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जागो, नहीं तो बंजर हो जाएगी धरती
Updated Sun, 17 Jun 2018 12:24 AM IST
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जागों, नहीं तो बंजर हो जाएगी बिजनौर की धरती
बिजनौर। जिले में धरती धीरे-धीरे बंजर होने की दिशा में बढ़ रही है। मृदा नमूनों की परीक्षण रिपोर्ट में जिले में यह खतरनाक स्थिति सामने आई है। जिले में लिए गए करीब 84 हजार नमूनों में से 42 हजार से भी अधिक में क्षारीय तत्वों की मात्रा बढ़ी हुई आई हैं। असंतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को इसके पीछे वजह बताया जा रहा है। अभी भी यदि नहीं जागे तो और भी खतरनाक स्थिति हो जाएगी।
केंद्र सरकार की किसानों को मृदा परीक्षण रिपोर्ट कार्ड देने की योजना के तहत खेतों की मिट्टी के नमूने लेकर उनका परीक्षण कराने का कार्यक्रम चलाया गया था। इनकी जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि जिले की मिट्टी में पीएच आयंस की दर बढ़ रही है और मिट्टी की प्रकृति क्षारीय गुणों वाली हो रही है और धरती में हानिकारक लवणों की मात्रा बढ़ रही है। इससे जमीन की पोषक तत्वों को ग्रहण करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है। उपनिदेशक कृषि जेपी चौधरी ने बताया कि यह किसानों के लिए खतरनाक संकेत हैं। किसान खेतों में रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग कम करें और जैविक खेती की ओर रुख करें।
पौधे को पोषक तत्व देने की शक्ति होगी खत्म
मिट्टी में क्षारीय प्रवृत्ति बढ़ने का मतलब होता है कि मिट्टी में भी नमक जैसे तत्वों की मात्रा बढ़ रही है। जमीन ही पौधे को पोषक तत्व उपलब्ध कराती है। क्षारीय प्रवृत्ति बढ़ने से पोषक तत्व पौधे को उपलब्ध नहीं कराया जा सकेगा। मिट्टी की प्रवृत्ति रेगिस्तानी होने लगती है।
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यह है इस समय स्थिति
जमीन में पीएच आयंस 0 से 14 अंकों तक मापे जाते हैं। इनका स्तर सात होने का मतलब होता है कि जमीन उदासीन है। यह बीच की स्थिति है। जमीन में बंजरपन का लक्षण नहीं है, लेकिन इससे ऊपर जाने के साथ ही क्षारीय लक्षण बढ़ने लगते हैं और यानी जमीन में बंजरपन बढ़ने लगता है। जिले की मिट्टी में पीएच आयंस साढ़े सात प्रतिशत तक जा पहुंचा है। कहीं-कहीं तो यह 7.6 तक मिला है। अगर पीएच आयंस आठ तक पहुंच गए तो स्थिति भयावह हो जाएगी।
ऐसे होती है मिट्टी की जांच
जिले में करीब तीन लाख 64 हजार 755 हेक्टेयर जमीन में खेती होती है। कृषि विभाग ने ढाई हेक्टेयर को एक ग्रिड मानकर हर ग्रिड से नमूने लिए जाते हैं। कृषि विभाग के कर्मचारी खुद जाकर ग्रिड से नमूने ले रहे हैं। जिले में एक लाख पांच हजार 902 ग्रिड के नमूनों की जांच होनी है, जितने नमूनों की जांच अब तक हुई है उनमें से आधों में पीएच अयंस बढ़े हुए मिले हैं।
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बिजनौर। जिले में धरती धीरे-धीरे बंजर होने की दिशा में बढ़ रही है। मृदा नमूनों की परीक्षण रिपोर्ट में जिले में यह खतरनाक स्थिति सामने आई है। जिले में लिए गए करीब 84 हजार नमूनों में से 42 हजार से भी अधिक में क्षारीय तत्वों की मात्रा बढ़ी हुई आई हैं। असंतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को इसके पीछे वजह बताया जा रहा है। अभी भी यदि नहीं जागे तो और भी खतरनाक स्थिति हो जाएगी।
केंद्र सरकार की किसानों को मृदा परीक्षण रिपोर्ट कार्ड देने की योजना के तहत खेतों की मिट्टी के नमूने लेकर उनका परीक्षण कराने का कार्यक्रम चलाया गया था। इनकी जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि जिले की मिट्टी में पीएच आयंस की दर बढ़ रही है और मिट्टी की प्रकृति क्षारीय गुणों वाली हो रही है और धरती में हानिकारक लवणों की मात्रा बढ़ रही है। इससे जमीन की पोषक तत्वों को ग्रहण करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है। उपनिदेशक कृषि जेपी चौधरी ने बताया कि यह किसानों के लिए खतरनाक संकेत हैं। किसान खेतों में रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग कम करें और जैविक खेती की ओर रुख करें।
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पौधे को पोषक तत्व देने की शक्ति होगी खत्म
मिट्टी में क्षारीय प्रवृत्ति बढ़ने का मतलब होता है कि मिट्टी में भी नमक जैसे तत्वों की मात्रा बढ़ रही है। जमीन ही पौधे को पोषक तत्व उपलब्ध कराती है। क्षारीय प्रवृत्ति बढ़ने से पोषक तत्व पौधे को उपलब्ध नहीं कराया जा सकेगा। मिट्टी की प्रवृत्ति रेगिस्तानी होने लगती है।
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यह है इस समय स्थिति
जमीन में पीएच आयंस 0 से 14 अंकों तक मापे जाते हैं। इनका स्तर सात होने का मतलब होता है कि जमीन उदासीन है। यह बीच की स्थिति है। जमीन में बंजरपन का लक्षण नहीं है, लेकिन इससे ऊपर जाने के साथ ही क्षारीय लक्षण बढ़ने लगते हैं और यानी जमीन में बंजरपन बढ़ने लगता है। जिले की मिट्टी में पीएच आयंस साढ़े सात प्रतिशत तक जा पहुंचा है। कहीं-कहीं तो यह 7.6 तक मिला है। अगर पीएच आयंस आठ तक पहुंच गए तो स्थिति भयावह हो जाएगी।
ऐसे होती है मिट्टी की जांच
जिले में करीब तीन लाख 64 हजार 755 हेक्टेयर जमीन में खेती होती है। कृषि विभाग ने ढाई हेक्टेयर को एक ग्रिड मानकर हर ग्रिड से नमूने लिए जाते हैं। कृषि विभाग के कर्मचारी खुद जाकर ग्रिड से नमूने ले रहे हैं। जिले में एक लाख पांच हजार 902 ग्रिड के नमूनों की जांच होनी है, जितने नमूनों की जांच अब तक हुई है उनमें से आधों में पीएच अयंस बढ़े हुए मिले हैं।