव्वल है
आईजीआरएस पोर्टल की सारी शिकायतें सीसीटीएनएस (क्राइम कंट्रोल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम) से जुड़ी है। शिकायत ऑनलाइन आती हैं और उनका जवाब भी ऑनलाइन दिया जाता है। इसका रिजल्ट 100 फीसदी होता है। मेरठ इससे कई महीने से अव्वल आ रहा है।
- अखिलेश कुमार, डीआईजी
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- ऑनलाइन की गईं शिकायतों पर तेजी से होती है कार्रवाई
- तहसील और थाना दिवस पर सुनवाई न होने से घटे फरियादी
- त्वरित परिणाम के लिए जनसुनवाई पोर्टल पर जा रहे हैं लोग
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायतों में पुलिसिंग टॉप तो ऑफलाइन में फ्लॉप हो रही है। यही वजह है कि तहसील और थाना दिवस पर समय से सुनवाई न होने के चलते फरियादियों का रुख ऑनलाइन शिकायत करने की तरफ ज्यादा है। एक बड़ी वजह यह भी है कि शासन से जुड़े पोर्टल पर की शिकायतों पर आला अधिकारी भी निगाह रखते हैं इसलिए यहां तेजी से निस्तारण होता है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मानते हैं तहसील और समाधान दिवस का हाल खराब है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
आईजीआरएस पोर्टल में 27 विभाग
प्रदेश सरकार द्वारा आईजीआरएस (समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली) को लागू किया गया था, जिसमें 27 विभागों से जुड़ी समस्याओं ( जमीनी विवाद, घरेलू व रंजिश समेत अन्य) के निस्तारण पर ध्यान रखा गया था। थाना स्तर से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी इन समस्याओं का निस्तारण करेंगे। शुरूआत में पोर्टल धीमी गति से चला। लेकिन अब इसका 100 फीसदी रिजल्ट दिया जा रहा है। समाधान करने के लिए आईजीआरएस से बेहतर दूसरा पोर्टल पुलिस प्रशासन अधिकारी भी नहीं मानते।
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माह में करीब एक हजार शिकायतें
आईजीआरएस के नोडल अधिकारी (एसपी ट्रैफिक) संजीव वाजपेयी के अनुसार आईजीआरएस में एक महीने में करीब एक हजार शिकायतें आती हैं। इसका शत प्रतिशत रिजल्ट देना होता है। अनसुलझी शिकायतों का निस्तारण क्यों नहीं हुआ, इसका भी जिक्र पोर्टल में शिकायतकर्ता को दिया जाता है। आलम यह हो गया कि मंगलवार को तहसील दिवस और शनिवार को थाना समाधान दिवस में फरियादियों की संख्या बहुत कम होने लगी है।
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मैनुअल में क्यों फ्लॉप पुलिस
मैनुअल शिकायत का निस्तारण करने में पुलिस के फेल होने के कई कारण हैं। थानों में मैनुअल शिकायतों के निस्तारण के लिए पंचायत तक लगती है। पुलिस अधिकारी भी कहते है कि अगर ऑनलाइन की तरह पुलिस मैनुअल शिकायतों का भी गंभीरता से निस्तारण करे तो पुलिसिंग और अच्छी हो जाएगी। इसको देखते पुलिस अधिकारी ऑनलाइन सिस्टम पर ज्यादा फोकस कर रहे है, ताकि आम जनता को न्याय मिले और भ्रष्टाचार पर भी शिकंजा कसा जाए।
थाना दिवस में अधिकारी नहीं जाते
आईजीआरएस के बेहतर रिजल्ट के चलते थाना दिवस में पुलिस और प्रशासन के कई अधिकारी भी नहीं जाते। जबकि शासन के निर्देश हैं कि थाना दिवस पर सभी संबंधित विभागों के अधिकारी या प्रतिनिधि जाएंगे। हालत ये हो गई कि रोजाना की तरह थानेदार ही अकेले बैठकर थाना दिवस में शिकायत सुनते है। डीआईजी अखिलेश कुमार ने थाना दिवस पर तीन थानों का निरीक्षण किया, लेकिन वहां पर न फरियादी मिले और न अधिकारी।
आईजीआरएस में होता निस्तारण
थाना समाधान दिवस और तहसील दिवस में डीएम और एसएसपी को भी जाना होता है। दोनों अधिकारी सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक शिकायतें सुनते हैं। बीते मंगलवार को दोनों अधिकारी मवाना तहसील दिवस में पहुंचे थे। मात्र 20 फरियादी शिकायत लेकर आए। डीआईजी का कहना है कि तहसील और थाना दिवस का काम तो आईजीआरएस कर रहा है।
अपडेट मिलता है शिकायतकर्ता को
आईजीआरएस पर की जाने वाली शिकायतों के निस्तारण का अपडेट शिकायतकर्ता को एक सप्ताह में मिलता है। ऑनलाइन शिकायत करने वालों को पुलिस या प्रशासन के अधिकारियों के यहां जाने की जरूरत नहीं पड़ती। शिकायतकर्ता को यदि जांच रिपोर्ट पर आपत्ति है तो वह इसे दर्ज करा सकता है। शायद यही वजह है कि तहसील और समाधान दिवस पर शिकायतें काफी कम हो गई हैं।
मेरठ अव्वल है
आईजीआरएस पोर्टल की सारी शिकायतें सीसीटीएनएस (क्राइम कंट्रोल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम) से जुड़ी है। शिकायत ऑनलाइन आती हैं और उनका जवाब भी ऑनलाइन दिया जाता है। इसका रिजल्ट 100 फीसदी होता है। मेरठ इससे कई महीने से अव्वल आ रहा है।
- अखिलेश कुमार, डीआईजी