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दुश्मन के इरादे ध्वस्त होना जरूरी

Sun, 17 Feb 2019 02:26 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 17 Feb 2019 02:26 AM IST
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दुश्मन के  इरादे ध्वस्त होना जरूरी
दुश्मन के इरादे ध्वस्त होना जरूरी
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मेरठ। पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हुए हमले में मारे गए जवानों की शहादत से हर आंख नम है। पूरा देश शोक में डूबा है। हर कोई यही चाहता है कि यह वक्त शांत बैठने का नहीं है। आखिर कब तक हमारे जवान इसी तरह शहीद होते रहेंगे। सरकार को ठोस निर्णय लेना होगा। पुलवामा हमले से सैन्य परिवारों के बच्चे भी गुस्से में हैं। सेना का जज्बा दिल में रखने वाले सैनिकों के बच्चे का भी कहना है कि दुश्मन के इरादों का ध्वस्त होना जरूरी है। यही शहीदों को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
राजनीति नहीं, निर्णय का वक्त
12वीं कक्षा में पढ़ने वाली अर्पिता का परिवार महाराष्ट्र का रहने वाला है, लेकिन पिताजी की पोस्टिंग अभी मेरठ सेना में हैं। इसलिए पूरा परिवार मेरठ में हैं। अर्पिता कहती है देश जिस हालात से गुजर रहा है यह वक्त राजनीति का नहीं हैं। सरकार को कोई कठोर कदम उठाना चाहिए।
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किस ने लगाई सुरक्षा में सेंध
शुभी के पिता अहमद नगर में सेना में पोस्टेड हैं। परिवार मेरठ में रहता है। शुभी कहती हैं पुलवामा में जो हमला हुआ वो योजनाबद्ध तरीके से की गई साजिश लगती है। त्रिस्तरीय सुरक्षा के बाद बारूद कै से उस हाईवे तक पहुंचा यह बड़ा सवाल है। इससे जाहिर है कि किसी ने सुरक्षा में सेंध लगाई है। सूचना लीक करने वालों की तलाश कर उनको कठोर सजा मिले।
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कौन लीक रहा आंतरिक सूचनाएं
रितुल के पिता सेना में हैं और दिल्ली में पोस्टेड हैं। रितुल कहते हैं, जब किसी परिवार का बेटा शहीद होता है तो उस दर्द को वो परिवार ही समझ सकता है। आखिर कौन है जो आंतरिक सूचनाएं लीक करके देश के जवानों के जीवन से खिलवाड़ कर रहा है। इसकी जांच जरूरी है।

पापा जा रहे श्रीनगर डर लग रहा है
वर्षा के पिताजी सेना में हवलदार हैं और पोस्टिंग श्रीनगर में हैं। 12वीं कक्षा में आर्मी पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली वर्षा का पूरा परिवार शनिवार को बेहद डरा हुआ था कि पिता को श्रीनगर ड्यूटी करने जाना है। वर्षा कहती हैं अभी पापा छुट्टी में मेरठ आए थे, लेकिन आज शनिवार को ड्यूटी पर जाना है। वहीं देश से बढ़कर कुछ नहीं इसलिए पापा जाएंगे। वर्षा स्वयं आर्मी डॉक्टर बनकर जवानों की सेवा करना चाहती हैं।

खास बातें:
- पुलवामा हमले से सैनिकों के बच्चों में भारी गुस्सा
- बच्चों ने कहा- राजनीति नहीं ठोस निर्णय का है समस्य
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