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सेना ने दी शहीद हरेंद्र सिंह को श्रृद्धांजलि
Updated Mon, 21 Aug 2017 02:35 AM IST
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मेरठ। आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद होने वाले कर्नल हरेंद्र सिंह सहरावत को आर्मी के अधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी। माल रोड पर सहरावत चौराहे पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मोमबत्ती जलाकर जांबाज को दिया किया।
श्रद्धांजलि सभा में कोर इलेवन के कमांडर लेफ्टिनेंट जर्नल बीएस सहरावत, सब एरिया कमांडर मेजर जर्नल के. मनमीत सिंह, 22 डिविजन के जीओसी मेजर जरनल एनडी प्रसाद, कर्नल अनिल कुमार (रिटायर्ड) ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। शहीद कर्नल हरेंद्र सिंह सहरावत की पत्नी उषा सहरावत भी मौजूद रहीं। जंगेठी गांव निवासी कर्नल हरेंद्र सिंह सहरावत सेना के आरआर कमान में तैनात थे। 2002 में जब उनकी पोस्टिंग आगरा में थी, तब उन्हें सूचना मिली कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी छिपे हैं। जो किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। आतंकवादियों के मंसूबों पर पानी फेरने के लिए शहीद कर्नल हरेंद्र सिंह सहरावत सेना की टुकड़ी लेकर मौके पर पहुंचे। जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन को लीड किया। 20 अगस्त 2002 को आज के ही दिन जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए वह शहीद हो गए। उनकी स्मृति में माल रोड सप्लाई डिपो के पास सहरावत चौराहा बनाकर वहां कर्नल हरेंद्र सिंह सहरावत की प्रतिमा लगाई गई।
देश सेवा को समर्पित परिवार
शहीद का परिवार देश सेवा को समर्पित है। स्वयं कर्नल हरेंद्र सिंह सहरावत सेना में रहे। पिता के बाद बेटे ने भी भारतीय सेना को ज्वाइन किया। उनके बेटे कैप्टन वासु सहरावत 10 आर्म्ड रेजीमेंट सूरतगढ़ में तैनात हैं। सेना में महानिदेशक पद पर रहे सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जर्नल सुमित कुमार भी सहरावत परिवार के बेहद करीबी रिश्तेदार हैं।
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युद्ध नहीं स्थायी समाधान जरूरी
शहीद की पत्नी उषा सहरावत कहती हैं भारत-चीन सीमा विवाद का हल युद्ध नहीं है। दोनों देशों के पास बड़ी सेनाएं हैं। युद्ध हुआ तो दोनों देशों को बड़ी क्षति होगी। विवाद को खत्म करने के लिए शांति से स्थायी समाधान निकालना होगा।
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श्रद्धांजलि सभा में कोर इलेवन के कमांडर लेफ्टिनेंट जर्नल बीएस सहरावत, सब एरिया कमांडर मेजर जर्नल के. मनमीत सिंह, 22 डिविजन के जीओसी मेजर जरनल एनडी प्रसाद, कर्नल अनिल कुमार (रिटायर्ड) ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। शहीद कर्नल हरेंद्र सिंह सहरावत की पत्नी उषा सहरावत भी मौजूद रहीं। जंगेठी गांव निवासी कर्नल हरेंद्र सिंह सहरावत सेना के आरआर कमान में तैनात थे। 2002 में जब उनकी पोस्टिंग आगरा में थी, तब उन्हें सूचना मिली कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी छिपे हैं। जो किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। आतंकवादियों के मंसूबों पर पानी फेरने के लिए शहीद कर्नल हरेंद्र सिंह सहरावत सेना की टुकड़ी लेकर मौके पर पहुंचे। जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन को लीड किया। 20 अगस्त 2002 को आज के ही दिन जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए वह शहीद हो गए। उनकी स्मृति में माल रोड सप्लाई डिपो के पास सहरावत चौराहा बनाकर वहां कर्नल हरेंद्र सिंह सहरावत की प्रतिमा लगाई गई।
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देश सेवा को समर्पित परिवार
शहीद का परिवार देश सेवा को समर्पित है। स्वयं कर्नल हरेंद्र सिंह सहरावत सेना में रहे। पिता के बाद बेटे ने भी भारतीय सेना को ज्वाइन किया। उनके बेटे कैप्टन वासु सहरावत 10 आर्म्ड रेजीमेंट सूरतगढ़ में तैनात हैं। सेना में महानिदेशक पद पर रहे सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जर्नल सुमित कुमार भी सहरावत परिवार के बेहद करीबी रिश्तेदार हैं।
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युद्ध नहीं स्थायी समाधान जरूरी
शहीद की पत्नी उषा सहरावत कहती हैं भारत-चीन सीमा विवाद का हल युद्ध नहीं है। दोनों देशों के पास बड़ी सेनाएं हैं। युद्ध हुआ तो दोनों देशों को बड़ी क्षति होगी। विवाद को खत्म करने के लिए शांति से स्थायी समाधान निकालना होगा।