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मुआवजे की मांग को लेकर टंकी पर चढ़े किसान
Updated Sun, 20 May 2018 02:12 AM IST
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मेरठ। नई भू अधिग्रहण नीति से मुआवजा देने की मांग को लेकर शताब्दीनगर के किसान शनिवार को पानी की टंकी पर चढ़ गए। हाथों में केरोसिन की केन और बोतलें लिए किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं की तो वे खुद को आग लगा लेंगे। देर रात तक अधिकारी उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे थे।
शताब्दीनगर में नई नीति से मुआवजे की मांग को लेकर किसान चार साल से धरने पर बैठे हैं। शनिवार सुबह आठ बजे किसान यहां स्थित पानी की टंकी पर चढ़े तो हड़कंप मच गया। एमडीए सचिव राजकुमार और सिटी मजिस्ट्रेेट शैलेंद्र सिंह और एसपी सिटी रणविजय सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। दरअसल भाकियू के बैनर तले शताब्दीनगर योजना के गांव घोपला, रिठानी, जैनपुर, अछरौंडा के किसानों ने पंचायत बुलाई थी। भाकियू नेता विजयपाल घोपला 15 मई से यहां आमरण अनशन पर बैठे हैं। किसानों का आरोप है कि प्रशासन उनकी सुध नहीं ले रहा है। नतीजा यह रहा कि सुबह ही महिला व पुरुष किसान टंकी पर जा चढे़।
समझाया पर नहीं बनी बात
अधिकारियों ने किसानों से कहा कि यह शासन स्तर का मामला है और वहीं बात की जा रही। लेकिन किसान नई नीति से ही मुआवजा मांगने और कमिश्नर या डीएम को मौके पर बुलाने बात पर अड़ गए। एमडीए सचिव व तहसीलदार करनवीर सिंह ने समझाते हुए कहा कि रविवार को अवकाश है। सोमवार को बात कर कोई न कोई समाधान निकल जाएगा। लेकिन किसान नहीं माने और सभी अधिकारी भी वापस लौट गए। डीएम के निर्देश पर देर शाम एडीएम सिटी मुकेश चंद और एसपी सिटी फिर से धरनास्थल पर पहुंचे। लेकिन किसानों ने साफ कह दिया कि जब तक शासन व प्रशासन से लिखित में नहीं दिया जाता, वे टंकी से नही उतरेंगे। देर रात तक किसान टंकी पर चढ़े रहे।
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किसानों ने उड़ेला केरोसिन
किसानों को समझाने के लिए जब पुलिस टंकी पर चढ़ने लगी तो टंकी पर मौजूद एक किसान ने खुद पर केरोसिन उडे़ल लिया। जिसके बाद वहां मौजूद अफसरों में हड़कंप मच गया। सभी पुलिसकर्मी तुरंत टंकी से उतर गए। सभी का कहना था कि मांग पूरी होने के बाद वह उतरेंगे। यदि कोई ऊपर आया तो आत्मदाह कर लेंगे। प्रशासन ने जाल आदि का इंतजाम किया।
मौसम बदला तो फूले हाथ पांव
तपती धूप में भी किसान टंकी पर डटे रहे। शाम के समय तेज हवा चलने लगी तो अधिकारियों ने किसान नेताओं से सभी को टंकी से नीचे उतारने की अपील की। सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि आंधी आ रही है। कोई हादसा हो सकता है। किसान नेताओं ने भी उनसे नीचे उतरने के लिये कहा। लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
विजयपाल से की अनशन तोड़ने की अपील
अधिकारियों ने विजयपाल घोपला से अनशन तोड़ने की अपील की कि मामले का जल्द समाधान हो जाएगा। जिस पर उन्होंने कहा कि किसानों के हक के लिए अनशन पर हैं। मांगें पूरी होने तक अनशन नहीं टूटेगा। चाहे जान क्यों न चली जाए।
जल्द पूरी हो मांगें
धरने पर पहुंचे भाकियू प्रदेश उपाध्यक्ष राजवीर सिंह ने कहा कि शासन व प्रशासन को किसानों की मांगें तत्काल पूरी करनी चाहिए। इस दौरान धरना स्थल पर भाकियू के मांगेराम त्यागी, विनोद जिटौली, बाबा ईलम सिंह, संजय दौरालिया, नरेश चौधरी, महकार सिंह, डॉ. विकास, धर्मवीरी, प्रकाशी, सौपाली, आनंद, गौमती, विजेंद्र, कमलेश, कविता, सुनीता, उमेश चौधरी सहित काफी किसान मौजूद रहे
हमारे बस में नहीं
