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सरकारी जमीनों पर कब्जे साबित, कार्रवाई ठंडे बस्ते में
Updated Mon, 18 Jun 2018 02:20 AM IST
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मेरठ। शहर की महंगी सरकारी जमीनों पर कब्जा कर निर्माण के मामलों में जिला प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। सभी निर्माण में जांच के बाद नजूल की जमीन होना साबित हो चुका है। लेकिन उससे आगे की कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गयी है। जबकि इस मामले में शिकायतकर्ता कई बार रिमाइंडर भी भेज चुके हैं, लेकिन अधिकारी सुध नहीं ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शपथ लेते ही भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने और सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिए थे। इस आदेश का शुरू में तो पालन हुआ। लेकिन अब जिला प्रशासन उदासीनता बरत रहा है। शहर में ही तीन मामले ऐसे हैं जो सरकारी जमीन पर कब्जे के हैं। इनमें एक मामले में एमडीए स्तर पर कार्रवाई हुई। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी है।
ये हैं तीन बड़े मामले
- हापुड़ अड्डा चौराहा स्थित खसरा नंबर 4632 का मामला चर्चित है। इस जमीन पर 72 दुकानों के नवनिर्मित कांप्लैक्स को तो एमडीए ने बिना नक्शा स्वीकृत बनाए जाने पर ध्वस्त कर दिया था। लेकिन जांच में जो बाकी के कब्जेदार सामने आए थे, उनका मामला अब प्रशासन ने दबा दिया है। इस मामले में सुनवाई के नाम केस को खींचा जा रहा है।
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- दूसरा मामला हापुड़ रोड स्थित गुलमर्ग सिनेमा के पास सईद होटल का है, यह होटल भी नजूल की जमीन पर कब्जा कर बनाया गया है। जांच में इसकी पुष्टि भी हो चुकी है, लेकिन प्रशासन ने इस दिशा में आज तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
- तीसरा मामला ईव्ज चौराहा के पास स्थित एक कांप्लैक्स का है। सौ दुकानों से ज्यादा के इस कांप्लैक्स का निर्माण भी नजूल की जमीन में हुआ है।
100 करोड़ से ज्यादा कीमत
ये तीनों मामले 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कीमत वाली जमीनों पर कब्जा कर निर्माण से जुड़े हैं। जांच में प्रशासन के सामने स्थिति स्पष्ट होने के बाद कार्रवाई शून्य है। जबकि इन मामलों में शिकायतकर्ता कई बार रिमाइंडर भी दे चुके हैं, लेकिन प्रशासन मामलों को दबाए बैठा है।
खास बातें:
- हापुड़ अड्डा चौराहा, गुलमर्ग के पास सईद होटल और ईव्ज चौराहा स्थित कांप्लैक्स है नजूल भूमि में
- सभी प्रकरणों में जांच हुई, सिद्ध हो चुका है सरकारी जमीनों पर निर्माण
- जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई के नाम पर जिला प्रशासन ने साधी चुप्पी
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शपथ लेते ही भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने और सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिए थे। इस आदेश का शुरू में तो पालन हुआ। लेकिन अब जिला प्रशासन उदासीनता बरत रहा है। शहर में ही तीन मामले ऐसे हैं जो सरकारी जमीन पर कब्जे के हैं। इनमें एक मामले में एमडीए स्तर पर कार्रवाई हुई। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी है।
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ये हैं तीन बड़े मामले
- हापुड़ अड्डा चौराहा स्थित खसरा नंबर 4632 का मामला चर्चित है। इस जमीन पर 72 दुकानों के नवनिर्मित कांप्लैक्स को तो एमडीए ने बिना नक्शा स्वीकृत बनाए जाने पर ध्वस्त कर दिया था। लेकिन जांच में जो बाकी के कब्जेदार सामने आए थे, उनका मामला अब प्रशासन ने दबा दिया है। इस मामले में सुनवाई के नाम केस को खींचा जा रहा है।
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- दूसरा मामला हापुड़ रोड स्थित गुलमर्ग सिनेमा के पास सईद होटल का है, यह होटल भी नजूल की जमीन पर कब्जा कर बनाया गया है। जांच में इसकी पुष्टि भी हो चुकी है, लेकिन प्रशासन ने इस दिशा में आज तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
- तीसरा मामला ईव्ज चौराहा के पास स्थित एक कांप्लैक्स का है। सौ दुकानों से ज्यादा के इस कांप्लैक्स का निर्माण भी नजूल की जमीन में हुआ है।
100 करोड़ से ज्यादा कीमत
ये तीनों मामले 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कीमत वाली जमीनों पर कब्जा कर निर्माण से जुड़े हैं। जांच में प्रशासन के सामने स्थिति स्पष्ट होने के बाद कार्रवाई शून्य है। जबकि इन मामलों में शिकायतकर्ता कई बार रिमाइंडर भी दे चुके हैं, लेकिन प्रशासन मामलों को दबाए बैठा है।
खास बातें:
- हापुड़ अड्डा चौराहा, गुलमर्ग के पास सईद होटल और ईव्ज चौराहा स्थित कांप्लैक्स है नजूल भूमि में
- सभी प्रकरणों में जांच हुई, सिद्ध हो चुका है सरकारी जमीनों पर निर्माण
- जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई के नाम पर जिला प्रशासन ने साधी चुप्पी