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सालभर भी नहीं टिक पा रहे सात जन्मों के रिश्ते

Fri, 10 May 2019 03:11 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 10 May 2019 03:11 AM IST
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सालभर भी नहीं टिक पा रहे सात जन्मों के रिश्ते
सालभर भी नहीं टिक पा रहे सात जन्मों के रिश्ते
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छोटी-छोटी बातों से रिश्तों में पैदा हो रही दरार, काउंसलिंग में निपट रहे 50 फीसदी मामले
परिवार परामर्श केंद्र की रिपोर्ट में दंपती के बीच होेने वाले 25 फीसदी विवाद का कारण सास
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। भाभी का गुड मॉर्निंग न बोलना ननद को नागवार है। बहू के द्वारा पैर न छूना भी सास को सालता रहता है। मोटा दहेज लेने के बाद भी बहू का रहन-सहन, उसका बेपर्दा रहना, मोबाइल पर लगातार व्यस्त रहना... ये छोटी-छोटी बातें सास को नापसंद हैं। इसका सीधा असर पति-पत्नी के रिश्तों पर दिखाई दे रहा है। हालात ये हैं कि सात जन्मों का ये रिश्ता सालभर भी नहीं टिक पा रहा है। परिवार परामर्श केंद्र (पीपीके) की रिपोर्ट के अनुसार 25 फीसदी पति-पत्नी के बीच होने वाले विवाद का कारण सास बन रहीं हैं। पुलिस अफसरों ने ऐसे केसों की बढ़ती स्थिति को देखकर प्री-वेडिंग काउंसलिंग की जरूरत बताई है।
हरियाणा के एक रिटायर्ड डीआईजी बृहस्पतिवार को एसएसपी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने एसएसपी नितिन तिवारी से कहा कि दोस्त की बेटी को ससुराल पक्ष के लोग परेशान कर रहे हैं। मामला पहले से परिवार परामर्श केंद्र पर है। दंपती अच्छी कंपनी में जॉब कर रहे हैं। विवाहिता के ससुर रिटायर्ड सीओ हैं। इसके बाद एसएसपी ने परिवार परामर्श केंद्र की प्रभारी मोनिका जिंदल से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी। पीपीके में दहेज के मामले देखकर एसएसपी और एसपी क्राइम भी हैरान रह गये। इस साल जनवरी में 203, फरवरी में 167, मार्च में 152 और अप्रैल में 172 मामले पीपीके पहुंचे। मोनिका जिंदल का कहना है कि 50 प्रतिशत मामले पहली से लेकर छठी काउंसलिंग तक निपट रहे हैं। बाकी में समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है और एफआईआर दर्ज हो रही हैं।
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एसपी बोले, प्री वेडिंग काउंसलिंग की जरूरत
एसपी क्राइम डॉ. बीपी अशोक का कहना है कि पीपीके में लगातार मामले बढ़ रहे हैं।शादी के सालभर के भीतर ही दंपती में विवाद बढ़ रहे हैं। ऐसे में शादी से पहले ही काउंसलिंग की जरूरत है। कई मामलों में विवाहिताएं दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाती हैं। जांच में कई मामलों में सच्चाई इससे अलग निकलती है।
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केस- एक
रोहटा रोड निवासी महिला की शादी नौ माह पहले गंगानगर निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर से हुई थी। शादी में कार समेत 20 लाख खर्च किए गए थे। दंपती का मामला पीपीके तक पहुंचा। जिसमें सास का कहना है कि बहू पैर नहीं छूती। इसी को लेकर पति-पत्नी में विवाद रहने लगा।
केस दो
पल्लवपुरम निवासी महिला की शादी मार्च 2018 में गाजियाबाद निवासी युवक से हुई थी। महिला ने आरोप लगाया कि शादी के बाद भी दहेज में कार की मांग की जाती है। बाद में काउंसलिंग में सामने आया कि विवाहिता सुबह उठकर नंद को गुड मॉर्निंग नहीं बोलती थी, इसलिए विवाद बढ़ता गया।
केस तीन
जागृति विहार निवासी शिक्षिका की शादी दिसंबर 2018 में नौचंदी क्षेत्र निवासी युवक से हुई थी। युवक नोएडा में प्राइवेट कंपनी में जॉब करता है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि ससुराल में दहेज की मांग को लेकर उत्पीड़न किया जाता है। दो माह से मामला पीपीके में चल रहा है। जांच में सामने आया कि सास अपनी पुत्रवधू पर पैर छुआने के लिए दबाव बनाती है।

तीसरी पत्नी रूबीना को अलग मकान देगा पति
लिसाड़ीगेट निवासी रूबीना (बदला हुआ नाम) ने बताया कि पति मारपीट करता है। जांच में सामने आया कि युवक की पहले से दो पत्नी हैं। बृहस्पतिवार को पहली काउंसलिंग में ही मामला निपट गया। समझौते में युवक ने कहा कि वह पत्नी को अलग से मकान देगा और पत्नी से मारपीट नहीं करेगा।
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