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बंपर गन्ना, सेंटर झटकने को धोबी पछाड़ दांव लगाएंगी मिल
Updated Mon, 11 Sep 2017 02:36 AM IST
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- गन्ना सुरक्षण बैठकों का दौर शुरू, आज मेरठ मंडल की होगी बैठक
मेरठ। गन्ना पेराई सत्र 2017-18 के लिए गन्ना सुरक्षण (आवंटन) बैठकों का दौर शुरू हो गया है। आज बैठक की शुरूआत मेरठ मंडल से होने जा रही है। लाल बहादुर शास्त्री गन्ना संस्थान लखनऊ में होने वाली सुरक्षण बैठक में मंडल की 16 शुगर मिलों में से 15 शुगर मिलों के प्रतिनिधि, गन्ना समितियों व परिष्द प्रतिनिधियों के अलावा गन्ना अधिकारी, नेता और प्रगतिशील किसान भाग लेंगे। साथ ही अधिक से अधिक गन्ना झटकने एवं मनचाही शुगर मिल का सेंटर स्थापित कराने की पुरजोर कोशिश कर अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। प्रदेश में अगेती प्रजाति के गन्ने का रकबा अधिक होने के चलते शुगर मिलों ने पिछले साल पेरे गए करीब साढ़े बारह करोड़ कुंतल गन्ने के मुकाबले साढ़े तीन करोड़ कुंतल अधिक यानी 16 करोड़ कुंतल गन्ने की मांग की है। अपनी मांग को पूरा कराने के लिए मिलों ने लामबंदी के साथ ही पूरी फिल्डिंग बिछा दी है। एक को दूसरी मिल को पटखनी देने के लिए धोबी पछाड़ दांव का सहारा लिया जा रहा है।
गन्ना और सेंटर झटकने केे लिए शुगर मिल करती है लामबंदी
क्षेत्र की शुगर मिल ज्यादा से ज्यादा गन्ना और सेंटर झटकने के लिए जमकर लामबंदी करती है। इसके लिए गन्ना अधिकारियों से लेकर सत्ताधारी विधायकों, गन्ना समिति एवं परिषद् चेयरमैन, निदेशकों और गन्ने की राजनीति करने वाले नेताओं के साथ ही ग्राम प्रधानों और प्रगतिशील किसानों को भी अपने पक्ष में बोलने के लिए बैठक में ले जाया जाता है।
बोलते आंकड़े
शुगर मिल पेराई क्षमता (टीसीडी) गन्ने की मांग गत वर्ष पेरा गन्ना
मवाना 13000 234 148.74
दौराला 12500 172 193.97
सकौती 1800 32.40 19.31
किनौनी 12000 216 146.85
मोहिउद्दीनपुर 2500 30 42.94
नंगलामल 6000 108 81.61
2.45 लाख हेक्टेयर बढ़ा गन्ना क्षेत्रफल
लखनऊ। गन्ना रिजर्वेशन बैठकें ऐसे वातावरण में हो रही हैं जब गन्ना क्षेत्रफल 2.45 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। यह वृद्धि 11.93 फीसदी है। अगेती प्रजाति का गन्ना रकबा भी 52 फीसदी से बढ़कर 70 प्रतिशत पहुंच गया है। प्रदेश में गन्ना सबसे बड़ी नकदी फसल है। 44 जिलों में गन्ना उत्पादन होता है। पेराई सत्र से पहले सभी चीनी मिलों को उनकी मांग व उपलब्धता के आधार पर गन्ना आवंटित किया जाता है। उनके लिए जो गन्ना क्षेत्रफल आरक्षित होता है, उसमें दूसरी चीनी मिल अपने क्रय केंद्र नही ंखोल सकती। गन्ना आवंटन से पहले सुरक्षण (रिजर्वेशन) बैठकें होती हैं। गन्ना रिजर्वेशन बैठक शुरू होते ही सोमवार को किसान हंगामा कर सकते हैं। सहकारी गन्ना विकास समितियों के चेयरमैन व निदेशक गन्ना आयुक्त के उस आदेश से नाराज है जिसमें उन्होंने कहा है कि समिति की प्रबंध समिति में पारित गन्ना सुरक्षण प्रस्ताव मान्य नहीं होंगे। वहीं प्रस्ताव मान्य होंगे जो सामान्य सभा की बैठक में निर्णय लेकर पारित किए जाएंगे। अध्यक्षों का कहना है कि साधारण सभा की बैठक 21 दिन के नोटिस पर बुलाई जा सकती है जबकि गन्ना आयुक्त ने 1 सितंबर को आदेश जारी किए हैं। ये आदेश व्यावहारिक नहीं है। प्रबंध समिति को साधारण सभा ही निर्वाचित करती है।
