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रमाकांत ने दिया नियमों का हवाला, निगम ने किया किनारा
Updated Tue, 24 Jul 2018 03:00 AM IST
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मेरठ। मेनका सिनेमा प्रकरण में नगर निगम ने रमाकांत पांडे को पार्टी मानने से ही इंकार कर दिया है। पांडे ने हाईटेक सिटी डेवलपमेंट के डायरेक्टर की हैसियत से निगम को पत्र भेजकर कहा कि हमने मेनका सिनेमा हॉल का हिस्सा नियमों के तहत तोड़ा है, जिस पर अपर नगरारयुक्त ने जवाब दिया कि हमने पुरुषोत्तम कुमार चौबे को एनओसी दी थी, जो निरस्त कर दी थी। हम आपको जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं।
दरअसल जहां नगर निगम के रिकॉर्ड में हाईटेक सिटी डेवलपमेंट के डायरेक्टर पुरुषोत्तम कुमार चौबे का नाम दर्ज है, वहीं चौबे के नाम से ही निगम में पत्र देकर सिनेमा की जर्जर बिल्डिंग को गिराने और रिपेयर कराने की अनुमति मांगी थी। निगम प्रशासन ने बिल्डिंग तोड़ने की अनुमति पत्र में बगैर मनोरंजन कर विभाग और अन्य विभागों की एनओसी लिए तोड़ने की कार्यवाही न करने के निर्देश दिए थे। लेकिन गुपचुप तरीके से बिल्डिंग का काफी बड़ा हिस्सा तोड़ दिया गया। जब निगम के पत्र का हवाला दिया गया तो निगम प्रशासन ने जारी पत्र को निरस्त कर दिया। साथ ही पुरुषोत्तम कुमार चौबे के नाम एफआईआर भी दर्ज करा दी गयी।
अब इस प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। अपर नगरायुक्त अलीहसन कर्नी ने बताया कि मै. हाईटेक सिटी डेवलपमेंट प्रा. लि. के डायरेक्टर के रूप में रमाकांत पांडे ने निगम को पत्र भेजकर कहा है कि उन्होंने नियम कायदों के तहत नगर निगम, एमडीए, मनोरंजन कर विभाग से एनओसी मांगी थी। उसी के आधार पर सिनेमा की बिल्डिंग को तोड़ा गया। निगम को अपनी एनओसी निरस्त नहीं करनी चाहिए थी। अपर नगरायुक्त का कहना है कि हमारे रिकॉर्ड के मुताबिक पुरुषोत्तम कुमार चौबे ही कंपनी के डायरेक्टर हैं। साथ ही चौबे के द्वारा ही प्रार्थना पत्र दिया गया था। रमाकांत के पत्र का जवाब देने के लिए नगर निगम बाध्य नहीं है।
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सचिन सैनी ने डाली केविएट
मेरठ। मेनका मामले में सामने आ रहे लोगों के बीच प्रशासन का ढुलमुल रवैया जहां इस मामले में फंस रहे लोगों को राहत देता नजर आ रहा है तो तीसरे पक्ष ने इस मामले में कूदकर मामला और पेचीदा बना दिया है। शहर के एक समाजसेवी सचिन सैनी ने इस मामले में हाईकोर्ट में केविएट डालते हुए मेनका मामले में किसी भी रिट पर सुनवाई के दौरान उनका भी पक्ष सुनने का आवेदन किया है। सचिन सैनी की केविएट में हाईटेक सिटी डेवलपर्स, रमाकांत पांडे, पुरूषोत्तम कुमार चौबे और नासिर इलाही को पार्टी बनाया गया है। सचिन सैनी ने बताया कि उनके पास इस जमीन के नजूल होने के पुख्ता साक्ष्य हैं और तमाम पुरानी जांच रिपोर्ट भी हैं। ऐसे में यदि इनमें से कोई भी पक्ष हाईकोर्ट जाता है तो उसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट से उसका पक्ष सुनने का भी निवेदन किया गया है।
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दरअसल जहां नगर निगम के रिकॉर्ड में हाईटेक सिटी डेवलपमेंट के डायरेक्टर पुरुषोत्तम कुमार चौबे का नाम दर्ज है, वहीं चौबे के नाम से ही निगम में पत्र देकर सिनेमा की जर्जर बिल्डिंग को गिराने और रिपेयर कराने की अनुमति मांगी थी। निगम प्रशासन ने बिल्डिंग तोड़ने की अनुमति पत्र में बगैर मनोरंजन कर विभाग और अन्य विभागों की एनओसी लिए तोड़ने की कार्यवाही न करने के निर्देश दिए थे। लेकिन गुपचुप तरीके से बिल्डिंग का काफी बड़ा हिस्सा तोड़ दिया गया। जब निगम के पत्र का हवाला दिया गया तो निगम प्रशासन ने जारी पत्र को निरस्त कर दिया। साथ ही पुरुषोत्तम कुमार चौबे के नाम एफआईआर भी दर्ज करा दी गयी।
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अब इस प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। अपर नगरायुक्त अलीहसन कर्नी ने बताया कि मै. हाईटेक सिटी डेवलपमेंट प्रा. लि. के डायरेक्टर के रूप में रमाकांत पांडे ने निगम को पत्र भेजकर कहा है कि उन्होंने नियम कायदों के तहत नगर निगम, एमडीए, मनोरंजन कर विभाग से एनओसी मांगी थी। उसी के आधार पर सिनेमा की बिल्डिंग को तोड़ा गया। निगम को अपनी एनओसी निरस्त नहीं करनी चाहिए थी। अपर नगरायुक्त का कहना है कि हमारे रिकॉर्ड के मुताबिक पुरुषोत्तम कुमार चौबे ही कंपनी के डायरेक्टर हैं। साथ ही चौबे के द्वारा ही प्रार्थना पत्र दिया गया था। रमाकांत के पत्र का जवाब देने के लिए नगर निगम बाध्य नहीं है।
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सचिन सैनी ने डाली केविएट
मेरठ। मेनका मामले में सामने आ रहे लोगों के बीच प्रशासन का ढुलमुल रवैया जहां इस मामले में फंस रहे लोगों को राहत देता नजर आ रहा है तो तीसरे पक्ष ने इस मामले में कूदकर मामला और पेचीदा बना दिया है। शहर के एक समाजसेवी सचिन सैनी ने इस मामले में हाईकोर्ट में केविएट डालते हुए मेनका मामले में किसी भी रिट पर सुनवाई के दौरान उनका भी पक्ष सुनने का आवेदन किया है। सचिन सैनी की केविएट में हाईटेक सिटी डेवलपर्स, रमाकांत पांडे, पुरूषोत्तम कुमार चौबे और नासिर इलाही को पार्टी बनाया गया है। सचिन सैनी ने बताया कि उनके पास इस जमीन के नजूल होने के पुख्ता साक्ष्य हैं और तमाम पुरानी जांच रिपोर्ट भी हैं। ऐसे में यदि इनमें से कोई भी पक्ष हाईकोर्ट जाता है तो उसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट से उसका पक्ष सुनने का भी निवेदन किया गया है।