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माल का लिखित विवरण रखना होगा अनिवार्य
Updated Mon, 25 Sep 2017 02:48 AM IST
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जीएसटी: माल का लिखित विवरण रखना होगा अनिवार्य
- रिटर्न भरने के बाद भी सभी दस्तावेज रखने होंगे सुरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत व्यापारियों को माल का लिखित विवरण रखना अनिवार्य है। रिटर्न भरने के बाद भी सभी दस्तावेज सुरक्षित रखने होंगे।
दरअसल, जीएसटी के तहत दस्तावेजों का रख रखाव काफी महत्वपूर्ण हो गया है। माल की हर स्थिति का लिखित विवरण ऑनलाइन दर्ज होना चाहिए। पंजीकृत कारोबारियों को अपने व्यापार स्थल के मुख्य स्थान पर जो भी खाते एवं अभिलेख हैं, उन्हें रखने होंगे। इसी तरह माल की खरीद, बिक्री, स्टॉक ट्रांसफर के विवरण खातों या रजिस्टर में नियमित रूप से लिखने होंगे। वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की तिथि के बाद भी बही खाते रजिस्टर एवं अभिलेख अनिवार्य रूप से रखने होंगे।
राज्य वस्तु एवं सेवा कर के एडिशनल कमिश्नर वीएन सिन्हा ने बताया कि इनपुट टैक्स क्रेडिट का लभा पाने, बिक्री या स्टॉक ट्रांसफर में देय जीएसटी एवं भुगतान की कई गई जीएसटी राशि का हिसाब किताब भी नियमानुसार रखना होगा। क्रेताओं से माल खरीद के लिए प्राप्त एडवांस की धनराशि समायोजन एवं वापसी का विवरण स्पष्ट रूप से रखना होगा। माल एडवांस की प्राप्ति केसमय उस पर जीएसटी अदा करना होगा। बिक्री केटैक्स इनवाइस और करमुक्त वस्तुओं के लिए बिल ऑफ सप्लाई जारी की जाएगी।
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फार्म सी के सत्यापन के लिए दी जाएगी जिम्मेदारी
वाणिज्य कर व्यवस्था में जारी किए गए फार्म सी और एफ के सत्यापन के लिए प्रदेश के सभी जोनल कार्यालयों को अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है। जोनल कार्यालयों के अफसरों की टीम तय किए गए राज्यों में जाकर सालभर में वहां से जारी किए गए फार्म सी और एफ का सत्यापन करेंगे। फर्जी पाए जाने पर संबंधित जोनल कार्यालयों को सूचित किया जाएगा। इस संबंध में 30 सितंबर तक रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय भेजनी है। प्रदेश के बाहर बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने फार्म सी की व्यवस्था लागू की थी। बिक्री वाले प्रदेश के व्यापारी से फार्म सी प्राप्त करने पर टैक्स में छूट मिलती है।
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- रिटर्न भरने के बाद भी सभी दस्तावेज रखने होंगे सुरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत व्यापारियों को माल का लिखित विवरण रखना अनिवार्य है। रिटर्न भरने के बाद भी सभी दस्तावेज सुरक्षित रखने होंगे।
दरअसल, जीएसटी के तहत दस्तावेजों का रख रखाव काफी महत्वपूर्ण हो गया है। माल की हर स्थिति का लिखित विवरण ऑनलाइन दर्ज होना चाहिए। पंजीकृत कारोबारियों को अपने व्यापार स्थल के मुख्य स्थान पर जो भी खाते एवं अभिलेख हैं, उन्हें रखने होंगे। इसी तरह माल की खरीद, बिक्री, स्टॉक ट्रांसफर के विवरण खातों या रजिस्टर में नियमित रूप से लिखने होंगे। वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की तिथि के बाद भी बही खाते रजिस्टर एवं अभिलेख अनिवार्य रूप से रखने होंगे।
राज्य वस्तु एवं सेवा कर के एडिशनल कमिश्नर वीएन सिन्हा ने बताया कि इनपुट टैक्स क्रेडिट का लभा पाने, बिक्री या स्टॉक ट्रांसफर में देय जीएसटी एवं भुगतान की कई गई जीएसटी राशि का हिसाब किताब भी नियमानुसार रखना होगा। क्रेताओं से माल खरीद के लिए प्राप्त एडवांस की धनराशि समायोजन एवं वापसी का विवरण स्पष्ट रूप से रखना होगा। माल एडवांस की प्राप्ति केसमय उस पर जीएसटी अदा करना होगा। बिक्री केटैक्स इनवाइस और करमुक्त वस्तुओं के लिए बिल ऑफ सप्लाई जारी की जाएगी।
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फार्म सी के सत्यापन के लिए दी जाएगी जिम्मेदारी
वाणिज्य कर व्यवस्था में जारी किए गए फार्म सी और एफ के सत्यापन के लिए प्रदेश के सभी जोनल कार्यालयों को अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है। जोनल कार्यालयों के अफसरों की टीम तय किए गए राज्यों में जाकर सालभर में वहां से जारी किए गए फार्म सी और एफ का सत्यापन करेंगे। फर्जी पाए जाने पर संबंधित जोनल कार्यालयों को सूचित किया जाएगा। इस संबंध में 30 सितंबर तक रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय भेजनी है। प्रदेश के बाहर बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने फार्म सी की व्यवस्था लागू की थी। बिक्री वाले प्रदेश के व्यापारी से फार्म सी प्राप्त करने पर टैक्स में छूट मिलती है।
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