एमडीए के वीसी साहब सिंह के अनुसार मुआवजा कितना देना है, यह सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। हमें कोई ज्ञापन या प्रस्ताव देंगे तो हम सरकार को भेेज देंगे। वहीं से फैसला होगा। किसानों को नई नीति से मुआवजा देना हमारे बस में नहीं है। यह बात किसानों को समझकर सहयोग करना चाहिए।
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शताब्दीनगर में नई नीति से मुआवजे की मांग को लेकर किसान चार साल से धरने पर बैठे हैं। शनिवार सुबह आठ बजे किसान यहां स्थित पानी की टंकी पर चढ़े तो हड़कंप मच गया। एमडीए सचिव राजकुमार और सिटी मजिस्ट्रेेट शैलेंद्र सिंह और एसपी सिटी रणविजय सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। दरअसल भाकियू के बैनर तले शताब्दीनगर योजना के गांव घोपला, रिठानी, जैनपुर, अछरौंडा के किसानों ने पंचायत बुलाई थी। भाकियू नेता विजयपाल घोपला 15 मई से यहां आमरण अनशन पर बैठे हैं। किसानों का आरोप है कि प्रशासन उनकी सुध नहीं ले रहा है। नतीजा यह रहा कि सुबह ही महिला व पुरुष किसान टंकी पर जा चढे़।
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समझाया पर नहीं बनी बात
अधिकारियों ने किसानों से कहा कि यह शासन स्तर का मामला है और वहीं बात की जा रही। लेकिन किसान नई नीति से ही मुआवजा मांगने और कमिश्नर या डीएम को मौके पर बुलाने बात पर अड़ गए। एमडीए सचिव व तहसीलदार करनवीर सिंह ने समझाते हुए कहा कि रविवार को अवकाश है। सोमवार को बात कर कोई न कोई समाधान निकल जाएगा। लेकिन किसान नहीं माने और सभी अधिकारी भी वापस लौट गए। डीएम के निर्देश पर देर शाम एडीएम सिटी मुकेश चंद और एसपी सिटी फिर से धरनास्थल पर पहुंचे। लेकिन किसानों ने साफ कह दिया कि जब तक शासन व प्रशासन से लिखित में नहीं दिया जाता, वे टंकी से नही उतरेंगे। देर रात तक किसान टंकी पर चढ़े रहे।
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किसानों ने उड़ेला केरोसिन
किसानों को समझाने के लिए जब पुलिस टंकी पर चढ़ने लगी तो टंकी पर मौजूद एक किसान ने खुद पर केरोसिन उडे़ल लिया। जिसके बाद वहां मौजूद अफसरों में हड़कंप मच गया। सभी पुलिसकर्मी तुरंत टंकी से उतर गए। सभी का कहना था कि मांग पूरी होने के बाद वह उतरेंगे। यदि कोई ऊपर आया तो आत्मदाह कर लेंगे। प्रशासन ने जाल आदि का इंतजाम किया।
मौसम बदला तो फूले हाथ पांव
तपती धूप में भी किसान टंकी पर डटे रहे। शाम के समय तेज हवा चलने लगी तो अधिकारियों ने किसान नेताओं से सभी को टंकी से नीचे उतारने की अपील की। सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि आंधी आ रही है। कोई हादसा हो सकता है। किसान नेताओं ने भी उनसे नीचे उतरने के लिये कहा। लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
विजयपाल से की अनशन तोड़ने की अपील
अधिकारियों ने विजयपाल घोपला से अनशन तोड़ने की अपील की कि मामले का जल्द समाधान हो जाएगा। जिस पर उन्होंने कहा कि किसानों के हक के लिए अनशन पर हैं। मांगें पूरी होने तक अनशन नहीं टूटेगा। चाहे जान क्यों न चली जाए।
जल्द पूरी हो मांगें
धरने पर पहुंचे भाकियू प्रदेश उपाध्यक्ष राजवीर सिंह ने कहा कि शासन व प्रशासन को किसानों की मांगें तत्काल पूरी करनी चाहिए। इस दौरान धरना स्थल पर भाकियू के मांगेराम त्यागी, विनोद जिटौली, बाबा ईलम सिंह, संजय दौरालिया, नरेश चौधरी, महकार सिंह, डॉ. विकास, धर्मवीरी, प्रकाशी, सौपाली, आनंद, गौमती, विजेंद्र, कमलेश, कविता, सुनीता, उमेश चौधरी सहित काफी किसान मौजूद रहे
हमारे बस में नहीं
एमडीए के वीसी साहब सिंह के अनुसार मुआवजा कितना देना है, यह सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। हमें कोई ज्ञापन या प्रस्ताव देंगे तो हम सरकार को भेेज देंगे। वहीं से फैसला होगा। किसानों को नई नीति से मुआवजा देना हमारे बस में नहीं है। यह बात किसानों को समझकर सहयोग करना चाहिए।