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शहर को गंदा करने में कैंट बोर्ड भी जिम्मेदार
Updated Wed, 05 Sep 2018 02:21 AM IST
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मेरठ को गंदा करने में कैंट बोर्ड भी जिम्मेदार
मेरठ। अपने मेरठ को गंदा करने में कैंट बोर्ड भी जिम्मेदार है। कैंट क्षेत्र से निकलने वाले सारे कूड़े को कर्मचारी जहां मौका मिलता है वहां पर फेंक देते हैं। अब्दुल्लापुर की जिस जमीन में कैंट बोर्ड कूड़ा फेंकने का दावा करता है वहां पर घास खड़ी हुई है। ऐसे में साफ हो गया है कि कैंट बोर्ड के कर्मचारी गांवड़ी और दूसरी जगहों पर कूड़ा फेंककर गंदगी फैला रहे हैं।
एक लाख की आबादी वाले कैंट क्षेत्र में आठ वार्ड हैं। पिछले कई साल से कैंट को देश की 56 छावनियों में सबसे स्मार्ट बनाने की कवायद की जा रही है। वहीं अगर यहां के कूड़े के बारे में पूछा जाए तो इसका जवाब किसी के पास नहीं है। आज तक किसी जन प्रतिनिधि ने भी इस समस्या को लेकर आवाज नहीं उठाई। ऐसे में यहां के कूड़े को शहर में कहीं भी फेंक दिया जाता है।
रोज होता है 50 टन से ज्यादा कचरा
कैंट क्षेत्र में रोजाना 50 टन से ज्यादा कूड़ा-कचरा निकलता है। कैंट क्षेत्र में इस कूड़े को एकत्र करने के लिए 20 बड़े कचरा घर बना रखे हैं। इस कचरे को कैंट बोर्ड की गाड़ियां भरकर परीक्षितगढ़ रोड पर ले जाती हैं। वहां इसे अब्दुल्लापुर में कहीं भी सड़क किनारे फेंक देते हैं। परीक्षितगढ़ रोड के लोगों ने बताया कि गांवड़ी गांव में भी कैंट बोर्ड की गाड़ियों को उन्होंने कूड़ा ले जाते हुए देखा है।
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अब्दुल्लापुर में फेंकने के हैं आदेश
कैंट बोर्ड के प्रवक्ता एमए जफर का कहना है कि सभी कर्मचारियों को कूड़ा अब्दुल्लापुर स्थित कैंट बोर्ड की जमीन में ही डालने के आदेश हैं, अगर कोई नहीं फेंक रहा है तो ये गंभीर है। मौके की रिपोर्ट मंगाकर सीईओ को देंगे। प्रवक्ता एमए जफर का कहना है कि कैंट बोर्ड अब्दुल्लापुर में 20 एकड़ जमीन पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने जा रहा है। साढ़े तीन करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट के लिए प्रारंभिक डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर ली गई है। सीईओ ने जल्द से जल्द फाइनल डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस प्लांट में रोजाना 40 से 50 टन के करीब कूड़े का निस्तारण किए जाने के बाद उससे ईंधन और खाद बनाई जाएगी।
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मेरठ। अपने मेरठ को गंदा करने में कैंट बोर्ड भी जिम्मेदार है। कैंट क्षेत्र से निकलने वाले सारे कूड़े को कर्मचारी जहां मौका मिलता है वहां पर फेंक देते हैं। अब्दुल्लापुर की जिस जमीन में कैंट बोर्ड कूड़ा फेंकने का दावा करता है वहां पर घास खड़ी हुई है। ऐसे में साफ हो गया है कि कैंट बोर्ड के कर्मचारी गांवड़ी और दूसरी जगहों पर कूड़ा फेंककर गंदगी फैला रहे हैं।
एक लाख की आबादी वाले कैंट क्षेत्र में आठ वार्ड हैं। पिछले कई साल से कैंट को देश की 56 छावनियों में सबसे स्मार्ट बनाने की कवायद की जा रही है। वहीं अगर यहां के कूड़े के बारे में पूछा जाए तो इसका जवाब किसी के पास नहीं है। आज तक किसी जन प्रतिनिधि ने भी इस समस्या को लेकर आवाज नहीं उठाई। ऐसे में यहां के कूड़े को शहर में कहीं भी फेंक दिया जाता है।
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रोज होता है 50 टन से ज्यादा कचरा
कैंट क्षेत्र में रोजाना 50 टन से ज्यादा कूड़ा-कचरा निकलता है। कैंट क्षेत्र में इस कूड़े को एकत्र करने के लिए 20 बड़े कचरा घर बना रखे हैं। इस कचरे को कैंट बोर्ड की गाड़ियां भरकर परीक्षितगढ़ रोड पर ले जाती हैं। वहां इसे अब्दुल्लापुर में कहीं भी सड़क किनारे फेंक देते हैं। परीक्षितगढ़ रोड के लोगों ने बताया कि गांवड़ी गांव में भी कैंट बोर्ड की गाड़ियों को उन्होंने कूड़ा ले जाते हुए देखा है।
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अब्दुल्लापुर में फेंकने के हैं आदेश
कैंट बोर्ड के प्रवक्ता एमए जफर का कहना है कि सभी कर्मचारियों को कूड़ा अब्दुल्लापुर स्थित कैंट बोर्ड की जमीन में ही डालने के आदेश हैं, अगर कोई नहीं फेंक रहा है तो ये गंभीर है। मौके की रिपोर्ट मंगाकर सीईओ को देंगे। प्रवक्ता एमए जफर का कहना है कि कैंट बोर्ड अब्दुल्लापुर में 20 एकड़ जमीन पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने जा रहा है। साढ़े तीन करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट के लिए प्रारंभिक डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर ली गई है। सीईओ ने जल्द से जल्द फाइनल डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस प्लांट में रोजाना 40 से 50 टन के करीब कूड़े का निस्तारण किए जाने के बाद उससे ईंधन और खाद बनाई जाएगी।