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मेरठ। गन्ना पेराई सत्र 2017-18 के लिए गन्ना सुरक्षण (आवंटन) बैठकों का दौर शुरू हो गया है। आज बैठक की शुरूआत मेरठ मंडल से होने जा रही है। लाल बहादुर शास्त्री गन्ना संस्थान लखनऊ में होने वाली सुरक्षण बैठक में मंडल की 16 शुगर मिलों में से 15 शुगर मिलों के प्रतिनिधि, गन्ना समितियों व परिष्द प्रतिनिधियों के अलावा गन्ना अधिकारी, नेता और प्रगतिशील किसान भाग लेंगे। साथ ही अधिक से अधिक गन्ना झटकने एवं मनचाही शुगर मिल का सेंटर स्थापित कराने की पुरजोर कोशिश कर अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। प्रदेश में अगेती प्रजाति के गन्ने का रकबा अधिक होने के चलते शुगर मिलों ने पिछले साल पेरे गए करीब साढ़े बारह करोड़ कुंतल गन्ने के मुकाबले साढ़े तीन करोड़ कुंतल अधिक यानी 16 करोड़ कुंतल गन्ने की मांग की है। अपनी मांग को पूरा कराने के लिए मिलों ने लामबंदी के साथ ही पूरी फिल्डिंग बिछा दी है। एक को दूसरी मिल को पटखनी देने के लिए धोबी पछाड़ दांव का सहारा लिया जा रहा है।
गन्ना और सेंटर झटकने केे लिए शुगर मिल करती है लामबंदी
क्षेत्र की शुगर मिल ज्यादा से ज्यादा गन्ना और सेंटर झटकने के लिए जमकर लामबंदी करती है। इसके लिए गन्ना अधिकारियों से लेकर सत्ताधारी विधायकों, गन्ना समिति एवं परिषद् चेयरमैन, निदेशकों और गन्ने की राजनीति करने वाले नेताओं के साथ ही ग्राम प्रधानों और प्रगतिशील किसानों को भी अपने पक्ष में बोलने के लिए बैठक में ले जाया जाता है।
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बोलते आंकड़े
शुगर मिल पेराई क्षमता (टीसीडी) गन्ने की मांग गत वर्ष पेरा गन्ना
मवाना 13000 234 148.74
दौराला 12500 172 193.97
सकौती 1800 32.40 19.31
किनौनी 12000 216 146.85
मोहिउद्दीनपुर 2500 30 42.94
नंगलामल 6000 108 81.61
2.45 लाख हेक्टेयर बढ़ा गन्ना क्षेत्रफल
लखनऊ। गन्ना रिजर्वेशन बैठकें ऐसे वातावरण में हो रही हैं जब गन्ना क्षेत्रफल 2.45 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। यह वृद्धि 11.93 फीसदी है। अगेती प्रजाति का गन्ना रकबा भी 52 फीसदी से बढ़कर 70 प्रतिशत पहुंच गया है। प्रदेश में गन्ना सबसे बड़ी नकदी फसल है। 44 जिलों में गन्ना उत्पादन होता है। पेराई सत्र से पहले सभी चीनी मिलों को उनकी मांग व उपलब्धता के आधार पर गन्ना आवंटित किया जाता है। उनके लिए जो गन्ना क्षेत्रफल आरक्षित होता है, उसमें दूसरी चीनी मिल अपने क्रय केंद्र नही ंखोल सकती। गन्ना आवंटन से पहले सुरक्षण (रिजर्वेशन) बैठकें होती हैं। गन्ना रिजर्वेशन बैठक शुरू होते ही सोमवार को किसान हंगामा कर सकते हैं। सहकारी गन्ना विकास समितियों के चेयरमैन व निदेशक गन्ना आयुक्त के उस आदेश से नाराज है जिसमें उन्होंने कहा है कि समिति की प्रबंध समिति में पारित गन्ना सुरक्षण प्रस्ताव मान्य नहीं होंगे। वहीं प्रस्ताव मान्य होंगे जो सामान्य सभा की बैठक में निर्णय लेकर पारित किए जाएंगे। अध्यक्षों का कहना है कि साधारण सभा की बैठक 21 दिन के नोटिस पर बुलाई जा सकती है जबकि गन्ना आयुक्त ने 1 सितंबर को आदेश जारी किए हैं। ये आदेश व्यावहारिक नहीं है। प्रबंध समिति को साधारण सभा ही निर्वाचित करती है।
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