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गन्ने का री-सर्वे कराया नहीं, एग्रीमेंट के लिए भेज रहे नाम
Updated Mon, 26 Mar 2018 02:32 AM IST
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मेरठ। गन्ना उपज के सापेक्ष खेतों में खड़े अवशेष गन्ने को लेने के लिए कराया जाने वाले री-सर्वे आदेश की हवा खुद विभाग ने ही निकालनी शुरू कर दी है।
गन्ना समितियों ने री-सर्वे में लगने वाले समय और खर्च को बचाने के लिए शॉटकर्ट अपनाना शुरू कर दिया है। इसके लिए विभाग ने एग्रीमेंट की गुुंजाइश वाले किसानों के नामों की सूची गांवों में भेजनी शुरू कर दी है। सूची में भेजे गए किसानों को समिति पहुंचकर अतिरिक्त गन्ने का एग्रीमेंट कराने के लिए कहा जा रहा है। इसमें काफी नाम ऐसे है जिनके पास गन्ना नहीं है। इस शॉर्टकट फार्मूले से वे नाम छूट गए है, जिन किसानों के पास पर्ची खत्म होने के बाद भी गन्ना बचा है। इससे किसान नाराज हैं।
री-सर्वे के बाद होनी थी री-कैलेंडरिंग
गन्ना रकबा के साथ उपज बढ़ोतरी ने गन्ना विभाग के सभी आंकलनों और तैयारियों को फेल कर दिया है। बेसिक कोटा के आधार पर किसानों की पर्ची खत्म हो गई है। लेकिन उनके खेतों में अभी तक 20 फीसदी गन्ना खड़ा है। किसानों की इस समस्या को देखते हुए गन्ना राज्य मंत्री सुरेश राणा ने 22 मार्च तक खेतों में खड़े गन्ने का री-सर्वे कराकर री-कैलेंडरिंग के आदेश दिए थे। इसके मुताबिक उन किसानों के खेतों का सर्वे होना था जिनकी पर्ची तो खत्म हो गई और उनका गन्ना बचा है। इसके लिए गन्ना विभाग ने आदेश को धरातल पर उतारे बगैर ही नया फार्मूला खोज निकाला है। गन्ना समितियों से उन किसानों के नामों की सूची बनाकर गांवों में भेजी जा रही है जिनके कैलेंडर में उपज वृद्धि के एग्रीमेंट की गुंजाइश बची है। जिन किसानों के कैलेंडर पहले ही उपज वृद्धि के साथ बने हैं, उन्हें इसका लाभ नहीं दिया जा रहा है। जबकि हकीकत में इन किसानों के पास अभी गन्ना बचा है।
रालोद करेगा आंदोलन
गन्ना आपूर्ति के लिए किसानों को हो रही परेशानी के विरोध में रालोद ने आंदोलन का एलान कर दिया है। प्रदेश संगठन प्रभारी डॉ. राजकुमार सांगवान ने कहा कि प्रदेश सरकार गन्ने के संबंध में हवाई दावे कर रही है। न तो किसानों का गन्ना लिया जा रहा है और न ही खरीदे गए गन्ने का भुगतान हो रहा है। रालोद किसानों का दर्द बर्दाश्त नहीं करेगा। अगर विभाग ने समस्या का समाधान नहीं किया तो अधिकारियों का घेराव किया जाएगा।
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गन्ना समितियों ने री-सर्वे में लगने वाले समय और खर्च को बचाने के लिए शॉटकर्ट अपनाना शुरू कर दिया है। इसके लिए विभाग ने एग्रीमेंट की गुुंजाइश वाले किसानों के नामों की सूची गांवों में भेजनी शुरू कर दी है। सूची में भेजे गए किसानों को समिति पहुंचकर अतिरिक्त गन्ने का एग्रीमेंट कराने के लिए कहा जा रहा है। इसमें काफी नाम ऐसे है जिनके पास गन्ना नहीं है। इस शॉर्टकट फार्मूले से वे नाम छूट गए है, जिन किसानों के पास पर्ची खत्म होने के बाद भी गन्ना बचा है। इससे किसान नाराज हैं।
री-सर्वे के बाद होनी थी री-कैलेंडरिंग
गन्ना रकबा के साथ उपज बढ़ोतरी ने गन्ना विभाग के सभी आंकलनों और तैयारियों को फेल कर दिया है। बेसिक कोटा के आधार पर किसानों की पर्ची खत्म हो गई है। लेकिन उनके खेतों में अभी तक 20 फीसदी गन्ना खड़ा है। किसानों की इस समस्या को देखते हुए गन्ना राज्य मंत्री सुरेश राणा ने 22 मार्च तक खेतों में खड़े गन्ने का री-सर्वे कराकर री-कैलेंडरिंग के आदेश दिए थे। इसके मुताबिक उन किसानों के खेतों का सर्वे होना था जिनकी पर्ची तो खत्म हो गई और उनका गन्ना बचा है। इसके लिए गन्ना विभाग ने आदेश को धरातल पर उतारे बगैर ही नया फार्मूला खोज निकाला है। गन्ना समितियों से उन किसानों के नामों की सूची बनाकर गांवों में भेजी जा रही है जिनके कैलेंडर में उपज वृद्धि के एग्रीमेंट की गुंजाइश बची है। जिन किसानों के कैलेंडर पहले ही उपज वृद्धि के साथ बने हैं, उन्हें इसका लाभ नहीं दिया जा रहा है। जबकि हकीकत में इन किसानों के पास अभी गन्ना बचा है।
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रालोद करेगा आंदोलन
गन्ना आपूर्ति के लिए किसानों को हो रही परेशानी के विरोध में रालोद ने आंदोलन का एलान कर दिया है। प्रदेश संगठन प्रभारी डॉ. राजकुमार सांगवान ने कहा कि प्रदेश सरकार गन्ने के संबंध में हवाई दावे कर रही है। न तो किसानों का गन्ना लिया जा रहा है और न ही खरीदे गए गन्ने का भुगतान हो रहा है। रालोद किसानों का दर्द बर्दाश्त नहीं करेगा। अगर विभाग ने समस्या का समाधान नहीं किया तो अधिकारियों का घेराव किया जाएगा।
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